लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 16 अक्टूबर को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाला गठबंधन अपने संख्या बल के आधार पर कई सीटों पर मजबूत स्थिति में है। अब भाजपा की रणनीति में एक अतिरिक्त सीट के लिए समर्थन जुटाने की चर्चा भी सामने आई है।
अमर उजाला की 1 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा आठ उम्मीदवारों के बाद नौवीं सीट के लिए भी उम्मीदवार उतारने पर विचार कर रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इसके लिए पार्टी को विपक्षी खेमे, विशेष रूप से समाजवादी पार्टी के कुछ विधायकों से अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी।
आठ सीटों के बाद नौवीं सीट की कोशिश
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है। मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर भाजपा और उसके सहयोगी दल आठ सीटों के लिए आवश्यक संख्या जुटाने की स्थिति में बताए जा रहे हैं।
अमर उजाला की रिपोर्ट में कहा गया है कि भाजपा के पास सहयोगी दलों और उसके साथ खड़े माने जा रहे कुछ निर्दलीय विधायकों को मिलाकर करीब 299 वोटों का समर्थन है। रिपोर्ट के अनुसार आठ सीटों के लिए 288 वोटों की जरूरत मानने पर करीब 11 वोट अतिरिक्त बचते हैं। नौवीं सीट के लिए 36 वोट का कोटा मानते हुए भाजपा को 25 और वोट जुटाने होंगे।
हालांकि, अन्य ताजा रिपोर्टों में 397 सदस्यीय प्रभावी विधानसभा के आधार पर एक उम्मीदवार के लिए 37 प्रथम-वरीयता वोट का आंकड़ा दिया गया है। इसलिए 25 अतिरिक्त वोट वाला आंकड़ा अमर उजाला की रिपोर्ट में इस्तेमाल किए गए 36-वोट के गणित के संदर्भ में समझना चाहिए।
सपा के बागी विधायकों पर निगाह
भाजपा की नौवीं सीट की संभावित रणनीति में समाजवादी पार्टी के उन विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिन्होंने पिछले राज्यसभा चुनाव में पार्टी लाइन से अलग मतदान किया था।
अमर उजाला ने अपनी रिपोर्ट में मनोज कुमार पांडेय, पूजा पाल, राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह, विनोद चतुर्वेदी, आशुतोष मौर्य और महाराजी देवी समेत कई नामों का उल्लेख किया है। इनमें से कुछ विधायक अब सपा के साथ नहीं हैं या उनके राजनीतिक समीकरण बदल चुके हैं।
पिछले राज्यसभा चुनाव में सपा के कुछ विधायकों की क्रॉस वोटिंग ने चुनावी समीकरण को प्रभावित किया था। इसी पृष्ठभूमि में इस बार भी दोनों प्रमुख खेमे अपने विधायकों और संभावित समर्थकों पर नजर रख रहे हैं।
भाजपा के संख्या बल में सहयोगी दल भी अहम
भाजपा के साथ अपना दल (एस), निषाद पार्टी, राष्ट्रीय लोक दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी जैसे सहयोगी दल हैं। इसके अलावा कुछ ऐसे विधायक भी हैं जिन्हें राजनीतिक रूप से भाजपा समर्थक माना जाता है।
हाल की रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा के पास सहयोगियों समेत आठ सीटों के लिए आवश्यक संख्या जुटाने की स्थिति है, लेकिन अतिरिक्त सीट के लिए उसे और समर्थन की जरूरत पड़ेगी।
सपा के सामने भी संख्या बढ़ाने की चुनौती
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के पास दो उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या होने की बात कही जा रही है। 1 अक्टूबर की रिपोर्टिंग के बीच पार्टी ने राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाया है।
सपा की मौजूदा ताकत के बाद तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना अलग चुनौती होगी। ऐसे में यदि भाजपा नौवीं सीट के लिए उम्मीदवार उतारती है, तो दोनों खेमों के लिए अतिरिक्त विधायकों का समर्थन महत्वपूर्ण हो जाएगा।
क्रॉस वोटिंग से बदल सकता है गणित
राज्यसभा चुनाव प्रत्यक्ष जनता के वोट से नहीं बल्कि निर्वाचित विधायकों के मतदान से होता है। इसमें आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली का इस्तेमाल होता है।
यही वजह है कि विधानसभा में दलों की संख्या के अलावा उम्मीदवारों की संख्या, प्रथम वरीयता वोट और विधायकों के मतदान का तरीका भी परिणाम के लिए महत्वपूर्ण होता है।
पिछले चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग के कारण इस बार भी राजनीतिक दल अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि मतदान से पहले यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि कोई विधायक किस उम्मीदवार को वोट देगा।
16 अक्टूबर को होगा मतदान
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान 16 अक्टूबर 2026 को होगा। चुनाव कार्यक्रम के अनुसार नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकते हैं। मतदान के बाद उसी दिन मतगणना होगी।
इस चुनाव की अंतिम तस्वीर नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ज्यादा स्पष्ट होगी। यदि सीटों की संख्या से अधिक उम्मीदवार मैदान में रहते हैं, तो अतिरिक्त वोट और संभावित क्रॉस वोटिंग चुनावी गणित में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
अब किस बात पर रहेगी नजर?
फिलहाल उत्तर प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में तीन चीजें महत्वपूर्ण हैं—भाजपा के उम्मीदवारों की अंतिम संख्या, सपा और एनडीए के बीच अतिरिक्त समर्थन का गणित और संभावित क्रॉस वोटिंग।
भाजपा नौवीं सीट के लिए उम्मीदवार उतारती है या नहीं, यह नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा। वहीं सपा के लिए अपने दो उम्मीदवारों के अलावा अतिरिक्त समर्थन जुटाने की संभावनाएं भी चुनावी चर्चा का हिस्सा बनी हुई हैं।