सोनभद्र: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में सरकारी स्कूलों में मिलने वाला मिड-डे मील यानी PM पोषण योजना का भोजन बच्चों और अभिभावकों को पसंद आ रहा है। स्कूलों में तय मेन्यू के अनुसार अलग-अलग दिन अलग भोजन परोसा जा रहा है। बच्चों का कहना है कि खाना स्वादिष्ट है और उन्हें इसमें घर जैसा स्वाद मिलता है। वहीं, भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से नियमित निरीक्षण भी किया जा रहा है।
बच्चों ने कहा- खाना है स्वादिष्ट
सोनभद्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय रॉबर्ट्सगंज और अखाड़ा महाल में बच्चों से जब स्कूल में मिलने वाले भोजन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इसकी तारीफ की। बच्चों के मुताबिक उन्हें रोज एक जैसा खाना नहीं मिलता, बल्कि निर्धारित मेन्यू के अनुसार अलग-अलग दिन अलग भोजन परोसा जाता है।
बच्चों ने भोजन के स्वाद को घर के खाने जैसा बताया। इससे यह भी सामने आया कि स्कूल में मिलने वाला भोजन केवल पोषण देने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों की पसंद और स्वाद को ध्यान में रखकर भी तैयार किया जा रहा है।
ताजी सब्जियों और अच्छी सामग्री पर जोर
स्कूल शिक्षकों के अनुसार PM पोषण योजना के तहत निर्धारित मेन्यू का पालन किया जाता है। भोजन तैयार करने में ताजी सब्जियों और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है।
स्कूल प्रशासन का कहना है कि बच्चों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के लिए तय व्यवस्था का पालन किया जा रहा है।
खाने की गुणवत्ता पर अधिकारियों की नजर
सिर्फ स्कूल स्तर पर निगरानी ही नहीं, बल्कि प्रशासन की ओर से भी भोजन की गुणवत्ता की जांच की जा रही है। जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला और तहसील स्तर की टीमें स्कूलों का रैंडम निरीक्षण करती हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसी टीमें सप्ताह में करीब 4 से 5 स्कूलों का निरीक्षण करती हैं। इनमें SDM स्तर के अधिकारी भी शामिल होते हैं। खास बात यह है कि अधिकारी बच्चों के साथ बैठकर खुद भी भोजन करते हैं, जिससे मौके पर ही खाने की गुणवत्ता और व्यवस्था का जायजा लिया जा सके।
बच्चों के स्वास्थ्य का भी रखा जा रहा ध्यान
PM पोषण योजना के तहत भोजन के अलावा बच्चों के स्वास्थ्य पर भी ध्यान दिया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक स्कूलों में बच्चों को पूरे सप्ताह आयरन की गोलियां भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
इसका उद्देश्य बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरतों को स्कूल स्तर पर ही बेहतर तरीके से पूरा करना है।
अभिभावकों का भी बढ़ रहा भरोसा
स्कूल में मिलने वाले भोजन को लेकर अभिभावकों की प्रतिक्रिया भी सकारात्मक बताई गई है। एक अभिभावक ने बताया कि उनका बच्चा दिव्यांग है और सुन नहीं सकता, लेकिन वह इशारों के जरिए खाने की तारीफ करता है।
वहीं, एक अन्य अभिभावक ने बताया कि स्कूल की शिक्षा और सुविधाओं के बारे में अच्छी जानकारी मिलने के बाद उन्होंने अपने बच्चे का नाम प्राइवेट स्कूल से कटवाकर सरकारी स्कूल में दाखिला कराया।
PM पोषण योजना का उद्देश्य क्या है?
PM पोषण योजना का उद्देश्य सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक पका हुआ भोजन उपलब्ध कराना है। सोनभद्र जिला प्रशासन की जानकारी के अनुसार, मिड-डे मील योजना का उद्देश्य बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के साथ-साथ स्कूलों में नामांकन, उपस्थिति और बच्चों के स्कूल में बने रहने को बढ़ावा देना भी है।
सरकारी स्कूलों में खाने की व्यवस्था पर बढ़ी निगरानी
सोनभद्र की यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है। नियमित निरीक्षण और अधिकारियों द्वारा बच्चों के साथ भोजन करने से व्यवस्था की जमीनी जांच करने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, किसी एक या कुछ स्कूलों की स्थिति को पूरे प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों की स्थिति नहीं माना जा सकता। अलग-अलग जिलों और स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता और व्यवस्था अलग हो सकती है।