Tuesday, 22 September 2026
होम Crime पाकिस्तान में कैसे बनती फेक करेंसी–भारत आने का रूट डिकोड:रिपोर्टर को एजेंसी का आदमी समझकर मारने की तैयारी; 1.5 लाख देखकर भरोसे में आए एजेंट
Crime

पाकिस्तान में कैसे बनती फेक करेंसी–भारत आने का रूट डिकोड:रिपोर्टर को एजेंसी का आदमी समझकर मारने की तैयारी; 1.5 लाख देखकर भरोसे में आए एजेंट

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
22 September 2026 5:26 PM 1 मिनट पठन 61 Views
पाकिस्तान में कैसे बनती फेक करेंसी–भारत आने का रूट डिकोड:रिपोर्टर को एजेंसी का आदमी समझकर मारने की तैयारी; 1.5 लाख देखकर भरोसे में आए एजेंट

जाली नोटों का चेस्ट नेपाल से गुवाहाटी शिफ्ट हो गया है। बालेन सरकार की सख्ती से नेपाल से नोट नहीं निकल पा रहे थे। इसलिए गुवाहाटी को सेंटर पॉइंट बनाना पड़ा। अब नया रूट मैप तैयार किया गया है। माल यहीं से सीधा अलग-अलग राज्यों में भेज दिया जाता है। नेपाल का मार्केट पूरी तरह से डेड हो गया है। अब सारा काम गुवाहाटी से ही हो रहा है। डिमांड जो भी आती है, यहीं से पूरी की जाती है। भारत में पाकिस्तान की सबसे बड़ी फेक करेंसी चेस्ट तक पहुंचने के बाद एजेंट राजू रंगा ने भास्कर रिपोर्टर से ये खुलासा किया। राजू रंगा रातुल के लिए काम करता है। देश में जाली नोटों की सप्लाई करने वाले राजू ने डील में कई राज खोले। पूरी पड़ताल में एजेंट ने कई बार रिपोर्टर की रेकी की। गैंग के सदस्य रिपोर्टर को एजेंसी का आदमी समझकर हत्या की प्लानिंग में थे। हालांकि डेढ़ लाख कैश देने पर उनको भरोसा हुआ और डील के लिए तैयार हुए। ऑपरेशन फेक करेंसी के पहले पार्ट में हमने बताया कि एजेंट का टारगेट यूपी चुनाव में 80 करोड़ नकली नोट खपाने का है। अब भास्कर इन्वेस्टिगेशन पार्ट-2 में पढ़िए और देखिए आम आदमी की जेब में जाली नोट पहुंचाने वाला पाकिस्तान का नया ट्रेंड… गुवाहाटी में जाली नोटों की करेंसी चेस्ट तक पहुंचने से पहले एजेंट्स ने रिपोर्टर की कई बार स्क्रीनिंग कराई। एजेंट राजू रंगा भी स्कैनिंग करने वालों में शामिल था। रातुल से फोन पर 20 दिनों से हो रही बातचीत के बाद जब रिपोर्टर गुवाहाटी पहुंचे, तो कई एजेंट्स ने मुलाकात कर यह जानने की कोशिश की कहीं हम खुफिया एजेंसी से तो नहीं जुड़े हैं। विश्वास होने के बाद कामख्या के रहने वाले एजेंट राजू रंगा ने कई खुलासे किए। राजू देश के अलग-अलग राज्यों में फेक करेंसी की सप्लाई की जिम्मेदारी संभालता है। रिपोर्टर- हम आपके साथ काम करना चाहते हैं? राजू- पहले किसके साथ काम कर रहे थे? रिपोर्टर- नेपाल से नेटवर्क चलता था। राजू- हमारा काम भी पहले नेपाल से था, वहां सरकार बदली तो चेस्ट चेंज हो गया। रिपोर्टर- ऐसा क्यों हो गया? भारत में चेस्ट क्यों लाना पड़ा? राजू- नेपाल में बालेन की सख्ती