हरदोई जनपद में पॉक्सो कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी सुभाष को 10 वर्ष के कठिन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना राशि अदा न करने की स्थिति में दोषी को तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। यह कार्रवाई राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कनविक्शन’ अभियान के तहत गुणवत्तापूर्ण विवेचना और प्रभावी पैरवी का परिणाम है। पुलिस ने इस फैसले से संबंधित जानकारी सोमवार की शाम 6:18 पर दी। घटना 18 मार्च 2018 की है, जब पीड़िता अपने घर से चली गई थी। इस संबंध में पीड़िता के पिता ने बेहटा गोकुल थाने में तहरीर दी थी। उन्होंने सुभाष, उसकी बहन सरस्वती और अवधेश पर उनकी पुत्री को बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप लगाया था, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित और गुणवत्तापूर्ण विवेचना की और अदालत में पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत किए। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अनुराग श्रीवास्तव ने प्रभावी पैरवी की। विचारण और सुनवाई के दौरान अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का बारीकी से अवलोकन किया। न्यायालय ने पाया कि पीड़िता और अभियुक्त सुभाष के बीच प्रेम संबंध थे और दोनों ने जम्मू जाकर शादी कर ली थी। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असफल रहा कि अभियुक्त ने पीड़िता को बहला-फुसलाकर या उसकी कानूनी संरक्षकता से जबरन भगाया था। इसी आधार पर न्यायालय ने सह-आरोपियों अवधेश और सरस्वती को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। हालांकि, मेडिकल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया जाना पूरी तरह सिद्ध पाया गया। इसके आधार पर विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) मनमोहन सिंह ने मुख्य अभियुक्त सुभाष (पुत्र विश्राम, निवासी इटोलिया, थाना बेहटा गोकुल) को दोषी करार देते हुए 10 साल की कठोर सजा और जुर्माने से दंडित किया। इस सफल पैरवी और न्याय सुनिश्चित करने में अभियोजन अधिकारी अनुराग श्रीवास्तव, विवेचक उप-निरीक्षक रामभवन और पैरोकार अर्पित जैन की भूमिका सराहनीय रही।
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