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बिहार के 6 लाख शिक्षकों की ट्रांसफर-पोस्टिंग क्यों रुकी:12 जिलों के DEO ने अटकाया, जानिए MLC चुनाव का क्या है असर, कब खुलेगा विंडो

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
19 October 2026 5:26 PM 1 मिनट पठन 215 Views
बिहार के 6 लाख शिक्षकों की ट्रांसफर-पोस्टिंग क्यों रुकी:12 जिलों के DEO ने अटकाया, जानिए MLC चुनाव का क्या है असर, कब खुलेगा विंडो

बिहार में शिक्षक ट्रांसफर अब सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रही, बल्कि चुनावी मुद्दा बन गई है। चुनाव आते ही तबादले की उम्मीद जगाई जाती है। शिक्षकों से आवेदन लिए जाते हैं, शिक्षा विभाग प्रक्रिया पूरी करने में जुट जाता है। जब वादे को जमीन पर उतारने की बारी आती है तो किसी न किसी वजह से काम पूरा नहीं होता। एक बार फिर ऐसा हुआ है। MLC चुनाव से पहले करीब 6 लाख शिक्षकों के ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू की गई। शिक्षकों को उम्मीद बंधी कि इस बार उनका इंतजार खत्म होगा। अपने गृह पंचायत और प्रखंड के बगल वाले स्कूल में तैनात होंगे, लेकिन चुनाव की तारीखों की घोषणा होते-होते प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। अब आदर्श आचार संहिता के चलते पूरी प्रक्रिया अटक गई है। चुनावी पाबंदी 31 अक्टूबर तक है। इसके बाद प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की बात कही जा रही है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में जानिए, शिक्षकों के ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी होने में देर क्यों हो रही है? इस बार तबादले किस माध्यम से किए जाएंगे? 7 नवंबर से ई-शिक्षा कोष विंडो फिर शुरू होगी शिक्षा विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दूसरे चरण (सामान्य स्थानांतरण) का विंडो नवंबर महीने के दूसरे सप्ताह के पहले खोला जाना मुमकिन नहीं दिखता। यदि जिला और प्रमंडल तेजी से काम करें तो सामान्य तबादला के लिए आवेदन 7 नवंबर से लिए जा सकेंगे। पहले चरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दूसरे चरण के तबादला की प्रक्रिया शुरू होगी। पहले चरण की प्रक्रिया कितनी पूरी हुई जिला के अंदर बाकी ट्रांसफर- शिक्षा विभाग की मानें तो करीब 26 जिला में इंट्रा डिस्ट्रिक्ट सरप्लस ट्रांसफर पूरी कर ली गई है। शेष 12 जिला शिक्षा पदाधिकारी ने प्रक्रिया अटका रखी है। 26 जिलों के करीब 42,000 सरप्लस शिक्षकों का ट्रांसफर किया गया है। नए स्कूलों में उनकी पोस्टिंग हो गई है। अभी प्रमंडलवार ट्रांसफर का इंतजार जिला के अंदर शिक्षकों का तबादला पूरा होने के बाद प्रमंडल स्तर पर ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। आवंटित जिलों के शिक्षक को स्कूल मिलेगा और उन्हें फाइनल ट्रांसफर लेटर जारी किया जाएगा। नियमावली के मुताबिक, प्रमंडलवार ट्रांसफर के बाद राज्य स्तर के तबादले होंगे। इस चरण में वैसे शिक्षक शामिल होंगे, जिन्होंने एक प्रमंडल से दूसरे प्रमंडल में जाने की इच्छा जताते हुए आवेदन किया है। इन दोनों चरणों के पूरा होने के बाद पूरे बिहार में स्कूल के अनुसार रिक्तियां जारी की जाएंगी। इसके बाद सामान्य ट्रांसफर के लिए आवेदन लिए जाएंगे। म्यूचुअल टीचर इन वेटिंग म्यूचुअल ट्रांसफर प्रक्रिया भी अटकी हुई है। इसके लिए आवेदन करने वाले शिक्षक इंतजार कर रहे हैं। बिहार शिक्षक स्थानांतरण नियमावली-2026 के पहले चरण में म्यूचुअल ट्रांसफर के लिए ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर 4,259 आवेदन किए गए हैं। ट्रांसफर के लिए मिले 71 हजार आवेदन सरप्लस शिक्षकों की कुल संख्या 1 लाख 60 हजार के पास है। शिक्षा विभाग के ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर 71,151 सरप्लस शिक्षकों ने ऐच्छिक ट्रांसफर के लिए ऑनलाइन आवेदन डाल रखे हैं। प्रक्रिया पूरी नहीं, दो शेड्यूल फेल हुए बिहार शिक्षक स्थानांतरण नियमावली-2026 के तहत अब तक मुख्य रूप से तीन बार आधिकारिक शेड्यूल जारी किए जा चुके हैं। पहला शेड्यूल (जुलाई 2026): नियमावली अधिसूचित होने के बाद शिक्षा विभाग ने तीन चरणों में प्रक्रिया पूरी करने के लिए प्रारंभिक टाइम टेबल जारी की थी। इसमें 29 जुलाई से आवेदन और सितंबर में सामान्य तबादले की बात थी। दूसरा शेड्यूल-विभाग ने दूसरा शेड्यूल जारी करते हुए कहा था कि बिहार के आधा दर्जन जिलों में बाढ़ आने की वजह से पहले चरण की ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इसके चलते 4 से 10 अक्टूबर 2026 तक सामान्य ट्रांसफर के लिए आवेदन का नया कार्यक्रम तय किया गया पहले भी चुनाव से पहले शुरू हुई तबादले की प्रक्रिया, नहीं हुई पूरी बिहार में सरकारी शिक्षकों को उनके अपने पंचायत के बगल वाले स्कूलों में पोस्टिंग करने के लिए पहली बार व्यापक रूप से व्यवस्थित और ऑनलाइन ट्रांसफर नीति 7 अक्टूबर 2024 को लाई गई थी। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले शिक्षा विभाग ने तबादले की प्रक्रिया शुरू की। उस वक्त मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने प्रधान सचिव डॉ. एस सिद्धार्थ को इसकी जिम्मेदारी दी। बिहार के सरकारी स्कूलों में ऐच्छिक तबादले के लिए शिक्षा विभाग ने दिशा-निर्देश जारी किए। प्रारंभिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों से 1 से 15 दिसंबर तक ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन लिए गए। केवल गंभीर बीमारी (जैसे कैंसर), दिव्यांगता, विधवा, परित्यक्ता या गंभीर रूप से पीड़ित शिक्षक ही ई-शिक्षा कोष पर आवेदन कर सकते थे। सामान्य शिक्षकों के आवेदन रद्द कर दिए गए थे। यह प्रक्रिया लंबी चली। बिहार विधानसभा 2025 की घोषणा तक शिक्षकों का ट्रांसफर हुआ। चुनाव तिथि की घोषणा के साथ ही प्रक्रिया रुक गई। जनवरी 2025 में वैसे टीचर को स्कूल आवंटन मिला, जिन्हें चुनाव की घोषणा से पहले जिला दिए गए थे। करीब 83 हजार टीचर को उनके पसंद के स्कूल में भेजा गया। इसके पहले शिक्षक 300-400 किलोमीटर दूर तक पोस्टेड थे। जैसे- किशनगंज के टीचर को बेतिया के स्कूल में तैनात किया गया था। अब बात मौजूदा ट्रांसफर की, सरप्लस शिक्षक होते क्या हैं? सरप्लस का मतलब यह नहीं है कि शिक्षक की जरूरत ही नहीं है। किसी स्कूल में निर्धारित मानक और छात्र-छात्राओं की संख्या और विषयवार जरूरत से ज्यादा शिक्षक होना, उस स्कूल के लिए सरप्लस माना जाता है। इसके उलट, कुछ स्कूलों में छात्रों की संख्या के अनुपात में शिक्षक कम हैं। ऐसे में विभाग का उद्देश्य अतिरिक्त शिक्षकों को जरूरत वाले स्कूलों में भेजकर रेशनलाइजेशन करना है ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। इसे ऐसे समझा जा सकता है, किसी स्कूल में निर्धारित मानक के अनुसार 5 शिक्षक चाहिए, लेकिन वहां 8 शिक्षक तैनात हैं। दूसरी ओर, किसी स्कूल में 6 शिक्षकों की जरूरत है, लेकिन वहां केवल 3 शिक्षक हैं। ऐसी स्थिति में अतिरिक्त शिक्षकों का समायोजन दूसरे स्कूल में किया जा रहा है।

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