Tuesday, 11 August 2026

Kanpur Cyber Crime: IIT कानपुर के रिटायर्ड अफसर को 5 दिन तक किया Digital Arrest, ED का डर दिखाकर ऐंठे ₹16.55 लाख

कानपुर में IIT के रिटायर्ड अधिकारी को Digital Arrest के नाम पर साइबर ठगी और ₹16.55 लाख की धोखाधड़ी दर्शाता हुआ न्यूज थंबनेल

Kanpur Digital Arrest: IIT के रिटायर्ड अफसर को बनाया साइबर ठगी का शिकार

उत्तर प्रदेश के कानपुर से साइबर अपराध का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, साइबर ठगों ने IIT कानपुर के रिटायर्ड सुपरिंटेंडेंट अजय कुमार को कथित तौर पर पांच दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराए रखा।

जालसाजों ने खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) का अधिकारी बताया और रिटायर्ड अधिकारी पर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शामिल होने का आरोप लगाया। इसके बाद जेल भेजने की धमकी और परिवार को नुकसान पहुंचाने का डर दिखाकर उनसे 16 लाख 55 हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए गए।

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि डिजिटल ठगी करने वाले अपराधी किस तरह सरकारी एजेंसियों और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर लोगों को मानसिक दबाव में डाल रहे हैं।


30 जुलाई को आया था फोन

Live Hindustan की रिपोर्ट के मुताबिक, कानपुर के गांधी नगर निवासी 71 वर्षीय अजय कुमार को 30 जुलाई को मोबाइल फोन पर कॉल आई थी।

कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को ED का अधिकारी बताया। उसने अजय कुमार पर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में शामिल होने का आरोप लगाया।

इसके बाद कथित साइबर ठगों ने उन्हें लगातार डराना शुरू कर दिया। उन्हें बताया गया कि उनके खिलाफ गंभीर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।


पांच दिन तक रखा Digital Arrest

साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर अजय कुमार को पांच दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर अपने नियंत्रण में रखा।

Digital Arrest में अपराधी आमतौर पर फोन या वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित को यह विश्वास दिलाते हैं कि वह किसी गंभीर अपराध की जांच में फंस गया है और उसे ऑनलाइन निगरानी में रखा गया है।

इस मामले में भी कथित ठगों ने खुद को सरकारी अधिकारी बताया और लगातार संपर्क में रहकर पीड़ित पर दबाव बनाए रखा।


फर्जी Supreme Court सुनवाई भी दिखाई

इस साइबर ठगी में अपराधियों ने कथित तौर पर सिर्फ ED अधिकारी बनकर डराने तक ही बात सीमित नहीं रखी।

रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो कॉल के दौरान उन्हें Supreme Court में चल रही कथित फर्जी सुनवाई भी दिखाई गई।

इस तरह के फर्जी वीडियो, दस्तावेज और सरकारी अधिकारियों की पहचान का इस्तेमाल साइबर अपराधी पीड़ित का भरोसा जीतने के लिए कर सकते हैं।

मकसद यह होता है कि पीड़ित को लगे कि उसके खिलाफ वास्तव में कोई कानूनी कार्रवाई चल रही है।


बेटी को नुकसान पहुंचाने की भी धमकी

मामले को और गंभीर बनाने के लिए साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर अजय कुमार की इकलौती बेटी को भी नुकसान पहुंचाने की धमकी दी।

रिपोर्ट के अनुसार, उनकी बेटी बेंगलुरु की एक IT कंपनी में नौकरी करती हैं।

इस धमकी के कारण पीड़ित पर मानसिक दबाव और बढ़ गया और वह कथित जालसाजों की बातों में फंसते चले गए।


16 लाख 55 हजार रुपये कराए ट्रांसफर

साइबर ठगों ने कथित तौर पर अलग-अलग तरीकों से रिटायर्ड अधिकारी से कुल ₹16.55 लाख ट्रांसफर करा लिए।

आरोप है कि मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और जेल भेजने का डर दिखाकर उनसे पैसे लिए गए।

यह रकम गंवाने के बाद पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की।


पुलिस ने शुरू की जांच

मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

Live Hindustan की रिपोर्ट में थाना प्रभारी अभय सिंह के हवाले से बताया गया है कि IIT के रिटायर्ड अधिकारी से साइबर ठगी का मामला सामने आया है और शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है।

पुलिस जांच के दौरान कॉल करने वालों की पहचान, बैंक खातों और पैसे के लेनदेन से जुड़े विवरण की जांच की जा सकती है।


क्या होता है Digital Arrest Scam?

Digital Arrest कोई वास्तविक कानूनी गिरफ्तारी प्रक्रिया नहीं है। यह साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक धोखाधड़ी का तरीका है।

इसमें अपराधी खुद को पुलिस, ED, CBI, TRAI, RBI या किसी अन्य सरकारी अथॉरिटी का अधिकारी बताकर व्यक्ति को डराते हैं।

इसके बाद वे दावा करते हैं कि व्यक्ति का नाम किसी अपराध या मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सामने आया है।

पीड़ित को वीडियो कॉल पर रहने, किसी से संपर्क नहीं करने और पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की जाती है।


साइबर ठग लोगों को कैसे फंसाते हैं?