से माल क्रॉस नहीं हो पा रहा। अब वहां का मार्केट डेड हो गया है। रिपोर्टर- हम लोग भी सख्ती की मार झेल रहे हैं, मदद कीजिए ताकि धंधा चलता रहे। रिपोर्टर- यहां से माल ले जाने में बड़ा खतरा है? राजू- गुवाहाटी में कोई आपको हाथ भी नहीं लगा सकता, यहीं हमारा चेस्ट ऑफिस है। रिपोर्टर- जाली नोट उतनी दूर से लेकर आने में खतरा है। ट्रेन में पुलिस बैग में रखा सामान भी स्कैन कर लेती है। राजू- आप टेंशन मत लो, हमलोग आपको ब्लैक कोटेड नोट देंगे, ये पैसा कहीं स्कैनर में नहीं पकड़ा जाएगा। रिपोर्टर- ब्लैक कोटेड नोट? पहली बार सुन रहा हूं। राजू- हम जाली नोट पर केमिकल लगा कर उसको काला कर देते है, उसी पैसा को चलाने के समय दूसरे केमिकल से साफ कर देते हैं। पाकिस्तानी नोट पर म्यांमार का केमिकल डील के दौरान राजू ने पाकिस्तानी नोट का खुलासा किया। राजू ने बताया कि अब नोट का पूरा मॉड्यूल ही बदल गया है। नोट पाकिस्तान में छपता है, जिसे बांग्लादेश के रास्ते गुवाहाटी लाया जाता है। ब्लैक कोट को साफ करने के लिए केमिकल म्यांमार से मंगाया जाता है। गुवाहाटी से ब्लैक कोटेड और साफ दोनों तरह के नोटों की सप्लाई डिमांड के हिसाब से की जाती है। रिपोर्टर- कहां से आते हैं, ये नोट और केमिकल? राजू- नोट पाकिस्तान से होकर बांग्लादेश के रास्ते भारत में आता है, केमिकल म्यंमार से आता है। रिपोर्टर- हम कैसे साफ करेंगे? राजू- आप जितना पैसा लेंगे उसी हिसाब से हम आपको केमिकल दे देंगे। रिपोर्टर- सफाई में टाइम लगेगा, कौन करेगा इतने नोटों की सफाई? राजू- सेकेंड्स का काम है, समझा देंगे आप खुद साफ करके मार्केट में सप्लाई कीजिएगा। रिपोर्टर- आप साफ करके दे सकते हैं क्या‌? राजू- क्यों नहीं, लेकिन रास्ते में स्कैन में पकड़े जाने का डर होगा। रिपोर्टर- ये जो पूरा नया मॉडल आप बता रहे हैं, समझ में नहीं आ रहा? राजू- आपको एक वीडियो दे रहे हैं, एक बार देखो फिर सब समझ जाओगे। ब्लैक कोटिंग में छिपा जाली नोट रिपोर्टर से कई राउंड की बातचीत के बाद एजेंट राजू को पूरी तरह से भरोसा हो गया। उसने ब्लैक कोटेड पेपर को केमिकल लगाकर साफ करने का वीडियो भेजा। वीडियो में 4 लोग दिखाई दे रहे थे, जिसमे दो महिलाएं भी हैं। वो ब्लैक कोटेड पेपर के नोटों के साइज के बंडल को एक-एक कर के केमिकल से साफ कर रहे हैं। केमिकल से साफ होते ही पेपर हूबहू भारतीय 500 के असली नोट की तरह दिख रहे थे। पहली बार जाली नोट का यह नया ट्रेंड सामाने आया था। रिपोर्टर को ब्लैक कोटेड जाली नोट का वीडियो भेजने के बाद राजू रंगा ने पूरी सप्लाई का रूट मैप समझाया। गुवाहाटी में जाली नोटों की डील में खतरा था। लेकिन चेस्ट से नोटों की डिलिवरी के पूरे नेक्सेस को एक्सपोज करने के लिए हमने राजू रंगा की हर बात को फॉलो किया। एजेंट बोला- गेम किया तो मारे जाओगे राजू ने अगली डील के लिए रात 8 बजे का समय दिया। रिपोर्टर को एक क्लब में बुलाया। ठीक 8 बजे रिपोर्टर क्लब में पहुंचा और राजू का इंतजार करने लगा। राजू को कॉल लगाया तो उसने कहा कि अंदर एंट्री करने के बाद वेट कीजिए। 