Sunday, 04 October 2026
होम DBN Samachar 308 पहियों वाला महाबली ट्रक चंदौली में क्यों रुका? बेल्जियम से आई मशीन को लखीमपुर पहुंचने में लगेंगे 2-3 हफ्ते
DBN Samachar

308 पहियों वाला महाबली ट्रक चंदौली में क्यों रुका? बेल्जियम से आई मशीन को लखीमपुर पहुंचने में लगेंगे 2-3 हफ्ते

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
28 September 2026 12:14 PM 1 मिनट पठन 9224 Views
308 पहियों वाला महाबली ट्रक चंदौली में क्यों रुका? बेल्जियम से आई मशीन को लखीमपुर पहुंचने में लगेंगे 2-3 हफ्ते

चंदौली: उत्तर प्रदेश की सड़कों पर इन दिनों एक ऐसा ट्रक लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है। 308 पहियों वाला यह विशालकाय ट्रक बेल्जियम से लाई गई भारी-भरकम मशीन को लेकर लखीमपुर खीरी जा रहा है। चंदौली पहुंचने के बाद यह ट्रक पिछले तीन दिनों से पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के पास नेशनल हाईवे-19 के रिंग रोड पर रुका हुआ है। आगे का रास्ता संकरा होने और ऊंचाई-चौड़ाई से जुड़ी बाधाओं के कारण इसे आगे ले जाने के लिए जेसीबी से नया रास्ता तैयार किया जा रहा है।

यह पूरा सफर इसलिए भी खास है क्योंकि मशीन पहले समुद्री रास्ते से बेल्जियम से ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंची और फिर विशेष 308 पहियों वाले ट्रेलर पर लादकर सड़क मार्ग से झारखंड और बिहार होते हुए यूपी लाई गई है। इसका अंतिम गंतव्य लखीमपुर के कुंभी में बन रहा बायो-पॉलीमर प्लांट बताया गया है।

बेल्जियम से समुद्र के रास्ते भारत पहुंची मशीन

रिपोर्ट के मुताबिक, मशीन को बेल्जियम से अप्रैल में समुद्री मार्ग से रवाना किया गया था। करीब एक महीने के सफर के बाद यह ओडिशा के पारादीप पोर्ट पहुंची। वहां आवश्यक कागजी प्रक्रिया और क्लीयरेंस में एक महीने से अधिक समय लगा।

इसके बाद मशीन को एक विशेष मल्टी-एक्सल ट्रेलर पर लादा गया और सड़क मार्ग से लखीमपुर के लिए रवाना किया गया। इस दौरान ट्रक झारखंड और बिहार से होकर उत्तर प्रदेश की सीमा तक पहुंचा।

308 पहियों वाले ट्रक की जरूरत क्यों पड़ी?

मशीन का वजन और आकार सामान्य ट्रांसपोर्ट वाहनों की क्षमता से काफी अधिक है। इसलिए इसे ले जाने के लिए विशेष हाइड्रोलिक मॉड्यूलर ट्रेलर का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें कुल 308 पहिए हैं।

इतने बड़े मल्टी-एक्सल सिस्टम का उद्देश्य भारी वजन को कई पहियों और एक्सल पर बांटना तथा वाहन को नियंत्रित तरीके से आगे बढ़ाना है। रिपोर्टों के अनुसार, यह ट्रक सामान्य रफ्तार से नहीं चल रहा है और भारी वजन के कारण इसकी यात्रा काफी धीमी है।

चंदौली में तीन दिन से क्यों खड़ा है ट्रक?

यूपी में प्रवेश करने के बाद सबसे बड़ी चुनौती रास्ते की चौड़ाई और ऊंचाई से जुड़ी सामने आ रही है। चंदौली में रिंग रोड के पास आगे का रास्ता बड़े ट्रेलर के लिए पर्याप्त नहीं था।

इसी वजह से लॉजिस्टिक टीम संबंधित विभागों की अनुमति के बाद जेसीबी की मदद से वैकल्पिक रास्ता तैयार कर रही है। रास्ते में जहां ऊंचाई की समस्या है, वहां बिजली के तार, होर्डिंग और दूसरे अवरोध हटाने या ऊपर करने की व्यवस्था की जा रही है।

कहीं क्रेन से उठाया गया फुट ओवरब्रिज

इतने बड़े वाहन को रास्ता देने के लिए कई जगह असाधारण इंतजाम करने पड़े हैं। चंदौली में पहले भी फुट ओवरब्रिज को क्रेन की मदद से ऊपर उठाकर ट्रेलर को निकालने की तैयारी की गई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, ओडिशा से यूपी तक के रास्ते में दो दर्जन से अधिक स्थानों पर अलग-अलग तरह की बाधाएं सामने आईं। कहीं सड़क का हिस्सा तैयार करना पड़ा, तो कहीं पोल, तार, होर्डिंग या पुल जैसे अवरोधों को हटाने या ऊपर करने की व्यवस्था करनी पड़ी।

ट्रक को देखने के लिए उमड़ रही भीड़

308 पहियों वाला यह ट्रक जहां से गुजर रहा है, वहां लोगों की भीड़ जमा हो रही है। चंदौली में भी स्थानीय लोगों के साथ आसपास के इलाकों से लोग इसे देखने पहुंचे।

सोशल मीडिया पर इसके वीडियो और तस्वीरें वायरल होने के बाद लोगों की दिलचस्पी और बढ़ गई है। कई लोग ट्रक और उस पर लदी विशाल मशीन के साथ तस्वीरें और वीडियो बनाते नजर आए।

पुलिस और प्रशासन की भी नजर

इतने बड़े और भारी वाहन को सड़क से निकालना सिर्फ लॉजिस्टिक कंपनी की जिम्मेदारी नहीं है। रास्ते में पुलिस, ट्रैफिक विभाग, प्रशासन और संबंधित सड़क एजेंसियों की टीमों को भी समन्वय करना पड़ रहा है।

ट्रक के आगे पायलट वाहन और विशेषज्ञों की टीम भी चल रही है। जहां सड़क संकरी मिलती है, वहां रास्ते को ट्रेलर के आकार के मुताबिक तैयार करने की कोशिश की जाती है।

कब तक लखीमपुर पहुंचेगा?

Aaj Tak की 28 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, चंदौली में रुके इस महाबली ट्रक को आगे बढ़ाने के लिए रास्ता तैयार किया जा रहा है। लॉजिस्टिक टीम के अनुसार, सभी बाधाओं को पार करते हुए इसे अगले दो से तीन सप्ताह में लखीमपुर पहुंचने की उम्मीद है।

यानी अभी इस विशाल मशीन को अपने अंतिम गंतव्य तक पहुंचने में कई चरण बाकी हैं। रास्ते की स्थिति, मौसम और आवश्यक क्लीयरेंस के आधार पर यात्रा की गति प्रभावित हो सकती है।

लखीमपुर में बायो-पॉलीमर प्लांट के लिए इस्तेमाल होगी मशीन

Aaj Tak की रिपोर्ट के अनुसार, बेल्जियम से लाई जा रही मशीन को लखीमपुर के कुंभी में बन रहे बायो-पॉलीमर प्लांट में इस्तेमाल किया जाना है। इसी वजह से इसे समुद्री मार्ग से भारत लाने के बाद सड़क के रास्ते इतनी लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा कराई जा रही है।

प्रतिक्रिया दें (Leave a Reply)

आपका ईमेल पता सुरक्षित है और प्रकाशित नहीं किया जाएगा। आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *