लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब संख्या बल और संभावित क्रॉस वोटिंग के कारण चर्चा में है। मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास आठ सीटों के लिए पर्याप्त संख्या जुटाने की स्थिति बताई जा रही है, जबकि समाजवादी पार्टी अपने दो उम्मीदवारों के बाद तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में 10वीं सीट के लिए दोनों खेमों के बीच विधायकों के समर्थन को लेकर संपर्क और दावों का दौर तेज हो गया है।
10वीं सीट के लिए क्यों बन रहा है मुकाबला?
उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव होना है। मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर एक उम्मीदवार को जीत के लिए करीब 36 से 37 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता बताई जा रही है। अलग-अलग गणनाओं में विधानसभा की प्रभावी संख्या, रिक्त सीटों और मतदान नहीं कर पाने वाले विधायक को शामिल करने या नहीं करने के कारण यह आंकड़ा अलग दिखाई दे रहा है। अमर उजाला की गणना के अनुसार अधिकतम 395 वोट पड़ने की स्थिति में एक सीट के लिए 36 वोट आवश्यक होंगे, जबकि अन्य रिपोर्टें 396 की प्रभावी विधानसभा संख्या के आधार पर 37 वोट का आंकड़ा देती हैं।
इसी संख्या के कारण 10वीं सीट पर अतिरिक्त वोट जुटाना दोनों प्रमुख खेमों के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।
सपा के सामने तीसरे उम्मीदवार के लिए अतिरिक्त वोटों की चुनौती
समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए प्रो. राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी की ओर से तीसरे उम्मीदवार को लेकर भी चर्चा रही है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चुनाव में भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने वाले सपा विधायकों को अलग करने के बाद कांग्रेस के दो विधायकों समेत सपा खेमे का प्रभावी संख्या बल करीब 99 बताया गया है। तीन उम्मीदवारों के लिए 108 वोट की जरूरत होने पर करीब 9 अतिरिक्त मतों की आवश्यकता होगी।
दूसरी ओर, टाइम्स ऑफ इंडिया ने सपा की प्रभावी संख्या करीब 94 बताई है और पिछले चुनाव में भाजपा के पक्ष में वोट करने वाले विधायकों के राजनीतिक रुख को इसका कारण बताया है। इसलिए चुनावी गणित को समझते समय अलग-अलग रिपोर्टों में इस्तेमाल की गई संख्या और उनकी गणना-पद्धति को ध्यान में रखना जरूरी है।
भाजपा के पास एनडीए सहयोगियों का समर्थन
भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए में अपना दल (एस), राष्ट्रीय लोक दल, सुभासपा, निषाद पार्टी और जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के विधायक शामिल हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की गणना के अनुसार भाजपा के 255 विधायकों के साथ सहयोगी दलों और कुछ निर्दलीय/असंबद्ध विधायकों को मिलाकर एनडीए के पास 290 से अधिक विधायकों का समर्थन है। आठ उम्मीदवारों को चुनने के लिए करीब 296 वोटों की जरूरत बताई गई है।
यही वजह है कि आठवीं सीट के लिए भी अतिरिक्त समर्थन और वोटों के प्रबंधन पर ध्यान दिया जा रहा है।
क्रॉस वोटिंग पर दोनों खेमों की नजर
राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग का अर्थ है कि कोई विधायक अपनी पार्टी के आधिकारिक रुख से अलग जाकर दूसरे उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करे।
अमर उजाला की रिपोर्ट में सपा सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि एनडीए के कुछ सहयोगी दलों के विधायक सपा के संपर्क में हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ विधायकों के भविष्य के विधानसभा टिकट से जुड़े राजनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए संपर्क की कोशिशें की जा रही हैं। ये दावे संबंधित राजनीतिक सूत्रों के हैं और स्वतंत्र रूप से सभी विधायकों द्वारा पुष्टि किए गए तथ्य के रूप में नहीं देखे जाने चाहिए।
दूसरी ओर, भाजपा की ओर से भी सपा के कुछ विधायकों के संपर्क में होने का दावा सामने आया है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने दावा किया कि कई सपा विधायक भाजपा के संपर्क में हैं। यह भी राजनीतिक पक्ष का दावा है, न कि स्वतंत्र रूप से सत्यापित मतदान-रुख।
पिछले राज्यसभा चुनाव की क्रॉस वोटिंग का असर
फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में क्रॉस वोटिंग हुई थी। उसके बाद सपा के कुछ विधायक पार्टी से निष्कासित हुए और कुछ अन्य विधायकों के राजनीतिक रुख को लेकर भी बदलाव आया।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक मनोज पांडेय, अभय सिंह और राकेश प्रताप सिंह अब असंबद्ध विधायकों के रूप में हैं। वहीं पूजा पाल, राकेश पांडेय, विनोद चतुर्वेदी और आशुतोष मौर्य ने पिछले राज्यसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया था।
इस पुराने घटनाक्रम को मौजूदा चुनावी गणित में इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पार्टियां अपने वास्तविक और प्रभावी संख्या बल का आकलन कर रही हैं।
सपा ने उतारे राम गोपाल यादव और धनराज नथवानी
सपा ने 30 सितंबर को राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी के नामांकन दाखिल किए। धनराज नथवानी उद्योग जगत से जुड़े हैं और रिलायंस इंडस्ट्रीज समूह में पद संभाल चुके हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उनके नामांकन को उत्तर प्रदेश में निवेश और उद्योग से जोड़कर बताया है।
वहीं, तीसरे उम्मीदवार को लेकर उस समय तक सपा ने अपना अंतिम नाम सार्वजनिक नहीं किया था। इससे 10वीं सीट को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और बढ़ गईं।
चुनाव में क्या भूमिका निभा सकती है क्रॉस वोटिंग?
यदि किसी खेमे के पास किसी अतिरिक्त सीट के लिए आवश्यक प्रथम वरीयता वोटों की संख्या पूरी नहीं होती है, तो उसे दूसरे दलों या असंबद्ध विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।
यूपी के मौजूदा समीकरण में यही स्थिति 10वीं सीट के लिए दिखाई दे रही है। इसलिए पार्टियां अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने के साथ-साथ दूसरे खेमे के संभावित समर्थन पर भी नजर रख रही हैं।
हालांकि अभी किसी विधायक के अंतिम मतदान रुख को लेकर केवल राजनीतिक दावों के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। वास्तविक तस्वीर नामांकन प्रक्रिया पूरी होने और मतदान के बाद ही स्पष्ट होगी।
16 अक्टूबर को होना है मतदान
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान 16 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर बताई गई है।
इससे पहले उम्मीदवारों की अंतिम सूची, नामांकन की जांच और संभावित अतिरिक्त उम्मीदवारों की स्थिति स्पष्ट होगी। उसके बाद ही दोनों खेमों के पास मौजूद वास्तविक संख्या बल का आकलन अधिक स्पष्ट तरीके से किया जा सकेगा।