500 रुपए एंट्री फीस देकर रिपोर्टर क्लब के अंदर दाखिल हुआ। क्लब के अंदर का पूरा नजारा ही संदिग्ध लग रहा था। अंदर ज्यादा लाइटें नहीं जल रही थीं, लेकिन अलग-अलग रंग के दर्जनों लेजर लाइट्स से कुछ हल्का-हल्का दिख रहा था। क्लब के अंदर मौजूद कुछ लड़के और कई लड़कियां पूरी तरह से मस्ती में दिख रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे कई आंखें रिपोर्टर को एक साथ घूर रहीं थीं। अब तक यह साफ हो गया था कि रिपोर्टर की रेकी हो रही है। ऐसा लग रहा था कि कोई ये जानना चाह रहा है कि वह अकेला है या उसके साथ कोई और है। इस बीच एक लड़की रिपोर्टर के पास आई और बोली यहां कोई चालाकी मत करना। अगर थोड़ा भी गेम किया तो मार दिए जाओगे। यह सुनकर रिपोर्टर की हालत खराब हो गई, लेकिन वह राजू का इंतजार करता रहा। लगभग 3 घंटे इंतजार के बाद भी राजू नहीं आया। रिपोर्टर क्लब से वापस होटल लौट गया। रात लगभग 11 बजे राजू ने कॉल कर बताया कि क्लब के बाहर पुलिस की गाड़ी खड़ी थी, इसलिए उसके आदमी वहां नहीं पहुंच पाए। आप इंतजार कीजिए, आगे का प्लान बताएंगे फिर आप नई लोकेशन पर आइएगा। कई राउंड रेकी, मारने की प्लानिंग थी गुवाहाटी पहुंचने के बाद से ही गैंग के लोग बार-बार कॉल करके रिपोर्टर से उसकी लोकेशन मांग रहे थे। रिपोर्टर को एजेंट ने पहले कमाख्या रेलवे स्टेशन, फिर क्लब बुलाया गया, लेकिन खुद नहीं पहुंचा। हालांकि 3-4 लोग आसपास निगरानी करते नजर आए। उसके बाद रिपोर्टर को एजेंट ने ISBT के बालाजी मंदिर बुलाया। उस दिन भी गैंग के 3 से 4 सदस्य वहां आसपास मौजूद थे, लेकिन जाली नोट का सैंपल लेकर राजीव सामने आया। उसी समय गैंग के सदस्यों को रिपोर्टर पर किसी एजेंसी का आदमी होने का शक हो गया। गैंग के सदस्य रिपोर्टर को करेंसी चेस्ट तक ले जाने के नाम पर हत्या करने का प्लान बनाने लगे। रिपोर्टर ने पहली खेप लेने के लिए 1.5 लाख रुपए का बंडल बना कर राजीव को भेजा, तब वो लोग डील के लिए तैयार हुए। चेस्ट में ले जाने के बहाने रिपोर्टर को मारने की साजिश रची गई। पहले राजीव ने अपने ऑफिस आने के लिए लोकेशन भेजा। वहां पहुंचते ही राजीव ने ऑफिस चलने का बहाना करके रिपोर्टर को अपनी स्कूटी से पहाड़ की साइड ले जाने लगा। पीछे-पीछे गैंग का एक दूसरा सदस्य भी चल रहा था। रिपोर्टर को अनहोनी का शक हुआ। जिसके बाद उसने जबरदस्ती रास्ते में ही राजीव को रोक दिया और वहीं पैसे के लेन-देन की बात पर अड़ गया। गैंग के सदस्य कुछ और प्लान बना पाते रिपोर्टर वहां से अपनी जान बचा कर निकल गया। 2 दिन इंतजार करने के बाद रिपोर्टर ने जाली नोटों के सरगना रातुल को कॉल किया। रिपोर्टर ने रातुल को पूरी कहानी बताई तो उसने कहा कि, मुझे सब कुछ पता है। हर काम समय से होता है। आपको हर तरह से देखा जा रहा है कि आप हमारे साथ कैसे काम कर सकते हैं। अपने धंधे में बड़ी सावधानी रखनी होती है, आपसे या हमारे लोगों से एक गलती हो जाए तो पूरा गेम बिगड़ जाएगा। रातुल ने इंतजार करने बात की। रातुल का फोन कट होने के 3 घंटे बाद राजीव का कॉल आया। उसने रिपोर्टर को ISBT के पास बालाजी मंदिर बुलाया। एजेंट राजीव एक लिफाफा लेकर आया था। राजीव (लिफाफा देते हुए)- बॉस ने आपको ये दिखाने के लिए भेजा है। रिपोर्टर- इसमें कितने नोट हैं। राजीव- ये मुझे नहीं पता, जैसे मुझे बॉस ने दिया है, मैंने आपको दे दिया। रिपोर्टर- यहीं देख लेता हूं। राजीव- यहां पब्लिक है, थोड़ा साइड होकर देख लीजिए। पैकेट में दो तरह के सैंपल रिपोर्टर ने सड़क से थोड़ा साइड हटकर जब लिफाफा खोला तो 1 ब्लैक नोट कोटेड और 2 साफ किए हुए 500 के जाली नोट थे। ब्लैक कोटेड पूरी तरह से नोट के साइज का काले कागज की तरह था और उस पर कोई प्रिंटिंग नहीं दिख रही थी। जबकि साफ किया हुआ नोट 500 के असली नोट की तरह दिख रहा था। एजेंट रिपोर्टर को ISBT से थोड़ा दूर पहाड़ वाले रास्ते में ले गया और वहां ब्लैक कोटेड नोट को जैसे ही केमिकल में डाला, वो अपने असली रूप में आ गया। राजीव ने रिपोर्टर को पूरी प्रोसस कर के दिखाई कैसे केमिकल की मदद से नोट को साफ किया जाता है। उसने बताया कि देश के अलग-अलग राज्यों में ब्लैक कोटेड नोट पहुंचने के बाद उसे साफ कर मार्केट में लाया जाता है। राजीव- देख लिया है ना बिल्कुल ओरिजिनल जैसा, आपको साफ करके देता हूं चला कर देख लो। रिपोर्टर- नहीं ऐसा नहीं करना है, बड़ी डील हो जाए फिर खर्च किया जाएगा। राजीव- आप रूम पर जाओ मेरे बॉस आपको कॉल करेंगे, फिर बात कर लेना कितने का माल ले जाना है। रिपोर्टर- ये पैसा कहां से आता है? राजीव- ये सब पैसा पाकिस्तान से आता है, नेपाल सरकार की सख्ती के बाद बांग्लादेश के रास्ते भारत आ रहा है। रिपोर्टर- फ्लाइट में पैसा चेक नहीं होता क्या? राजीव- सब सेटिंग से आता है, ब्लैक कोटेड होने की वजह से स्कैनर पैसों को नहीं पकड़ा पाता है। रिपोर्टर- जाली नोट के साथ पुलिस ने पकड़ लिया तब क्या होगा? राजीव- मेरे बॉस के रहते आपको कोई हाथ भी नहीं लगा सकता, आपको माल के साथ मेरे लोग स्टेशन छोड़ कर आएंगे। एक असली 500 का नोट दो, 3 जाली नोट लो राजीव से रिपोर्टर ने ये जानना चाहा कि देश में जाली नोटों का पूरा सिंडिकेट कैसे चल रहा है? इसे कैसे ऑपरेट किया जाता है? माल अलग-अलग राज्यों में खपाने के लिए कौन-कौन से लोग काम कर रहे हैं? राजीव ने बताया कि तीन गुना फायदे में पूरा धंधा चल रहा है। अगर आप 500 का एक असली नोट देंगे तो आपको 500 के 3 नकली नोट दिए जाएंगे। राजीव ने बताया कि पूरे देश में उनके लोग हैं। जहां भी माल जाता है, वहां लोगों को लगा दिया जाता है। सैंपल दिखाने के दौरान रिपोर्टर को राजीव से फेक करेंसी के चेस्ट से जुड़े कई क्लू मिले। 