Digital Arrest Scam में अक्सर एक के बाद एक कई तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

1. सरकारी अधिकारी बनकर फोन

सबसे पहले आरोपी किसी सरकारी एजेंसी या पुलिस अधिकारी का नाम लेकर कॉल करता है।

2. गंभीर अपराध का आरोप

पीड़ित को बताया जाता है कि उसके नाम से कोई FIR, बैंक खाता, मोबाइल नंबर या मनी लॉन्ड्रिंग केस जुड़ा है।

3. वीडियो कॉल पर पूछताछ

इसके बाद वीडियो कॉल शुरू कर दी जाती है ताकि पीड़ित को लगे कि वास्तव में किसी सरकारी कार्यालय से कार्रवाई हो रही है।

4. फर्जी दस्तावेज

कथित अपराधी फर्जी ID कार्ड, FIR, नोटिस या अदालत के दस्तावेज दिखा सकते हैं।

5. पैसे की मांग

आखिर में “जांच”, “वेरिफिकेशन” या “सुरक्षा” के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने को कहा जाता है।


पढ़े-लिखे लोग भी क्यों फंस रहे हैं?

इस घटना की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि साइबर अपराधियों ने एक ऐसे व्यक्ति को निशाना बनाया जो लंबे समय तक IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में काम कर चुके थे।

इससे पता चलता है कि Digital Arrest Scam केवल तकनीकी जानकारी की कमी वाले लोगों तक सीमित नहीं है।

साइबर अपराधी अब पहले से अधिक विश्वसनीय तरीके अपनाने की कोशिश करते हैं। वे सरकारी भाषा, फर्जी दस्तावेज, वीडियो कॉल और डर पैदा करने वाली परिस्थितियों का इस्तेमाल कर सकते हैं।


अगर ऐसा फोन आए तो क्या करें?

अगर कोई व्यक्ति फोन पर खुद को पुलिस, ED, CBI या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी या मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाए, तो सबसे पहले घबराएं नहीं

इन बातों का ध्यान रखें:

  • फोन पर किसी अनजान व्यक्ति को पैसे ट्रांसफर न करें।
  • OTP, PIN, CVV या बैंकिंग पासवर्ड साझा न करें।
  • वीडियो कॉल पर किसी सरकारी अधिकारी की पहचान को सिर्फ स्क्रीन देखकर वास्तविक न मानें।
  • किसी विश्वसनीय परिवार के सदस्य को तुरंत बताएं।
  • संबंधित सरकारी एजेंसी के आधिकारिक नंबर से जानकारी की पुष्टि करें।
  • बैंक से तुरंत संपर्क करें यदि पैसे ट्रांसफर हो चुके हैं।
  • साइबर अपराध की शिकायत तुरंत दर्ज करें।

परिवार के बुजुर्गों को विशेष रूप से जागरूक करें

Digital Arrest Scam में बुजुर्गों को अक्सर निशाना बनाया जाता है क्योंकि अपराधी उन्हें लंबे समय तक फोन पर मानसिक दबाव में रखने की कोशिश कर सकते हैं।

परिवार के सदस्यों को अपने माता-पिता और बुजुर्ग रिश्तेदारों को यह स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि कोई भी वास्तविक कानूनी कार्रवाई केवल वीडियो कॉल पर पैसे जमा कराने की प्रक्रिया नहीं होती।

अगर कोई फोन करके कहे कि “आप गिरफ्तार हैं” और तुरंत पैसे भेजने का दबाव बनाए, तो यह गंभीर साइबर धोखाधड़ी का संकेत हो सकता है।


निष्कर्ष

कानपुर में IIT कानपुर के रिटायर्ड सुपरिंटेंडेंट से ₹16.55 लाख की कथित साइबर ठगी का मामला Digital Arrest Scam के बढ़ते खतरे को सामने लाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, ठगों ने खुद को ED अधिकारी बताकर अजय कुमार को पांच दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराए रखा, फर्जी Supreme Court सुनवाई दिखाई और परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी। इसके बाद उनसे रकम ट्रांसफर कराई गई। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है।

सबसे जरूरी बात यह है कि किसी भी सरकारी अधिकारी के नाम पर आए फोन से डरकर पैसे ट्रांसफर न करें। पहले स्वतंत्र रूप से पहचान और मामले की पुष्टि करें और जरूरत पड़ने पर तुरंत पुलिस या साइबर अपराध सहायता व्यवस्था से संपर्क करें।


FAQs

Digital Arrest क्या होता है?

Digital Arrest साइबर ठगों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला धोखाधड़ी का तरीका है, जिसमें वे खुद को पुलिस या सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ित को ऑनलाइन निगरानी या गिरफ्तारी के नाम पर डराते हैं।

कानपुर में कितने रुपये की ठगी हुई?

रिपोर्ट के अनुसार, IIT कानपुर के रिटायर्ड अधिकारी से ₹16.55 लाख ट्रांसफर कराए गए।

पीड़ित को किस एजेंसी का अधिकारी बनकर फोन किया गया?

रिपोर्ट के अनुसार, साइबर अपराधियों ने खुद को ED अधिकारी बताया था।

पीड़ित को कितने दिन तक Digital Arrest रखा गया?

रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें करीब पांच दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराए रखा गया।

क्या Digital Arrest वास्तव में कानूनी गिरफ्तारी है?

नहीं। “Digital Arrest” साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला धोखाधड़ी का शब्द है। किसी अनजान व्यक्ति द्वारा वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी बताकर पैसे मांगना गंभीर चेतावनी का संकेत है।

अगर पैसे ट्रांसफर हो जाएं तो क्या करें?

तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें, लेनदेन को रिपोर्ट करें और साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करें। जितनी जल्दी कार्रवाई की जाए, उतना बेहतर होता है।

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