मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में मंगलवार शाम सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से क्लोरीन गैस का रिसाव होने के बाद आसपास के इलाके में अफरातफरी मच गई। मामला पल्लवपुरम फेज-2 का है, जहां गैस की चपेट में आने के बाद लोगों ने आंखों में जलन, खांसी और सांस लेने में परेशानी की शिकायत की। स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने आसपास के इलाके को खाली कराया।
घटना के बाद फायर ब्रिगेड की चार गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और रिसाव को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई शुरू की गई। अधिकारियों के मुताबिक बाद में स्थिति नियंत्रण में आ गई और लोगों को प्रभावित क्षेत्र से दूर रखा गया।
शाम करीब 7 बजे शुरू हुआ गैस रिसाव
रिपोर्टों के अनुसार पल्लवपुरम फेज-2 के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में मंगलवार शाम करीब 7 बजे गैस की तेज गंध फैलने लगी। आसपास के लोगों को अचानक आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी महसूस हुई।
कुछ ही देर में इलाके में लोगों के बीच डर का माहौल बन गया। कई परिवार बच्चों और बुजुर्गों को लेकर सुरक्षित स्थान की ओर चले गए। पुलिस ने भी प्रभावित इलाके में लोगों की आवाजाही रोकने के लिए रास्तों को बंद कराया।
कई लोगों को अस्पताल ले जाना पड़ा
गैस के संपर्क में आने के बाद कई लोगों की तबीयत बिगड़ने की जानकारी सामने आई। अलग-अलग रिपोर्टों में अस्पताल पहुंचाए गए लोगों की संख्या 8 से 15 के बीच बताई गई है। जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआती तौर पर 14 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिनमें चार बच्चे और एक स्थानीय पार्षद भी शामिल थे। बाद में तीन लोगों को डिस्चार्ज किए जाने और 11 लोगों के भर्ती रहने की जानकारी दी गई।
स्थानीय रिपोर्टों में पीड़ितों में आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी और सीने में भारीपन जैसी शिकायतों का उल्लेख है। कुछ लोगों की हालत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
करीब 400 मीटर के इलाके को कराया गया खाली
गैस रिसाव के बाद पुलिस और प्रशासन ने STP के आसपास के क्षेत्र को खाली कराया। जागरण के मुताबिक करीब 400 मीटर की परिधि में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। दमकल की टीमों ने मौके पर पहुंचकर रिसाव को नियंत्रित करने के लिए पानी की बौछार का इस्तेमाल किया।
पुलिस ने लोगों को प्रभावित क्षेत्र में जाने से बचने की सलाह दी। कुछ रिपोर्टों के अनुसार लोगों को घरों में रहने और जरूरत पड़ने पर मुंह ढककर सुरक्षित स्थान पर जाने के निर्देश भी दिए गए।
वाल्व में लीकेज से गैस निकलने की शुरुआती जानकारी
नगर आयुक्त सौरभ गंगवार के अनुसार STP में लगे क्लोरीन सिस्टम के वाल्व में लीकेज की वजह से गैस का रिसाव हुआ। अधिकारियों ने बताया कि रिसाव को रोकने के बाद स्थिति नियंत्रण में आ गई।
हालांकि, रिसाव की तकनीकी वजह को लेकर जांच जारी है। कुछ स्थानीय रिपोर्टों में पाइपलाइन के एक हिस्से में जरूरी वॉशर नहीं होने की संभावना का भी उल्लेख किया गया है। इसलिए गैस लीक का अंतिम तकनीकी कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
STP में क्लोरीन गैस का इस्तेमाल क्यों होता है?
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में पानी को उपचारित करने की प्रक्रिया के दौरान कीटाणुओं को नियंत्रित करने के लिए क्लोरीन का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन क्लोरीन गैस का अनियंत्रित रिसाव आसपास मौजूद लोगों के लिए स्वास्थ्य संबंधी परेशानी पैदा कर सकता है।
इसके संपर्क में आने पर आंखों और गले में जलन, खांसी, सांस लेने में दिक्कत और सीने में जकड़न जैसे लक्षण हो सकते हैं। ज्यादा मात्रा में संपर्क होने पर स्थिति गंभीर भी हो सकती है।
रखरखाव को लेकर भी उठे सवाल
घटना के बाद STP के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। नगर आयुक्त ने बताया कि प्लांट हाल में नगर निगम को हैंडओवर किए गए थे और इसके रखरखाव की जिम्मेदारी एक कंपनी को दी गई है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से भी मेंटेनेंस को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इन आरोपों और जिम्मेदारी से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है।
मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि गैस का रिसाव किस वजह से हुआ, सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी थी या नहीं और घटना के लिए किसी स्तर पर लापरवाही जिम्मेदार थी या नहीं।