Friday, 02 October 2026
होम DBN Samachar अखिलेश रायबरेली गए तो हम सैफई-इटावा जाएंगे, अजय राय के बयान से सपा-कांग्रेस में फिर बढ़ी तनातनी
DBN Samachar

अखिलेश रायबरेली गए तो हम सैफई-इटावा जाएंगे, अजय राय के बयान से सपा-कांग्रेस में फिर बढ़ी तनातनी

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
25 September 2026 12:05 PM 1 मिनट पठन 10775 Views
अखिलेश रायबरेली गए तो हम सैफई-इटावा जाएंगे, अजय राय के बयान से सपा-कांग्रेस में फिर बढ़ी तनातनी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी फिर तेज होती दिख रही है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 24 सितंबर को रायबरेली से अपनी PDA रथ यात्रा की शुरुआत की। इसके बाद यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि अगर अखिलेश यादव रायबरेली और अमेठी जा सकते हैं तो कांग्रेस के नेता भी कन्नौज, इटावा और सैफई जा सकते हैं।

अजय राय ने कहा कि चुनाव के समय कोई भी नेता किसी भी क्षेत्र में जा सकता है और कांग्रेस भी अपने संगठन को मजबूत करने के लिए प्रदेश में सक्रिय रहेगी। उनके बयान के बाद दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे और राजनीतिक प्रभाव को लेकर चल रही चर्चा एक बार फिर सामने आ गई है।

रायबरेली से अखिलेश यादव ने शुरू की PDA यात्रा

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को रायबरेली से PDA रथ यात्रा की शुरुआत की। यात्रा के दौरान वह पार्टी विधायक राहुल लोधी के घर पहुंचे और स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं तथा समर्थकों से मुलाकात की।

रायबरेली लोकसभा क्षेत्र से राहुल गांधी सांसद हैं। ऐसे में सपा अध्यक्ष द्वारा अपनी यात्रा की शुरुआत यहीं से किए जाने को लेकर राजनीतिक चर्चा हुई है। हालांकि, सपा की ओर से यात्रा को सामाजिक और संगठनात्मक संपर्क अभियान के तौर पर भी प्रस्तुत किया गया है।

अजय राय बोले- ‘हम भी कन्नौज, इटावा और सैफई जा सकते हैं’

अजय राय ने अखिलेश यादव के रायबरेली दौरे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनाव के समय कोई भी व्यक्ति कहीं भी जा सकता है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव रायबरेली और अमेठी जा सकते हैं, तो कांग्रेस के नेता भी कन्नौज, इटावा और सैफई जा सकते हैं।

उन्होंने कांग्रेस के संगठनात्मक अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी जनता के बीच काम कर रही है और अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी गतिविधियां जारी रखेगी।

सपा-कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग भी बड़ा मुद्दा

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन की संभावनाएं बनी हुई हैं, लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों के नेताओं की अलग-अलग टिप्पणियां सामने आती रही हैं।

हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अखिलेश यादव ने रायबरेली यात्रा के दौरान सीट बंटवारे को लेकर कहा कि गठबंधन में सीटों का फैसला जीतने की क्षमता यानी ‘winnability’ को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

इससे पहले भी दोनों दलों के नेताओं के बीच सीट शेयरिंग को लेकर सार्वजनिक बयानबाजी हो चुकी है।

रायबरेली क्यों बना राजनीतिक चर्चा का केंद्र?

रायबरेली कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र रहा है और वर्तमान में यहां से राहुल गांधी लोकसभा सांसद हैं। ऐसे में अखिलेश यादव की PDA यात्रा की शुरुआत रायबरेली से होने को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, सपा की यात्रा में स्थानीय मुद्दों के साथ पार्टी के PDA सामाजिक समीकरण को मजबूत करने पर भी जोर है।

वहीं कांग्रेस की ओर से अजय राय ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी भी प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय रहेगी।

अजय राय ने राहुल गांधी का भी किया जिक्र

अजय राय ने अपने बयान में राहुल गांधी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश राहुल गांधी की ओर देख रहा है और राहुल गांधी आम लोगों से जुड़े मुद्दों को उठा रहे हैं।

उन्होंने राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग की भूमिका और चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों का भी समर्थन किया। ये अजय राय के राजनीतिक बयान हैं और उन्हें उनके पक्ष के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

अखिलेश यादव ने BJP पर साधा निशाना

रायबरेली में PDA यात्रा के दौरान अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी, निवेश और किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।

अखिलेश ने प्रशासनिक मशीनरी के कथित इस्तेमाल को लेकर भी आरोप लगाए। ये उनके राजनीतिक दावे हैं, जिन पर संबंधित पक्षों की अपनी प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं।

2027 चुनाव से पहले गठबंधन की तस्वीर पर नजर

सपा और कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। अब 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे और अभियान की रणनीति को लेकर चर्चाएं जारी हैं।

फिलहाल दोनों दलों के बीच सीटों का कोई अंतिम सार्वजनिक फार्मूला सामने नहीं आया है। ऐसे में नेताओं के बयान आने वाले दिनों में गठबंधन की बातचीत और राजनीतिक रणनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माने जा सकते हैं।

प्रतिक्रिया दें (Leave a Reply)

आपका ईमेल पता सुरक्षित है और प्रकाशित नहीं किया जाएगा। आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *