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बेल्जियम से भारत कैसे पहुंची यह विशाल मशीन?

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
13 October 2026 12:27 PM 1 मिनट पठन 166 Views
बेल्जियम से भारत कैसे पहुंची यह विशाल मशीन?

इस भारी-भरकम मशीन की यात्रा बेल्जियम से शुरू हुई। समुद्री मार्ग से इसे ओडिशा के पारादीप बंदरगाह तक लाया गया। इसके बाद क्रेन की मदद से मशीन को विशेष हाइड्रॉलिक मल्टी-एक्सल ट्रेलर पर लादा गया। यह काफिला झारखंड और बिहार से गुजरते हुए उत्तर प्रदेश पहुंचा।

करीब 20 विशेष ट्रॉलियों को जोड़कर तैयार किए गए इस ट्रेलर में शुरुआत में 308 पहिये लगाए गए थे। इतने भारी उपकरण को सड़क पर सुरक्षित तरीके से ले जाने के लिए विशेष तकनीकी व्यवस्था की गई है।

200 टन वजन और 100 फीट लंबाई

इस ट्रेलर पर लदी वैक्यूम वेसल मशीन का वजन लगभग 200 टन बताया गया है। इसकी लंबाई करीब 100 फीट और ऊंचाई 20 फीट से अधिक है। मशीन का विशाल आकार और वजन ही इसके परिवहन को चुनौतीपूर्ण बना रहा है।

आमतौर पर सड़क पर चलने वाले ट्रकों की तुलना में यह ट्रेलर काफी अलग है। इसके पहियों को अलग-अलग दिशाओं में मोड़ा जा सकता है, जिससे संकरे मोड़ों से गुजरने में मदद मिलती है।

रास्ता बनाने के लिए हटाने पड़े बिजली के तार और पेड़

इतने बड़े ट्रेलर को बस्ती की सड़कों से निकालने के लिए प्रशासन और तकनीकी टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। रास्ते में जहां बिजली के तार बाधा बन रहे हैं, वहां उन्हें हटाने की व्यवस्था की जा रही है। कुछ स्थानों पर पेड़ों की छंटाई भी करनी पड़ रही है।

ट्रेलर के साथ क्रेन, जेसीबी, हाइड्रा और तकनीकी विशेषज्ञों समेत कई वाहनों का काफिला चल रहा है। भारी वाहन को सुरक्षित निकालने के लिए यातायात प्रबंधन भी जरूरी हो गया है। कुछ मार्गों पर इसकी आवाजाही से ट्रैफिक प्रभावित होने की खबर है।

बेहद धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है ट्रक

मशीन का वजन और विशाल आकार इतना अधिक है कि ट्रक सामान्य भारी वाहनों की तरह तेज गति से नहीं चल सकता। रिपोर्ट के अनुसार, यह काफिला एक दिन में लगभग 10 से 20 किलोमीटर की दूरी तय कर पा रहा है। रात में इसे रोककर आगे की यात्रा की तैयारी की जाती है।

रास्ते में पुलों, बिजली के तारों, पेड़ों और संकरे मोड़ों जैसी बाधाओं का आकलन करना पड़ता है। इसी वजह से इस ट्रक की यात्रा लंबी और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण बन गई है।

किस काम आएगी 200 टन की मशीन?

इस मशीन को बलरामपुर चीनी मिल्स से जुड़े औद्योगिक संयंत्र तक पहुंचाया जा रहा है। इसका इस्तेमाल एथेनॉल और बायोपॉलीमर यानी बायोप्लास्टिक के उत्पादन से संबंधित प्रक्रिया में किया जाना है।

बायोप्लास्टिक पारंपरिक पेट्रोलियम आधारित प्लास्टिक के विकल्प के रूप में विकसित किया जाता है। इस तरह की औद्योगिक परियोजनाओं से वैकल्पिक सामग्री के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

ट्रक को देखने के लिए उमड़ रही भीड़

बस्ती में इस विशालकाय ट्रेलर के पहुंचने के बाद इसे देखने के लिए सड़कों के किनारे लोगों की भीड़ जुट रही है। कई लोग मोबाइल फोन से इसकी तस्वीरें और वीडियो बना रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी 308 पहियों वाले इस ‘बाहुबली ट्रक’ को लेकर उत्सुकता देखी जा रही है।

हालांकि, प्रशासन के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती इस भारी उपकरण को बिना किसी दुर्घटना के उसके अंतिम गंतव्य तक पहुंचाना है। इसके लिए परिवहन दल और संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाए रखना जरूरी है।

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