नारी का वास्तविक सौंदर्यबोध उसके संस्कारों, मर्यादाओं, करुणा, धैर्य और प्रेम में निहित है। जब तक नारी अपने नारित्व के साथ जुड़ी रहेगी, समाज संतुलित और सशक्त बना रहेगा। नारी की पुनः स्थापना ही मानवता की पुनर्स्थापना है।
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नारी का वास्तविक सौंदर्यबोध उसके संस्कारों, मर्यादाओं, करुणा, धैर्य और प्रेम में निहित है। जब तक नारी अपने नारित्व के साथ जुड़ी रहेगी, समाज संतुलित और सशक्त बना रहेगा। नारी की पुनः स्थापना ही मानवता की पुनर्स्थापना है।
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