20 मिनट की बातचीत के दौरान राजीव ने अपने मोबाइल से ही आपने बॉस रातुल को कॉल लगा दिया। रिपोर्टर ने बड़ी डील की बात की थी, इसलिए राजीव भी फाइनल करने के लिए काफी परेशान था। राजीव के फोन पर हुई बातचीत में रातुल ने रिपोर्टर से एक करोड़ फेक करेंसी के लिए 30 लाख की डिमांड की। डील फाइनल होने के बाद जाली नोट होटल में देने की बात कही। रिपोर्टर ने करेंसी चेस्ट से ही नोटों की डिलीवरी लेने की बात कही। रिपोर्टर की जाल में फंसा एजेंट, करेंसी चेस्ट से लाया पैसा करेंसी चेस्ट का पैसा देखने के लिए रिपोर्टर ने झांसे में लेने की कोशिश की और एजेंट इसमें फंस गया। बड़ी डील थी, इसलिए एजेंट ने रिपोर्टर की बात मान ली। लोखरा फ्लाई ओवर के नीचे पहुंचने के बाद राजीव फाइनल डील के मोड में था। रिपोर्टर ने राजीव से नोटों के बारे मे पूछा तो उसने बताया कि पैसे स्कूटी में हैं। यहां बहुत पब्लिक है, मेरे साथ ऑफिस साइड में चलिए। राजीव रिपोर्टर को स्कूटी से दोबारा चेस्ट की तरफ ले गया। पीछे से एक स्कूटी आ रही थी, रिपोर्टर को थोड़ा शक हुआ। रिपोर्टर का अंदेशा सही निकला राजीव की गैंग का एक दूसरा आदमी दूसरी स्कूटी से आ रहा था। थोड़ी दूर चलने के बाद एक सुनसान जगह पर राजीव ने स्कूटी रोक दी। यहां राजीव नोटों के लेन-देन की बात करने लगा। राजीव ने एक और एजेंट आसिफ मजूमदार को कॉल करके वापस उसी जगह बुलाया। आसिफ की स्कूटी में आगे काले रंग के पॉलिथीन में जाली नोटों के 5 लाख का बंडल टंगे थे। आसिफ ने अपने पास रखे जाली नोटों के बंडल रिपोर्टर को दिखाते हुए राजीव को दे दिए और कहा कि यहां ये पैसा बाहर निकालना खतरनाक होगा, कहीं साइड मे देख लो। रिपोर्टर ने राजीव से कहा कि पैकेट खोलकर नोट दिखाओ। राजीव ने कहा कि उस पैकेट को हम लोग बहुत अच्छे से सील करते हैं हाथ से नहीं खुलेगा। फ्लाई ओवर के नीचे चलो वहीं कटर से काटकर दिखा देंगे। आप देखकर ही ले जाइएगा। फिर रिपोर्टर राजीव के साथ फ्लाई ओवर के नीचे पहुंचा। स्कूटी रुकते ही रिपोर्टर को राजीव ने रोड क्रॉस करने का इशारा किया। रोड की दूसरी तरफ जहां रिपोर्टर निकला वहां सामने कुछ पुलिस वाले खड़े थे। पीछे से रिपोर्टर को देख रहे राजीव को लगा कि रिपोर्टर ने ही पुलिस को बुलाया है। वो इसी बीच वहां से जाली नोटों का बंडल लेकर फरार हो गया। रिपोर्टर फोन करता रहा, लेकिन राजीव ने फोन नहीं उठाया। कुछ ही देर में रातुल रिपोर्टर को फोन कर जान से मारने की धमकी देने लगा। रातुल ने कहा कि पुलिस का एजेंट है, गुवाहाटी से