मेरठ में 8 साल पढ़ा मोहम्मद जफर, जैश-ए-मोहम्मद कनेक्शन की जांच से मचा हड़कंप; ATS के सामने कई सवाल
मेरठ/पूर्णिया: उत्तर प्रदेश एटीएस ने बिहार के पूर्णिया निवासी 24 वर्षीय मोहम्मद जफर को जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े कथित नेटवर्क के मामले में गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान जफर का मेरठ से पुराना संबंध सामने आया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, जफर ने मेरठ के कोतवाली क्षेत्र स्थित एक मदरसे में 2016 से 2023 तक करीब आठ साल पढ़ाई की थी। हालांकि, मदरसा प्रबंधन से जुड़े लोगों ने उसके बारे में तत्काल जानकारी होने से इनकार किया है और रिकॉर्ड की जांच की बात कही है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, जफर पर आतंकी संगठन से प्रभावित होने, कथित तौर पर चंदा जुटाने और पाकिस्तान स्थित नेटवर्क के संपर्क में रहने के आरोप हैं। इन आरोपों की आगे की कानूनी जांच जारी है।
🚨 कौन है मोहम्मद जफर?
मोहम्मद जफर मूल रूप से बिहार के पूर्णिया जिले का रहने वाला बताया गया है। यूपी एटीएस ने उसे कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े नेटवर्क की जांच के दौरान गिरफ्तार किया।
जांच में उसका मेरठ से पुराना कनेक्शन सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां उसके मेरठ में बिताए वर्षों और वहां उसके संपर्कों के बारे में जानकारी जुटा रही हैं।
🏫 मेरठ के मदरसे में आठ साल पढ़ाई
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, जफर ने मेरठ के कोतवाली क्षेत्र के एक मदरसे में 2016 से 2023 तक पढ़ाई की थी।
वह इस दौरान मेरठ में ही रहता था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि उस अवधि में उसके संपर्क किन लोगों से थे और बाद में उसके कथित आतंकी नेटवर्क से जुड़ने की परिस्थितियां क्या थीं।
हालांकि, सिर्फ किसी मदरसे में पढ़ाई करना और किसी व्यक्ति के कथित आतंकी कनेक्शन के बीच सीधे संबंध का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। जफर के कथित नेटवर्क और उसके शैक्षणिक जीवन के बीच संबंध की पुष्टि जांच से ही होगी।
🔎 मदरसा शिक्षक ने क्या कहा?
रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित मदरसे के एक शिक्षक ने बताया कि वह करीब 12 वर्षों से वहां पढ़ा रहे हैं, लेकिन उन्हें जफर के बारे में तत्काल जानकारी नहीं थी।
शिक्षक ने कहा कि जफर के संबंध में जानकारी हासिल करने के लिए मदरसे के रजिस्टर और रिकॉर्ड की जांच करनी होगी।
इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि जफर ने वहां कब दाखिला लिया, किस अवधि तक पढ़ाई की और उसके छात्र रिकॉर्ड में क्या जानकारी दर्ज है।
📱 सोशल मीडिया पर कथित गतिविधियों की जांच
ATS के मुताबिक, जफर के मोबाइल फोन की जांच में कथित तौर पर जिहादी विचारधारा से जुड़ी सामग्री और भाषण मिले हैं।
जांच एजेंसी का दावा है कि वह सोशल मीडिया के माध्यम से ऐसी सामग्री देखता और साझा करता था। उसके मोबाइल में कुछ पाकिस्तानी WhatsApp समूहों से जुड़े होने की जानकारी भी सामने आने की बात कही गई है।
इन डिजिटल सबूतों की जांच एजेंसियां आगे भी कर रही हैं।
🇵🇰 पाकिस्तानी नेटवर्क से संपर्क का दावा
ATS के अनुसार, जफर सोशल मीडिया के जरिए कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े समूह तक पहुंचा और बाद में एक पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में आया।
जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जफर ने किन लोगों से संपर्क किया और उसके नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हो सकता है।
💰 चंदा जुटाने का भी आरोप
ATS के मुताबिक, जफर पर मदरसे के नाम पर लोगों से चंदा एकत्र करने और उस रकम को कथित तौर पर पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन तक पहुंचाने का आरोप है।
यह आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। इसलिए अदालत में दोष सिद्ध होने तक इन्हें आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
🕵️ हापुड़ कनेक्शन की भी जांच
जफर के मामले की जांच के दौरान हापुड़ के शेरपुर गांव का कनेक्शन भी सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 14 अगस्त को ATS ने वहां एक मस्जिद के पास दो संदिग्धों को हिरासत में लिया था।
मौके से मिली एक बाइक के संबंध में भी जांच की जा रही है। बाइक सरधना निवासी कादर अब्दुल सत्तार के नाम पर पंजीकृत बताई गई है। हालांकि इस बाइक के वहां पहुंचने और पूरे मामले में इसकी भूमिका को लेकर अभी जांच जारी है।
🧩 मेरठ कनेक्शन क्यों महत्वपूर्ण?
