Monday, 19 October 2026
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ब्रिटिशकाल से शुरू हुई परेड रामलीला मंचन 150 साल पूरे:कानपुर में 100 साल पुराने चांदी के धनुष, गदा चला रहें श्री राम-लक्ष्मण और हनुमान

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
19 October 2026 6:26 PM 1 मिनट पठन 77 Views
ब्रिटिशकाल से शुरू हुई परेड रामलीला मंचन 150 साल पूरे:कानपुर में 100 साल पुराने चांदी के धनुष, गदा चला रहें श्री राम-लक्ष्मण और हनुमान

कानपुर में परेड ग्राउंड की ऐतिहासिक रामलीला के मंचन को 150 साल पूरे हो गए हैं। साल 1877 में अंग्रेजों के दौर में शुरू हुई इस रामलीला को पहली बार आयोजित करने की अनुमति मिली थी। इसके बाद परेड रामलीला की ख्याति लगातार बढ़ती गई। आज भी यहां रामलीला के मंचन में 100 साल से ज्यादा पुराने चांदी के शस्त्र, सिंहासन, मुकुट और रथयात्रा में इस्तेमाल होने वाले घोड़ों का प्रयोग किया जाता है। इस रामलीला की खास बात यह भी है कि मथुरा का चतुर्वेदी परिवार लगातार 6 पीढ़ियों से रामलीला के पात्रों के रूप में भगवान श्री राम की भक्ति भावना से जुड़कर भक्तिभाव से दे रहा है। वहीं, व्यास महेश दत्त चतुर्वेदी को रामलीला के मंच पर चौपाइयों और दोहों का सस्वर गायन करते हुए 50 साल से ज्यादा का समय हो चुका है। 100 साल से ज्यादा पुराने हैं चांदी के शस्त्र और सिंहासन परेड रामलीला में भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान जी के मंचन में इस्तेमाल होने वाले शस्त्रों की अपनी ऐतिहासिक पहचान है। भगवान राम के धनुष-बाण से लेकर हनुमान जी की गदा तक शस्त्र चांदी से बने हैं। इनका इस्तेमाल आज भी रामलीला के मंचन में किया जाता है। भगवान राम और लक्ष्मण के मुकुट भी करीब 100 साल पुराने बताए जाते हैं। चांदी और सोने से बने इन मुकुटों को आज भी संभालकर रखा गया है। मंच पर इस्तेमाल होने वाले सिंहासन और रथयात्रा के सिंहासन भी चांदी के हैं। इसके अलावा रथयात्रा में भगवान राम और लक्ष्मण के बैठने के लिए इस्तेमाल होने वाले चांदी के घोड़े भी इस रामलीला की ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा हैं। कमल किशोर बोले- 50 साल से देख रहे शस्त्रों की परंपरा परेड रामलीला सोसाइटी (रजि) के प्रधानमंत्री पद पर कमल किशोर अग्रवाल पिछले 12 साल से लगातार इस पद की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वह करीब 50 साल से सोसाइटी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि जब से वह रामलीला से जुड़े हैं, तब से भगवान राम, लक्ष्मण, हनुमान और रावण के मंचन में इस्तेमाल होने वाले शस्त्रों को देखते आ रहे हैं। कमल किशोर अग्रवाल ने बताया कि ये शस्त्र उनके सोसाइटी से जुड़ने से पहले से ही मौजूद हैं। इस लिहाज से इनमें से कई शस्त्र 100 साल से भी ज्यादा पुराने हैं। हनुमान जी की गदा भी इसी ऐतिहासिक धरोहर में शामिल है। उन्होंने कहा कि मंचन में इस्तेमाल होने वाले शस्त्र इस तरह तैयार किए गए हैं कि उनसे किसी को नुकसान न पहुंचे। पुराने शस्त्रों की समय-समय पर मरम्मत और देखरेख की जाती है, ताकि उनका इस्तेमाल सुरक्षित तरीके से किया जा सके। पुरानी धरोहर को अगली पीढ़ियों के लिए सहेज रहे कमल किशोर अग्रवाल ने बताया कि चांदी के घोड़ों से लेकर मंच के सिंहासन और रथयात्रा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं तक का विशेष ध्यान रखा जाता है। सभी ऐतिहासिक वस्तुओं का रखरखाव बेहतर तरीके से किया जाता है, ताकि वे लंबे समय तक सुरक्षित रहें।

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