सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण का विवाद अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। मस्जिद कमेटी के मुतवल्ली मोहम्मद तनवीर अहमद की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर प्रशासन की कार्रवाई को चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मस्जिद को बिना कानूनी नोटिस और बिना किसी सक्षम ध्वस्तीकरण आदेश के गिराया गया।
मस्जिद कमेटी ने अपनी याचिका में पूजा स्थल अधिनियम (Places of Worship Act) के उल्लंघन का भी आरोप लगाया है। मामले में जिला प्रशासन, उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, हाईकोर्ट में याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई हो सकती है।
मस्जिद कमेटी ने क्या चुनौती दी?
मस्जिद कमेटी का कहना है कि प्रशासन ने ध्वस्तीकरण से पहले उन्हें पर्याप्त कानूनी अवसर नहीं दिया। कमेटी की ओर से दाखिल याचिका में दावा किया गया है कि कार्रवाई से पहले न तो उचित नोटिस दिया गया और न ही ऐसा ध्वस्तीकरण आदेश सामने रखा गया, जिसके आधार पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
कमेटी ने ध्वस्तीकरण की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट से मामले की न्यायिक समीक्षा की मांग की है।
सरकारी जमीन को लेकर क्या है विवाद?
इस पूरे विवाद की जड़ मस्जिद की जमीन के स्वामित्व और कब्जे को लेकर है। प्रशासन का पक्ष रहा है कि कलेक्ट्रेट परिसर की जमीन सरकारी है और वहां बनी मस्जिद को अवैध निर्माण माना गया था।
16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के रूप में माना था और मस्जिद प्रबंधन पर करीब 6.41 करोड़ रुपये का अर्थदंड लगाए जाने की बात सामने आई थी।
इसके बाद मामले में अपील की गई, लेकिन 2 सितंबर को जिला अदालत ने अपील खारिज कर दी। इसके तीन दिन बाद, 5 सितंबर को प्रशासन ने मस्जिद को ध्वस्त कर दिया।
कमेटी का दावा- पहले स्वामित्व साबित होना जरूरी
मस्जिद कमेटी ने अपनी कानूनी चुनौती में Public Premises (Eviction of Unauthorised Occupants) Act के तहत हुई कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं।
कमेटी की ओर से दलील दी गई है कि संबंधित कानून के तहत कार्रवाई करने से पहले यह स्पष्ट रूप से स्थापित किया जाना चाहिए कि संपत्ति पर सरकार का अधिकार किस आधार पर है। कमेटी का कहना है कि दस्तावेजों और साक्ष्यों की पूरी तरह जांच किए बिना ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए थी।
हालांकि, इन दलीलों पर अंतिम फैसला अदालत को करना है।
प्रशासन ने क्यों गिराई मस्जिद?
प्रशासन के अनुसार, कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद सरकारी जमीन पर थी और सक्षम न्यायिक आदेशों के बाद इसे हटाया गया। प्रशासन ने यह भी कहा था कि सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने निर्माण को अवैध माना था और उसके बाद की अपील भी खारिज हो चुकी थी।
यानी प्रशासन का तर्क है कि ध्वस्तीकरण अचानक या बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के नहीं किया गया, बल्कि पहले से चल रही न्यायिक प्रक्रिया के बाद कार्रवाई हुई।
5 सितंबर को हुआ था ध्वस्तीकरण
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को 5 सितंबर 2026 की सुबह प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया था। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रशासन की ओर से इसे अदालत के आदेशों के बाद की गई कार्रवाई बताया गया।
मस्जिद गिराए जाने के बाद मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया। विपक्षी नेताओं ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि सरकार और प्रशासन की ओर से इसे कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया गया कदम बताया गया।
अब हाईकोर्ट में क्या होगा?
अब सभी की नजर इलाहाबाद हाईकोर्ट की संभावित सुनवाई पर है। मस्जिद कमेटी की याचिका में ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया, नोटिस, संबंधित न्यायिक आदेशों और जमीन के अधिकार समेत कई कानूनी सवाल उठाए गए हैं।
हाईकोर्ट सबसे पहले याचिका की सुनवाई के दौरान यह देख सकता है कि मामले में किन कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर विचार जरूरी है। आगे अदालत प्रशासन और अन्य पक्षों से जवाब भी मांग सकती है।
जमीयत भी सक्रिय, कानूनी लड़ाई की तैयारी
इसी बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने भी मामले में सक्रियता दिखाई है। संगठन का प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर पहुंचा और स्थानीय लोगों, नेताओं तथा मामले से जुड़े लोगों से जानकारी जुटाई। जमीयत ने संकेत दिया है कि दस्तावेजों और कानूनी स्थिति की समीक्षा के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।
इससे साफ है कि सहारनपुर मस्जिद विवाद अब स्थानीय प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर एक बड़े कानूनी विवाद का रूप ले चुका है।
मलबे के नीचे मिली संरचना ने भी बढ़ाई चर्चा
ध्वस्तीकरण के बाद मस्जिद के मलबे के नीचे एक पुरानी कुएं जैसी संरचना मिलने की खबर भी सामने आई है। इस संरचना और उससे जुड़े पुरातात्विक पहलुओं को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
हालांकि, इस संरचना के इतिहास और महत्व को लेकर अंतिम निष्कर्ष विशेषज्ञ जांच के बाद ही सामने आएगा।