जौहर यूनिवर्सिटी पर ED का बड़ा एक्शन, 10 ठिकानों पर 13 घंटे छापेमारी; फंड डायवर्जन की जांच तेज
रामपुर, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED की टीमों ने रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में कुल 10 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई करीब 13 घंटे तक चली। जांच एजेंसी सरकारी ठेकों से हासिल कथित फंड को जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े संस्थानों तक पहुंचाए जाने के आरोपों की पड़ताल कर रही है।
जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े 10 ठिकानों पर ED की छापेमारी
रिपोर्ट के मुताबिक ED ने बुधवार को एक साथ कई स्थानों पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। रामपुर के अलावा उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और दिल्ली में भी तलाशी ली गई।
जांच का उद्देश्य कथित तौर पर सरकारी ठेकों से जुड़े पैसों की पूरी मनी ट्रेल का पता लगाना है। ED यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सरकारी परियोजनाओं से जुड़े ठेकेदारों और अन्य संस्थाओं के जरिए पैसा किस तरह जौहर ट्रस्ट या यूनिवर्सिटी से संबंधित गतिविधियों तक पहुंचा।
13 घंटे तक चली कार्रवाई
Aaj Tak की रिपोर्ट के अनुसार ED की कार्रवाई करीब 13 घंटे तक चली। इस दौरान जांच टीमों ने वित्तीय दस्तावेज, बैंकिंग रिकॉर्ड, लेनदेन से जुड़े कागजात और डिजिटल सामग्री की जांच की।
जांच एजेंसी कथित तौर पर यह समझने की कोशिश कर रही है कि अलग-अलग कंपनियों, ठेकेदारों और ट्रस्ट से जुड़े लोगों के बीच धन का लेनदेन किस प्रकार हुआ।
सरकारी ठेकों के फंड डायवर्जन की जांच
ED की जांच का एक प्रमुख पहलू सरकारी ठेकों से जुड़े फंड का कथित डायवर्जन है। अधिकारियों के अनुसार एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी काम हासिल करने वाले ठेकेदारों से किसी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष माध्यम से जौहर ट्रस्ट या यूनिवर्सिटी से जुड़ी गतिविधियों तक पैसा पहुंचा या नहीं।
इस जांच में ठेकेदारों, उनसे जुड़ी कंपनियों, ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन और चार्टर्ड अकाउंटेंट की भूमिका को भी देखा जा रहा है।
इनकम टैक्स जांच से क्या है कनेक्शन?
Aaj Tak के मुताबिक इनकम टैक्स विभाग पहले जौहर ट्रस्ट का पंजीकरण रद्द कर चुका है और वर्ष 2015 से 2020 के बीच यूनिवर्सिटी के निर्माण पर हुए खर्च का हिसाब मांगा था। इसी वित्तीय जांच के बीच अब ED की कार्रवाई सामने आई है।
यानी जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यूनिवर्सिटी के निर्माण पर हुए खर्च और उसके स्रोत से जुड़ा हुआ है।
यूनिवर्सिटी निर्माण के खर्च पर भी सवाल
Aaj Tak की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि यूनिवर्सिटी के निर्माण में सरकारी विभागों की ओर से करीब 110 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इसके अलावा करीब 150 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च से जुड़े सबूत मिलने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। इन दावों की जांच एजेंसियों द्वारा पड़ताल की जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार ट्रस्ट ने 59 इमारतों के निर्माण पर करीब 45 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया था, जबकि जांच में खर्च का आकलन इससे काफी अधिक बताए जाने की बात सामने आई है।
आजम खान पर भी जांच की आंच
मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से जुड़े हैं। ED की मौजूदा जांच में ट्रस्ट, यूनिवर्सिटी, ठेकेदारों और उनसे जुड़े वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को खंगाला जा रहा है।
Aaj Tak की रिपोर्ट में यह भी आरोप सामने आया है कि समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान सांसद और विधायक निधि से करीब 4.5 करोड़ रुपये यूनिवर्सिटी के निर्माण में लगाए गए थे। यह भी जांच के दायरे में बताया गया है।
ध्यान रहे कि ये जांच एजेंसियों के आरोप/जांच के बिंदु हैं; इन्हें अंतिम रूप से सिद्ध अपराध के तौर पर नहीं लिखा जाना चाहिए।
CA के घर और दफ्तर से मिले दस्तावेजों की भी जांच
ED की कार्रवाई में जौहर ट्रस्ट से जुड़े एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के घर और कार्यालय से कथित तौर पर दस्तावेजी और डिजिटल सबूत मिलने की बात सामने आई है।
जांच एजेंसी इन दस्तावेजों के जरिए कथित फंड ट्रांसफर और विभिन्न संस्थाओं के बीच हुए लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।
ED किस बात का पता लगाना चाहती है?
पूरी जांच में ED मुख्य रूप से यह पता लगाने की कोशिश कर रही है:
- सरकारी ठेकों से पैसा किन कंपनियों और ठेकेदारों तक पहुंचा।
- इन पैसों का आगे किन खातों में ट्रांसफर हुआ।
- क्या किसी माध्यम से पैसा जौहर ट्रस्ट या यूनिवर्सिटी से जुड़े संस्थानों तक पहुंचा।
- यूनिवर्सिटी निर्माण में इस्तेमाल हुए धन का वास्तविक स्रोत क्या था।
- ठेकेदारों, कंपनियों, ट्रस्ट और संबंधित लोगों के बीच वित्तीय संबंध क्या थे।
यूनिवर्सिटी के 38 भवन भी पहले से विवाद में
जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ा यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को लेकर भी कानूनी और प्रशासनिक विवाद चल रहा है।
हालिया रिपोर्ट के अनुसार इन भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश पर फिलहाल रोक है और मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होनी है। प्रशासनिक जांच में इन भवनों के बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण का आरोप लगाया गया था।
इसलिए यूनिवर्सिटी से जुड़े वित्तीय और निर्माण संबंधी मामलों पर पहले से ही प्रशासनिक स्तर पर जांच और कानूनी कार्रवाई चल रही है।
ED की कार्रवाई पर अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया
ED की छापेमारी के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कार्रवाई पर सवाल उठाए और इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी स्थापित करने वालों को निशाना बनाया जा रहा है।
दूसरी ओर, ED की जांच कथित मनी लॉन्ड्रिंग और फंड के स्रोत तथा उसकी आवाजाही का पता लगाने पर केंद्रित है। जांच पूरी होने के बाद ही वित्तीय लेनदेन को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा।
आगे क्या होगा?
ED अब तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की जांच करेगी। एजेंसी कथित मनी ट्रेल को जोड़ने के लिए संबंधित ठेकेदारों, कंपनियों और अन्य लोगों से पूछताछ भी कर सकती है।
जांच में यदि वित्तीय अनियमितताओं या मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पर्याप्त सबूत सामने आते हैं तो आगे कानूनी कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल यह जांच जारी है और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।
निष्कर्ष
रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े 10 ठिकानों पर ED की करीब 13 घंटे चली छापेमारी ने एक बार फिर यूनिवर्सिटी और जौहर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय मामलों को चर्चा में ला दिया है। जांच एजेंसी सरकारी ठेकों से जुड़े कथित फंड डायवर्जन, यूनिवर्सिटी निर्माण में हुए खर्च और संबंधित लोगों तथा संस्थाओं के बीच पैसों की आवाजाही की जांच कर रही है।
फिलहाल जांच जारी है। ED की कार्रवाई में सामने आने वाले दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड यह तय करने में अहम होंगे कि कथित फंड ट्रांसफर की वास्तविक तस्वीर क्या है।
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