Friday, 16 October 2026
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राजस्व कर्मचारी-अमीन की हड़ताल, 1 लाख आवेदन अटके:अंचल ऑफिस में लोग बोले- दलाल मांग रहा 50 हजार, 10 महीने में नहीं हुआ काम

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
16 October 2026 5:26 PM 1 मिनट पठन 88 Views
राजस्व कर्मचारी-अमीन की हड़ताल, 1 लाख आवेदन अटके:अंचल ऑफिस में लोग बोले- दलाल मांग रहा 50 हजार, 10 महीने में नहीं हुआ काम

‘मैं भारतीय सर्वेक्षण विभाग से आया हूं। सरकारी कर्मचारी हूं। जमीन के आंकड़े ऑनलाइन करने हैं। यह जमीन सर्वे निदेशालय के निदेशक की है। मुझे बताया गया कि अभिलेख (रिकॉर्ड) नहीं बनेगा। सीओ ने कहा कि इसमें समय लगेगा। अमीन और कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इस वजह से मुझे काफी परेशानी हो रही है। ’ दानापुर अंचल अधिकारी के ऑफिस में जमीन के पेपर से जुड़े काम लेकर आए राजेश कुमार ने ये बातें गुस्से से लगभग कांपते हुए कहीं। ऐसी परेशानी झेलने वाले राकेश अकेले नहीं हैं। बिहार के हजारों लोग जमीन से जुड़े काम के चलते सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। राजस्व कर्मचारी और अमीन के हड़ताल पर जाने से सारे कामकाज ठप हैं। भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में पढ़िए, राजस्व कर्मचारी और अमीन के हड़ताल का क्या असर है? लोगों को कैसी परेशानी हो रही है? कौन से काम अटक गए हैं? अंचल अधिकारी के ऑफिस में हाथापाई पर उतरने को तैयार लोग राजस्व कर्मचारी और अमीन 11 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इसका असर दिख रहा है। अंचल कार्यालय में जमीन से जुड़े काम के लिए आए लोग परेशान हो रहे हैं। हड़ताल के चलते दानापुर के अंचल अधिकारी दिलीप कुमार गुप्ता भी परेशान दिखे। दैनिक भास्कर की टीम उनके चेंबर में मात्र 15 मिनट रही। बड़ी संख्या में लोग उनसे मिलने, अपनी परेशानी बताने आए थे। उनके छोटे से चेंबर में जितने लोग थे, उससे ज्यादा बाहर गलियारे में अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे थे। उनसे मिलने के लिए गलियारे में कहासुनी तक हुई। सुरक्षा गार्ड बैठाना पड़ा। लोग इतने गुस्से में थे कि हंगामा और हाथापाई करने पर उतर जा रहे थे। अंचल अधिकारी दिलीप कुमार गुप्ता ने कहा, ‘सभी राजस्व कर्मचारी हड़ताल पर हैं। अंचल अमीन भी काम नहीं कर रहे हैं। इससे जमीन से जुड़े कामकाज के साथ सरकारी कार्यवाही भी प्रभावित हो रही है। ’ अब जानिए आम लोगों की परेशानी जमाबंदी नहीं हो पा रही है। न तो आवेदन खारिज किया जा रहा है, न जमाबंदी की जा रही है। 10 महीने से ऑफिस का चक्कर लगा रहा हूं। एक दलाल कहता है कि दौड़ते रहिए, काम नहीं होगा। इसके लिए 50 हजार रुपए मांगे जा रहे हैं। – बैद्यनाथ गुप्ता, दानापुर निवासी दाखिल-खारिज के लिए आ रहा हूं। कोर्ट के फैसले के बाद दो महीने से चक्कर लगा रहा हूं। आज पता चला है कि ऑपरेटर नहीं आया है। कर्मचारी हड़ताल पर हैं। काम नहीं हो रहा है। बिहार में जमीन रखना ही बेवकूफी है। जमीन बेचकर कहीं दूसरी जगह जाना पड़ेगा। – अमरीश कुमार, फुलवारी शरीफ निवासी कर्मचारी ने मंगलवार को आने के लिए कहा था, लेकिन उस दिन भी वह नहीं मिला। अब पता चला कि वह हड़ताल पर चला गया है। पिछले छह महीने से कर्मचारी मुझे दौड़ा रहा है, लेकिन काम नहीं हो रहा है। -विद्या पासवान, पटना निवासी हड़ताल के 5 दिन में कितने काम पर असर पड़ा? बिहार के 537 अंचल कार्यालयों में दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस (ऑनलाइन जमाबंदी सुधार), एलपीसी और जमीन मापी जैसी सेवाओं के लिए रोजाना 20 हजार से अधिक आवेदन आते हैं। औसतन एक अंचल में रोज 40 आवेदन और महीने में लगभग 1200 आवेदन प्राप्त होते हैं। इस हिसाब से राज्य में इन सेवाओं से जुड़े आवेदनों की संख्या 5 दिन में 1 लाख तक पहुंच सकती है। आवेदनों की संख्या अंचल के आकार और आबादी के अनुसार अलग-अलग होती है। पटना के दानापुर जैसे बड़े और घनी आबादी वाले अंचल में महीने में 2,000 से 4,000 तक आवेदन आने का अनुमान है। छोटे ग्रामीण अंचलों में यह संख्या कम होती है। कौन से काम नहीं हो रहे? दाखिल-खारिज: अंचलाधिकारी की माने तो अंचल कार्यालयों में आने वाले कुल आवेदनों में इसकी हिस्सेदारी सबसे अधिक (60-70% ) होती है। इसके तहत जमीन की खरीद-बिक्री के बाद राजस्व रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज किया जाता है। परिमार्जन प्लस: इसके तहत ऑनलाइन जमाबंदी में नाम, खाता, खेसरा और रकबा जैसी त्रुटियों को सुधारने के लिए आवेदन किए जाते हैं। एलपीसी और जमीन मापी: भूमि कब्जा प्रमाण पत्र (LPC) की जरूरत बैंक लोन, अदालती मामलों और सरकारी योजनाओं में पड़ती है। वहीं, जमीन मापी के आवेदन भूमि की सीमाएं तय करने और विवादों के निपटारे के लिए दिए जाते हैं। विशेष भूमि सर्वे: बिहार में चल रहे ऐतिहासिक ‘विशेष भूमि सर्वेक्षण’ और ‘राजस्व महा-अभियान’ पर राजस्व कर्मचारियों और अमीन की हड़ताल का सबसे गंभीर असर पड़ा है। 1960 के दशक के बाद राज्य में पहली बार जमीन का सर्वे हो रहा है। अमीन और राजस्व कर्मियों के आंदोलन के चलते सर्वे नहीं हो पा रहा है। भूमि सर्वे में पुराने खतियान और कागजातों के मिलान कराना, भौतिक सत्यापन और सीमांकन जैसे काम होते हैं। बिहार सरकार का लक्ष्य आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भूमि सर्वे पूरा कर जमीन से जुड़े विवादों को खत्म करने का है। यह काम तय समय सीमा में पूरा होता नहीं दिख रहा है। पुराने खतियान और कागजातों के मिलान में बाधा: विशेष भूमि सर्वे के तहत पुराने रिकॉर्ड की जांच और ‘कैथी लिपि’ में लिखे खतियान का मिलान करने की आवश्यकता होती है। इस काम में पारंगत नियमित राजस्व कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से जमीनी स्तर पर दस्तावेजों का सत्यापन ठप हो गया है। फिजिकल वेरिफिकेशन और सीमांकन रुका: जमीन की वास्तविक पहचान करने, मापी करने और सरहद तय करने में नियमित अमीनों और कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इनके हड़ताल से जमीन पर जाकर किया जाने वाला फिजिकल वेरिफिकेशन पूरी तरह रुक गया है। परिमार्जन प्लस पोर्टल फेल: किसानों डिजिटल तरीके से जमाबंदी में सुधार करा सकें इसके लिए ‘परिमार्जन प्लस’ पोर्टल शुरू किया गया है। इसकी सफलता पूरी तरह से राजस्व कर्मचारियों पर निर्भर है। ऑनलाइन आवेदनों की जमीनी और भौतिक जांच इन्हें करनी होती है। कर्मचारियों की अनुपस्थिति में यह प्रक्रिया पूरी तरह फेल होती दिख रही है। राजस्व महाअभियान: जमीन विवाद सुलझाने और रिकॉर्ड दुरुस्त करने के लिए गांवों में लगाए जा रहे विशेष राजस्व शिविर पूरी तरह सूने पड़े हैं। लोग अपनी जमीन के कागजात और वंशावली लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन काम करने वाले कर्मी गायब हैं। विशेष राजस्व महाअभियान 2026: डिजिटल जमाबंदी की गलतियों को सुधारने और परिमार्जन प्लस के आवेदन जल्द निपटाने के लिए यह विशेष अभियान 15 सितंबर 2026 से चल रहा है। इसे 31 अक्टूबर 2026 तक पूरा करना था। क्या हैं हड़ताल पर गए राजस्व कर्मचारियों की मांगें? बिहार के अंचलों में काम करने वाले राजस्व कर्मचारियों और अंचलाधिकारियों की हड़ताल के पीछे वेतन, पदोन्नति, कार्यभार और सुरक्षा से जुड़ी मांगें प्रमुख हैं। राजस्व कर्मचारियों के 17 सूत्री मांगपत्र में कई अहम मुद्दे शामिल हैं। जब-जब महाअभियान, तब-तब हड़ताल हड़ताल 1- 26 जनवरी से 31 मार्च 2026: सरकार ने डिजिटल रिकॉर्ड दुरुस्त करने के लिए ‘विशेष राजस्व सेवा अभियान’ की घोषणा की। इसके बाद बिहार संयुक्त राजस्व सेवा संघ व अन्य संगठनों ने फरवरी और मार्च 2026 में हड़ताल कर दिया। यह हड़ताल अलग-अलग चरणों में लगभग 86 दिनों तक चली और मई 2026 के पहले सप्ताह में समाप्त हुई। हड़ताल 2- 16 अगस्त से 20 सितंबर 2025: जमीन रिकॉर्ड्स के डिजिटलीकरण का विशेष अभियान चलाया जा रहा था। इस दौरान राजस्व कर्मचारी 35 दिनों तक लगातार हड़ताल पर रहे। इससे काम पूरी तरह प्रभावित हुआ। हड़ताल 3- 11 जून 2025: अपनी 17 सूत्री मांगों को लेकर राजस्व कर्मचारियों ने 28 दिनों के लिए हड़ताल किया। हड़ताल 4- अगस्त 2024: विशेष भूमि सर्वेक्षण की शुरुआत के बाद 16 अगस्त 2024 से राजस्व महाअभियान शुरू हुआ था। बड़ी संख्या में संविदा आधारित सर्वे कर्मियों और अमीनों ने नौकरी से जुड़ी अपनी मांगों को लेकर पहले ही दिन से काम बंद कर दिया था। इसपर सरकार ने बाद में सख्त विभागीय कार्रवाई की थी। इस बार हड़ताल की असर वजह क्या है? मुजफ्फरपुर के मुशहरी अंचल में करीब 15 करोड़ रुपए की 70 डिसमिल जमीन के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिल-खारिज किए जाने का मामला अब प्रशासन और राजस्व विभाग के बीच टकराव की वजह बन गया है। जिला प्रशासन की जांच के बाद विभागीय कार्रवाई के बीच निलंबित अंचलाधिकारी महेंद्र कुमार शुक्ला और राजस्व अधिकारी करुण करण को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मामले में तत्कालीन राजस्व कर्मचारी एकता सिंह, वर्तमान राजस्व कर्मचारी अनुज कुमार समेत आठ लोगों के खिलाफ मुशहरी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इनमें संबंधित राजस्व कर्मचारी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। करीब 15 करोड़ की जमीन के फर्जीवाड़े में गिरफ्तारी हुई, तो राजस्व अधिकारियों के संगठन ने ही कार्रवाई पर सवाल उठा दिए। बिहार राजस्व सेवा संघ ने गिरफ्तारी का कड़ा विरोध करते हुए अधिकारियों को संरक्षण देने की मांग की है।

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