यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर बिहार की राजनीति में हंगामा बरपा हुआ है। RJD नीतीश कुमार को खुला ऑफर दे रही है। वहीं, JDU ड्रॉफ्ट पढ़कर फैसला लेने की बात कह रही। UCC आखिर क्या है, इसे लागू करने पर क्या बदल जाएगा?, नीतीश कुमार क्या बिहार में लागू करने देंगे, समझेंगे; बूझे की नाही में…। सवाल-1ः यूनिफॉर्म सिविल कोड क्या है? जवाबः भारत में मोटे तौर पर 2 तरह के कानून हैं- क्रिमिनल लॉ और सिविल लॉ। 1. क्रिमिनल लॉः चोरी, लूट, मार-पीट, हत्या जैसे आपराधिक मामले यह किसी व्यक्ति बनाम स्टेट होता है। यानी अगर रमेश ने महेश को चाकू मार दिया तो महेश की तरफ से स्टेट केस लड़ेगा। क्योंकि वो हमला सिर्फ महेश पर नहीं हुआ, बल्कि समाज के एक नागरिक पर हुआ है जिसकी जिम्मेदारी स्टेट की है। क्रिमिनल कानून आमतौर पर वही होगा, जो स्टेट चाहेगा। क्रिमिनल मामलों में सभी धर्मों या समुदायों के लिए एक ही तरह की कोर्ट, प्रोसेस और सजा का प्रावधान होता है। यानी कत्ल हिंदू ने किया है या मुसलमान ने या इस अपराध में जान गंवाने वाला हिंदू था या मुसलमान, इस बात से FIR, सुनवाई और सजा में कोई अंतर नहीं होता। 2. सिविल लॉः शादी, प्रॉपर्टी, तलाक, मानहानि जैसे मामले सिविल लॉ दो व्यक्तियों, संस्था या समूहों के बीच के विवाद पर लागू होता है। इसमें स्टेट यानी सरकार का ज्यादा दखल नहीं होता। मसलन दो लोगों के बीच प्रॉपर्टी का विवाद हो, किसी ने आपकी मानहानि की हो या पति-पत्नी के बीच कोई मसला हो। मान लीजिए रमेश ने कोई जमीन खरीदी। कुछ दिनों बाद महेश भी उस जमीन पर दावा करने लगा कि ये मैंने भी खरीदी है। सिविल अदालत ये तय करेंगी कि ये जमीन असल में रमेश की है या महेश की। सिविल कानून में सजा दिलवाने की बजाय सेटलमेंट या मुआवजे पर जोर दिया जाता है। सिविल लॉ का ही एक हिस्सा हैं पर्सनल लॉ अलग-अलग धर्मों में शादी, परिवार और संपत्ति से जुड़े मामलों में रीति-रिवाज, संस्कृति और परंपराओं का खास महत्व है। इन्हीं के आधार पर धर्म या समुदाय विशेष के लिए अलग-अलग कानून भी हैं। यही वजह है कि इस तरह के कानूनों को हम पसर्नल लॉ भी कहते हैं। उदाहरण के लिए, मुस्लिमों में शादी और संपत्ति का बंटवारा मुस्लिम पर्सनल लॉ के जरिए होता है। वहीं, हिंदुओं की शादी हिंदू मैरिज एक्ट के जरिए होती है। इसी तरह ईसाइयों के लिए क्राइस्ट एक्ट है। पारसियों के लिए पारसी एक्ट है। जैसे-पर्सनल लॉ के तहत मुस्लिम पुरुष 4 शादी कर सकते हैं, लेकिन हिंदू मैरिज एक्ट के तहत पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करना अपराध है। इन्हीं अलग-अलग धर्मों के लिए बने पर्सनल लॉ को खत्म करके सभी के लिए एक जैसा कानून बनाने की मांग की जा रही है। यानी भारत में रहने वाले हर नागरिक के लिए निजी मामलों में भी एक समान कानून, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो। इसको ही यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) कहते हैं। सवाल-2ः बिहार में इतनी चर्चा क्यों है? जवाबः दरअसल, 13 सितंबर को मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, ‘2029 के पहले सभी भाजपा और NDA शासित 21 राज्यों में UCC लागू करने का प्रयास किया जाएगा।’ शाह के बयान के बाद बिहार में बयानबाजी तेज हो गई। सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए… सवाल-3: बिहार में UCC लागू हुआ तो क्या-क्या बदलेगा? जवाबः बिहार में अभी सिर्फ नेताओं की बयानबाजी हो रही है। इसे लागू करने को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई है। फिलहाल देश में सिर्फ एकमात्र राज्य उत्तराखंड में ही UCC लागू है। उम्मीद है कि बिहार में उत्तराखंड के UCC से मिलता-जुलता कानून लागू होगा। अगर वैसा ही लागू हुआ तो जानिए समझिए बिहार में क्या-क्या बदलेगा… लिव-इन रिलेशनशिप पर सख्ती लिव-इन में रहने वाले या रहने की योजना बना रहे जोड़ों को रहने के 1 महीने के भीतर रजिस्ट्रार के पास अपना ‘स्टेटमेंट ऑफ लिव-इन रिलेशनशिप’ रजिस्टर्ड कराना अनिवार्य है। यह नियम राज्य के लोगों के साथ-साथ राज्य में रह रहे बाहरी लोगों पर भी समान रूप से लागू होता है। लिव-इन में इनको नहीं रहने की अनुमति सवाल-4ः …तो क्या बिहार में नीतीश कुमार इसे लागू नहीं करने देंगे? जवाबः ऐसा बिल्कुल नहीं है। इस मामले पर नीतीश कुमार के रुख नरम पड़ते दिख रहे हैं। इसे ऐसे समझिए… 1. 2017 में 16 पॉइंट में जताया विरोध जनवरी 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 21वें विधि आयोग के अध्यक्ष जस्टिस बीएस चौहान को 3 पन्नों का एक लेटर भेजा था। इसमें उन्होंने 16 पॉइंट में अपना विरोध जताया था। उन्होंने लिखा था, ‘देश में सदियों से अलग-अलग धर्मों के लोग अलग-अलग रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन कर रहे हैं, फिर भी सिर्फ हिंदू धर्म के पर्सनल लॉ को ही कानून की किताब में शामिल किया गया है। समान नागरिक संहिता हमेशा से एक विवादास्पद मुद्दा रहा है।’ 2. फरवरी 2023: ‘जब आएगा तब देखेंगे’ फरवरी 2023 में जब 22वें विधि आयोग ने UCC पर फिर से जनता और धार्मिक संगठनों से सुझाव मांगे और देश में UCC को लेकर बहस तेज हुई, तो पटना में पत्रकारों ने नीतीश कुमार से इस पर सवाल पूछा। नीतीश कुमार ने UCC से जुड़े सवालों को टालते हुए कहा था, ‘अभी इन सब बातों पर कुछ नहीं कहना है। जब कुछ सामने आएगा, तब न देखेंगे। हम लोग तो अपने काम में लगे हुए हैं।’ 3. जून 2023ः ‘गर्मी बहुत है, बाद में बात होगी’ 18 जून 2023 को पत्रकारों ने नीतीश कुमार से UCC पर सवाल किया। उन्होंने सवाल को टालते हुए कहा, ‘बहुत गर्मी है… सब बात होगा बाद में, अभी बहुत गर्मी है।’ पत्रकार उनसे 22वें विधि आयोग की नई चिट्ठी पर जवाब जानना चाह रहे थे। 4. ड्रॉफ्ट में चिंताजनक प्रावधान होंगे तो शाह से बात होगी UCC की ताजा चर्चा के बीच 15 सितंबर 2026 को नीतीश कुमार के करीबी और डिप्टी CM विजय चौधरी ने पार्टी का स्टैंड साफ किया। उन्होंने कहा, ‘UCC में किस प्रकार के प्रावधान होंगे, यह अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है। कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा इस मामले पर अमित शाह से मुलाकात कर चर्चा करेंगे। प्रावधानों के अध्ययन के बाद पार्टी इस पर विमर्श करेगी। यदि किसी प्रकार की चिंता या परेशानी सामने आती है तो उसे दूर करने के लिए शाह के सामने बात रखी जाएगी।’ सवाल-5ः आखिर JDU का रुख UCC पर नरम क्यों पड़ रहा? जवाबः इसका सबसे बड़ा कारण नीतीश कुमार की मुस्लिम समाज में घटती लोकप्रियता है। इसे नीचे के ग्राफिक से समझिए… पॉलिटिकल एनालिस्ट केके लाल कहते हैं, ‘नीतीश कुमार और उनकी पार्टी के रणनीतिकार जान चुके हैं कि मुस्लिम समाज अब हमको वोट नहीं करता है। यही कारण है कि UCC पर उनके रुख में धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है।’ केके लाल कहते हैं, ‘अभी जो थोड़ा बहुत विरोध हो रहा है, वह सब नीतीश कुमार की सेक्युलर इमेज का बचाने के लिए है। ज्यादा संभव है कि जब UCC का बिल विधानसभा या लोकसभा में आएगा तो JDU वॉक आउट कर जाएगी। जैसा उसने तीन तलाक के समय किया था।’
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