मेरठ का नाम पिछले कुछ महीनों में कई अलग-अलग आतंकी और संदिग्ध नेटवर्क की जांच में सामने आया है। जनवरी 2026 में मेरठ के एक युवक के कथित अलकायदा स्लीपर सेल कनेक्शन की जांच भी सामने आई थी।
मार्च में भी मेरठ से जुड़े कथित जासूसी नेटवर्क की जांच की खबर सामने आई थी, जिसमें सोशल मीडिया के जरिए लोगों को जोड़ने के आरोपों की जांच हुई थी।
हालांकि, इन अलग-अलग मामलों को एक ही नेटवर्क का हिस्सा मानना अभी उचित नहीं होगा। प्रत्येक मामले की जांच अलग-अलग एजेंसियों द्वारा की जा रही है।
🚔 ATS के सामने अब क्या चुनौती?
मोहम्मद जफर की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं:
- जफर के संपर्क में कौन-कौन लोग थे?
- मेरठ में उसके पुराने संपर्कों की भूमिका क्या थी?
- हापुड़ में पकड़े गए संदिग्धों से उसका क्या संबंध है?
- कथित पाकिस्तानी हैंडलर कौन था?
- चंदे की रकम कहां और कैसे भेजी गई?
- उसके मोबाइल से मिले डिजिटल साक्ष्यों की पूरी कड़ी क्या है?
- क्या इस नेटवर्क में और लोग शामिल हैं?
इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
⚠️ मदरसे को लेकर क्या समझना जरूरी है?
इस मामले में मेरठ के जिस मदरसे में जफर ने पढ़ाई की थी, उसका नाम सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा सकते हैं। लेकिन किसी संस्थान में पढ़े किसी व्यक्ति की कथित आपराधिक गतिविधि के आधार पर पूरे संस्थान या वहां पढ़ने वाले अन्य छात्रों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर जांच का केंद्र जफर की व्यक्तिगत गतिविधियां, उसके कथित संपर्क और डिजिटल/वित्तीय सबूत हैं।
📌 आगे क्या होगा?
ATS अब जफर से पूछताछ, उसके मोबाइल और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच तथा उसके पुराने संपर्कों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और कई दावों की पुष्टि कानूनी प्रक्रिया के दौरान होनी बाकी है।
📊 पूरी खबर एक नजर में
| मुद्दा | जानकारी |
|---|---|
| नाम | मोहम्मद जफर |
| उम्र | 24 वर्ष |
| मूल स्थान | पूर्णिया, बिहार |
| मेरठ कनेक्शन | 2016–2023 में मेरठ में पढ़ाई का दावा |
| जांच एजेंसी | यूपी ATS |
| कथित संगठन | जैश-ए-मोहम्मद |
| मुख्य आरोप | कथित आतंकी नेटवर्क से संपर्क और चंदा जुटाना |
| डिजिटल जांच | मोबाइल/सोशल मीडिया की जांच |
| अन्य कनेक्शन | हापुड़ और पश्चिमी यूपी |
| वर्तमान स्थिति | जांच जारी |
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