Friday, 09 October 2026
होम Crime धनकुट्टी की सड़क पर दौड़े दंगाई:कानपुर पहुंची ब्रिटिश ब्रांड की “मॉरिस माइनर” कार, कत्था वाला धर्मशाला में “गांधी एण्ड माय मदर” की शूटिंग
Crime

धनकुट्टी की सड़क पर दौड़े दंगाई:कानपुर पहुंची ब्रिटिश ब्रांड की “मॉरिस माइनर” कार, कत्था वाला धर्मशाला में “गांधी एण्ड माय मदर” की शूटिंग

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
9 October 2026 7:26 PM 1 मिनट पठन 141 Views
धनकुट्टी की सड़क पर दौड़े दंगाई:कानपुर पहुंची ब्रिटिश ब्रांड की “मॉरिस माइनर” कार, कत्था वाला धर्मशाला में “गांधी एण्ड माय मदर” की शूटिंग

कानपुर की सड़क पर जलती मशाल और हाथों में डंडे, हंसिया लेकर दौड़ते दंगाई… धनकुट्टी की सड़क पर 1940 की मिलिट्री जीप में सफेद ड्रेस में बंगाल पुलिस के सिपाही और नेता शांति बनाए रखने की अपील की एनाउंसमेंट करते… दंगे के बाद उजड़ा घर, जहां पांच लाशों को देखकर नौजवान के होश उड़ गए… फिल्म ‘गांधी एंड माय मदर’ की शूटिंग में गुरुवार रात शहर के धनकुट्टी की सड़क और कत्था वाला धर्मशाला में ये सीन फिल्माए गए। शहर के पुराने इलाके को पश्चिम बंगाल की सड़क दिखाने के लिए दुकानों के बैनर और बोर्ड को बांग्ला भाषा में कर दिया गया। बुधवार से फिल्म की शूटिंग कानपुर में हो रही है। पहले दिन बॉलीवुड अभिनेता मनोज बाजपेयी ज्वाला देवी स्कूल आंनदबाग पहुंचे थे। गुरुवार को भी शूटिंग शाम 6 बजे धनकुट्टी के कत्था वाले धर्मशाला और धनकुट्टी की सड़क पर की गई। शूटिंग शाम 6 बजे शुरू हुई और शुक्रवार सुबह 5 बजे तक अलग-अलग लोकेशन पर शॉट्स शूट किए गए। शुक्रवार को शूटिंग का आखिरी दिन होगा। इस दिन कत्था वाले धर्मशाला में ही शूटिंग की जाएगी। मनोज बाजपेयी भी शूटिंग के लिए पहुंचेंगे। गुरूवार रात शूटिंग की जानकारी मिलते ही सड़क पर भीड़ जमा हो गई। फिल्म का निर्देशन मशहूर निर्देशक सुधीर मिश्रा कर रहे हैं। फिल्म में गांधी जी का मुख्य किरदार अभिनेता मनोज बाजपेयी निभा रहे हैं। इसके अलावा अभिनेता सौरभ शुक्ला और दिव्या दत्ता भी फिल्म में हैं। फिल्म के सीन उस दौर के मुताबिक फिल्माए जा रहे हैं, जब बंगाल में हिंसा हुई थी और गांधी जी वहां शांति के लिए गए थे। उसी दौर की गाड़ियों और वेशभूषा का इस्तेमाल किया जा रहा है। एक सीन में लगा एक घंटा, पांच बार हुआ रीटेक फिल्म में एक दृश्य फिल्माया गया, जिसमें दंगा होने के बाद एक नौजवान घर के भीतर घुसता है। घर के आंगन में सामान बिखरा हुआ है, मटका फूटा पड़ा है और चारपाई पलटी हुई है। इसी के आसपास दंगाइयों द्वारा मारे गए पांच घरवालों की लाशें पड़ी हैं। इस शॉट को पूरा करने के लिए पांच बार रीटेक लेना पड़ा। दो बार तो जब असिस्टेंट डायरेक्टर शूट करा रहे थे, उसी दौरान सुधीर मिश्रा को शॉट के बीच में कलाकारों को सीन समझाना पड़ा। इस एक सीन को पूरा करने में करीब एक घंटे का समय लग गया। 50 से ज्यादा जूनियर आर्टिस्ट स्थानीय और आसपास के इलाकों से आए फिल्म में अलग-अलग किरदारों को निभाने के लिए जूनियर आर्टिस्ट भी पहुंचे। इनमें कई स्थानीय कलाकार थे, जबकि कुछ दिल्ली और मुंबई से भी आए थे। फिल्म में दंगे के शॉट्स भी शूट किए जाने थे, जिन्हें कलाकारों ने पूरा किया। कोलकाता पुलिस की वर्दी में कलाकार सफेद ड्रेस में नजर आए, जो मिलिट्री जीप में दंगे के बीच से गुजरते दिखे। इसी जीप में अभिनय करने वाले कलाकार एनाउंसमेंट करते नजर आए कि गांधी जी ने शांति बनाए रखने की अपील की है। धर्मशाला में इसी साल दूसरी फिल्म की शूटिंग धर्मशाला के मैनेजर प्रेम प्रकाश ने बताया कि इसी साल फरवरी में भी यहां एक फिल्म की शूटिंग की गई थी। एक वेब सीरीज की शूटिंग तीन दिन तक हुई थी। अब इस फिल्म के लिए भी यहां की पुरानी इमारत को देखकर फिल्म निर्माताओं ने लोकेशन के मुताबिक इसे चुना है। इस फिल्म की शूटिंग यहां दो दिन तक हो रही है। शहर में ब्रिटिश काल की कार पहुंची कानपुर के धनकुट्टी में ब्रिटिश ब्रांड मॉरिस मोटर्स की 1948 से 1971 के बीच निर्मित मॉरिस माइनर कार भी पहुंची। बताया जा रहा है कि इसे लखनऊ से मंगाया गया है। इसका इस्तेमाल शुक्रवार को किया जाएगा, जब मनोज बाजपेयी शूटिंग के लिए पहुंचेंगे। गुरुवार को शूटिंग के दौरान धनकुट्टी की सड़क पर 1940 के दौर की मिलिट्री जीप दौड़ती नजर आई। 100 साल पुराना धनकुट्टी का कत्था वाला धर्मशाला आंदोलन से जुड़ा था धनकुट्टी के कत्था वाले धर्मशाला से एक आंदोलन का इतिहास भी जुड़ा है। साल 1959 सांतिया कांड में एक पीड़ित महिला को न्याय दिलाने के लिए पुलिस और लोगों के बीच आंदोलन हिंसा में बदल गया था। स्थानीय निवासी नागेंद्र अवस्थी ने बताया कि कत्था वाले धर्मशाला में एक महिला से जुड़ा किस्सा है। उसे न्याय दिलाने के लिए उस समय यहां के मैनेजर अंबिका शुक्ला उर्फ अंबिका जालिम ने आवाज उठाई थी। इसके बाद तत्कालीन छात्र संघ अध्यक्ष श्याम मिश्रा ने महिला के लिए पुलिस के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया था। इसके बाद कई दिनों तक हिंसा हुई और कर्फ्यू लगा रहा था। मशहूर निर्देशक बना रहे हैं फिल्म, राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है निर्देशक सुधीर मिश्रा मशहूर फिल्म निर्देशक हैं। उन्होंने ‘चमेली’ जैसी फिल्म बनाई है। वह ऐसी फिल्मों का निर्देशन करते हैं, जो समाज को संदेश देती हैं। उन्हें फिल्म निर्देशन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है। इन फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं सुधीर मिश्रा ‘ये वो मंजिल तो नहीं’ (1987) निर्देशन के क्षेत्र में पहली फिल्म, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार ‘मैं जिंदा हूं’ (1988 ‘धारावी’ (1992) ‘इस रात की सुबह नहीं’ (1996) ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’ (2003) ‘कलकत्ता मेल’ (2003) ‘चमेली’ (2003) ‘खोया खोया चांद’ (2007) ‘ये साली जिंदगी’ (2011) ‘इंकार’ (2013) ‘दास देव’ (2018) ‘सीरियस मेन’ (2020) ‘अफवाह’ (2023) वेब सीरीज ‘होस्टेजेस’ ‘तनाव’ (2022) ‘जहानाबाद – ऑफ लव एंड वॉर’

Source: Read Full Article

प्रतिक्रिया दें (Leave a Reply)

आपका ईमेल पता सुरक्षित है और प्रकाशित नहीं किया जाएगा। आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *