लखनऊ: उत्तर प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के एक फैसले ने चुनावी गणित को चर्चा में ला दिया है। सपा ने उद्योग जगत से जुड़े धनराज परिमल नथवानी को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। उनके साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव ने भी नामांकन दाखिल किया है।
धनराज नथवानी की उम्मीदवारी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उनका राजनीतिक जुड़ाव अब तक समाजवादी पार्टी की पारंपरिक राजनीति से अलग रहा है। वह रिलायंस इंडस्ट्रीज में ग्रुप प्रेसिडेंट हैं और गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में भी काम कर चुके हैं।
16 अक्टूबर को होगा राज्यसभा चुनाव
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान 16 अक्टूबर 2026 को होगा। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है, नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर को होगी और नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर है। मतगणना भी 16 अक्टूबर को ही होगी।
इन 10 सीटों में से कई मौजूदा सांसदों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। इनमें भाजपा, सपा और बसपा से जुड़े मौजूदा सदस्य शामिल हैं। इसके अलावा दिनेश शर्मा के इस्तीफे के बाद उत्तर प्रदेश की एक सीट पहले से रिक्त है।
सपा ने राम गोपाल यादव के साथ धनराज नथवानी को उतारा
सपा ने वरिष्ठ नेता और पार्टी महासचिव राम गोपाल यादव के साथ धनराज नथवानी को उम्मीदवार बनाया है। दोनों ने अखिलेश यादव की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया।
धनराज नथवानी ने नामांकन के बाद अखिलेश यादव का भरोसा जताने के लिए आभार व्यक्त किया और इसे अपने सार्वजनिक जीवन के नए चरण की शुरुआत बताया।
कौन हैं धनराज परिमल नथवानी?
धनराज नथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े वरिष्ठ कॉरपोरेट अधिकारी हैं। रिपोर्टों के अनुसार वह रिलायंस इंडस्ट्रीज में ग्रुप प्रेसिडेंट हैं और रिलायंस न्यू एनर्जी सहित समूह की कुछ कंपनियों में निदेशक की भूमिका भी निभाते हैं।
कॉरपोरेट क्षेत्र के अलावा उनका जुड़ाव खेल प्रशासन से भी रहा है। वह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं और इससे पहले भी संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
उनका परिवार भी राज्यसभा की राजनीति से जुड़ा रहा है। उनके पिता परिमल नथवानी राज्यसभा सदस्य हैं और रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े रहे हैं।
सपा के इस फैसले से क्यों बढ़ी चर्चा?
धनराज नथवानी की उम्मीदवारी ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव का गणित मुख्य रूप से संख्या बल और अतिरिक्त वोटों पर टिका है।
रिपोर्टों के अनुसार, एक राज्यसभा सीट के लिए करीब 37 प्रथम वरीयता वोट की जरूरत है। मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर एनडीए और सपा खेमे के बीच सीटों के अलावा अतिरिक्त वोटों का प्रबंधन भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
सपा के सामने अपने दो उम्मीदवारों के बाद अतिरिक्त सीट के लिए समर्थन जुटाने का सवाल है। पार्टी की नजर छोटे दलों और एनडीए के सहयोगी दलों के कुछ विधायकों पर होने की खबरें हैं।
क्रॉस वोटिंग पर भी रहेंगी निगाहें
उत्तर प्रदेश के पिछले राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग ने नतीजों को प्रभावित किया था। इसी वजह से इस बार भी राजनीतिक दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और अतिरिक्त समर्थन जुटाने पर जोर दे रहे हैं।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, सपा की नजर एनडीए में शामिल कुछ ऐसे दलों के विधायकों पर भी है जिनके नेताओं या विधायकों का अतीत में सपा से राजनीतिक जुड़ाव रहा है। हालांकि, चुनाव में कौन किसे वोट देगा, यह मतदान से पहले निश्चित रूप से कहना संभव नहीं है।
भाजपा के सामने भी उम्मीदवारों और संख्या का सवाल
सपा के धनराज नथवानी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद भाजपा की ओर से उम्मीदवार चयन और सहयोगी दलों को साथ रखने की रणनीति पर भी चर्चा तेज हो गई है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मौजूदा संख्या बल में भाजपा-एनडीए कई सीटों पर मजबूत स्थिति में है, लेकिन अतिरिक्त सीट के लिए वोटों का गणित अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। छोटे दलों के विधायक और संभावित क्रॉस वोटिंग इस गणित को प्रभावित कर सकते हैं।
सपा तीसरा उम्मीदवार उतारेगी?
धनराज नथवानी और राम गोपाल यादव के नाम घोषित होने के बाद भी सपा की रणनीति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। अमर उजाला समेत कई रिपोर्टों में पार्टी द्वारा तीसरा उम्मीदवार उतारने की संभावना का उल्लेख किया गया है, हालांकि 1 अक्टूबर तक उस उम्मीदवार का नाम सामने नहीं आया था।
यदि तीसरा उम्मीदवार मैदान में आता है, तो अतिरिक्त वोटों की जरूरत और समर्थन जुटाने का गणित चुनाव को और जटिल बना सकता है। हालांकि अंतिम तस्वीर नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
आगे क्या होगा?
अब सभी की निगाहें 6 अक्टूबर की नामांकन प्रक्रिया पूरी होने और 9 अक्टूबर को नाम वापसी की अंतिम तारीख पर हैं। इसके बाद यह साफ होगा कि कुल कितने उम्मीदवार मैदान में हैं और कितनी सीटों के लिए वास्तविक मुकाबला बनता है।
16 अक्टूबर को मतदान और मतगणना के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-कौन से उम्मीदवार राज्यसभा पहुंचते हैं। फिलहाल धनराज नथवानी की उम्मीदवारी ने उत्तर प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में संख्या बल, सहयोगी दलों के समर्थन और संभावित क्रॉस वोटिंग को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।