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चंद्रशेखर आजाद का अखिलेश यादव पर तंज, बोले- उनका PDA बदलता रहता है, हमारा नहीं

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
28 September 2026 11:43 AM 1 मिनट पठन 6071 Views
चंद्रशेखर आजाद का अखिलेश यादव पर तंज, बोले- उनका PDA बदलता रहता है, हमारा नहीं

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव जहां अपने PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण को चुनावी रणनीति के तौर पर आगे बढ़ा रहे हैं, वहीं आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इसी PDA को लेकर सपा पर निशाना साधा है। उन्होंने अखिलेश यादव की रणनीति पर तंज कसते हुए कहा कि सपा का PDA समय के साथ बदलता रहता है, जबकि उनके मुताबिक उनका PDA नहीं बदल रहा है।

चंद्रशेखर आजाद की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब यूपी में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर अलग-अलग दल अपने सामाजिक समीकरण और संगठनात्मक तैयारियों को मजबूत करने में जुटे हैं। सपा की ओर से PDA को चुनावी राजनीति में प्रमुख सामाजिक समीकरण के तौर पर पेश किया जा रहा है।

‘उनका PDA बदलता रहता है’

चंद्रशेखर आजाद ने सपा के PDA को लेकर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि सपा की ओर से PDA की व्याख्या अलग-अलग तरीके से की जाती रही है। उनके मुताबिक, कभी इसमें पिछड़े वर्ग की बात होती है तो कभी अन्य सामाजिक समूहों को इसमें शामिल किया जाता है।

उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि “उनका तो PDA बदलता रहता है, कभी कुछ तो कभी कुछ।” चंद्रशेखर ने यह भी कहा कि उनके PDA का अर्थ पीड़ित वर्ग से है और उनके मुताबिक यह परिभाषा नहीं बदल रही है।

चंद्रशेखर ने अपने PDA की अलग व्याख्या बताई

चंद्रशेखर आजाद ने अपने बयान में PDA को ‘पीड़ित’ से जोड़ते हुए कहा कि उनके लिए इसका अर्थ उन लोगों से है जो अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने सपा पर तंज करते हुए कहा कि उसके PDA की परिभाषा को लेकर अलग-अलग बातें सामने आती रही हैं। हालांकि, यह चंद्रशेखर आजाद का राजनीतिक बयान है और सपा की ओर से इस टिप्पणी पर इस रिपोर्ट में कोई तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं है।

अखिलेश यादव लगातार PDA को बना रहे चुनावी मुद्दा

अखिलेश यादव यूपी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के तहत PDA सामाजिक समीकरण पर लगातार जोर दे रहे हैं। हाल ही में उन्होंने रायबरेली से PDA रथ यात्रा की शुरुआत की थी और अपने अभियान में PDA को प्रमुखता दी।

सपा की चुनावी रणनीति में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर चंद्रशेखर आजाद भी दलित और वंचित वर्ग से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा रहे हैं।

मायावती भी PDA को लेकर अखिलेश पर निशाना साध चुकी हैं

चंद्रशेखर आजाद से पहले बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी अखिलेश यादव के PDA अभियान पर सवाल उठाए थे।

मायावती ने सोशल मीडिया पोस्ट में सपा के PDA रथ के रंग को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने दावा किया था कि रथ सपा के लाल रंग की तुलना में भगवा रंग में अधिक नजर आ रहा था। इसके साथ ही उन्होंने सपा की PDA की परिभाषा को लेकर भी सवाल उठाए थे। ये मायावती के राजनीतिक आरोप और दावे थे।

यूपी की दलित राजनीति में चंद्रशेखर की सक्रियता

चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है। इससे पहले जून 2026 में NDTV को दिए एक इंटरव्यू में चंद्रशेखर ने कहा था कि उनकी पार्टी यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। उन्होंने यह भी कहा था कि बीजेपी को रोकने के लिए साथ आने वाले दलों के लिए गठबंधन के दरवाजे खुले हैं।

इससे संकेत मिलता है कि आजाद समाज पार्टी आने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी राजनीतिक भूमिका को लेकर सक्रिय तैयारी कर रही है। हालांकि, 2027 चुनाव में किसी दल के साथ अंतिम गठबंधन का फैसला अलग राजनीतिक बातचीत और परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

सपा-कांग्रेस गठबंधन के बीच भी बढ़ी राजनीतिक हलचल

यूपी चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग को लेकर भी बातचीत का मुद्दा चर्चा में है। दोनों दलों ने साथ चुनाव लड़ने की बात कही है, लेकिन सीटों के बंटवारे का अंतिम फॉर्मूला अभी स्पष्ट नहीं हुआ है।

इसी बीच चंद्रशेखर आजाद की PDA पर टिप्पणी से यूपी में विपक्षी राजनीति के भीतर सामाजिक समीकरणों को लेकर चल रही बहस और तेज होती दिखाई दे रही है।

क्या है PDA की सियासी अहमियत?

समाजवादी पार्टी की राजनीति में PDA का इस्तेमाल पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समूहों को एक राजनीतिक समीकरण के रूप में जोड़ने के लिए किया जाता है। अखिलेश यादव के चुनावी अभियानों में यह शब्द लगातार प्रमुखता से सामने आया है।

दूसरी तरफ, चंद्रशेखर आजाद अपने बयान में PDA को ‘पीड़ित’ से जोड़कर सपा के सामाजिक समीकरण की अलग व्याख्या पेश कर रहे हैं। इससे यह साफ है कि 2027 से पहले सामाजिक प्रतिनिधित्व और दलित राजनीति को लेकर अलग-अलग विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक बहस तेज हो रही है।

2027 से पहले बढ़ेगी बयानबाजी?

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सपा अपने PDA अभियान को आगे बढ़ा रही है, कांग्रेस के साथ सीट शेयरिंग पर चर्चा चल रही है और चंद्रशेखर आजाद की पार्टी भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश में है।

ऐसे में आने वाले महीनों में PDA, दलित प्रतिनिधित्व, गठबंधन और सीट बंटवारे जैसे मुद्दों पर नेताओं के बीच बयानबाजी और तेज हो सकती है। फिलहाल चंद्रशेखर आजाद का बयान सपा के PDA अभियान पर उनके राजनीतिक रुख को सामने रखता है, जबकि चुनावी गठबंधन और सीटों को लेकर अंतिम तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है।

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