वापस नहीं जाएगा, तुम्हारे घर वालों को डेड बॉडी भी नहीं मिलेगी। तुमने धोखा दिया है, धंधे में धोखा देने वालों की मौत होती है। रिपोर्टर ने मोबाइल बंद किया और गुवाहाटी से 30 किमी दूर नारंगी में सुरक्षित जगह पहुंचा। जाली नोट का पूरा रूट मैप- एक तरह के कार्टन में नोटों के बंडल रिपोर्टर से बातचीत के दौरान रातुल ने पूरा रूट मैप समझाया। उसने चाइना और पाकिस्तान के पेपर और म्यांमार के केमिकल आने के रूट के साथ भारत में जाली नोट खपाने की पूरी मोडस अपरेंडी बताई। रिपोर्टर- ये जाली नोट कहां छापते हैं? रातुल- ये बेस्ट क्वालिटी के जाली नोट चाइना और पाकिस्तान में छपते हैं। रिपोर्टर- लोग बताते है कि पाकिस्तान वाला नोट ज्यादा अच्छा होता है। रातुल- चाइना वाला माल पाकिस्तान वाले से अच्छा है। चाइना की टेक्नॉलॉजी अच्छी है। रिपोर्टर- नोट गुवाहाटी चेस्ट तक कैसे पहुंचते हैं? रातुल- पहले नोट चाइना से पाकिस्तान आते हैं, पाकिस्तान से बांग्लादेश फिर बांग्लादेश बॉर्डर क्रॉस कराकर गुवाहाटी आता है। रिपोर्टर- चेस्ट में क्या किया जाता है इन नोटों के साथ? रातुल- गुवाहाटी चेस्ट में पैसे रखे जाते हैं, यहीं से केमिकल से साफ कराकर डिमांड के हिसाब से भेज दिया जाता है। रिपोर्टर- गुवाहाटी चेस्ट से नोटों को कैसे दूसरे राज्यों मे भेजा जाता है? रातुल- हम लोगों के पास ये पैसा बड़े-बड़े कार्टन में पैक होकर आता है। डिमांड के हिसाब से हम कार्टन से पैसा निकालकर उसको छोटे-छोटे कार्टन में पैक करते हैं। रिपोर्टर- नोट गाड़ी, ट्रेन या बस कैसे भेजे जाते हैं? रातुल- असम के बाहर पैसा ट्रेन से भेजा जाता है, डिमांड के हिसाब से इन नोटों को कभी बिस्किट कभी नमकीन या सर्फ के छोटे-छोटे कार्टन में रखकर उसको पैक किया जाता है। अगर 20 कार्टन है तो सभी एक जैसे होते हैं। रिपोर्टर- पुलिस से बचने के लिए क्या करते हैं? रातुल- माल एक जैसे किसी कार्टन में पैक किया जाए। हम लोग फर्जी बिल बना लेते हैं, ताकि अगर रास्ते में कोई पुलिस का चक्कर लगे तो फर्जी बिल दिखाकर निकला जा सके। रिपोर्टर- पैसा सुरक्षित रहता है ना रातुल- जहां-जहां हमारी बड़ी खेप जाती है, वहां के लिए एक मैनेजर लगा देते हैं। मैनेजर की ही देख-रेख में ये पैसा चेस्ट से निकालकर संबंधित स्टेट में भेज दिया जाता है। जाली नोट लेकर वही मैनेजर जाता है और सीधे संबंधित व्यक्ति को देता है। मैनेजर किसी से बातचीत नहीं करते ना ही किसी से घुलते मिलते हैं। मैनेजर का काम बस नोटों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना और जिससे डील होती है उसको दे देना होता है।

Source: Read Full Article

प्रतिक्रिया दें (Leave a Reply)

आपका ईमेल पता सुरक्षित है और प्रकाशित नहीं किया जाएगा। आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *