कन्नौज में 10वीं के छात्र के साथ दर्दनाक हादसा, पेट में घुसी 3 फीट लंबी लाठी; 4 घंटे के ऑपरेशन से बची जान
कन्नौज, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के कन्नौज से एक बेहद दर्दनाक और हैरान करने वाला हादसा सामने आया है। दोस्तों के साथ गुल्ली-डंडा खेल रहे 10वीं कक्षा के छात्र विशाल के साथ खेल के दौरान ऐसा हादसा हुआ कि उसकी जान पर बन आई। दीवार से गिरते समय वह जमीन में गड़ी एक लंबी लाठी पर जा गिरा। लाठी उसके पेट को चीरते हुए अंदर घुस गई और उसका एक हिस्सा कंधे की तरफ जाकर फंस गया।
हादसा इतना गंभीर था कि छात्र को अस्पताल ले जाने के दौरान भी एंबुलेंस का दरवाजा खुला रखना पड़ा, क्योंकि शरीर में फंसी लाठी का बाकी हिस्सा बाहर निकला हुआ था। स्थानीय स्तर पर इलाज में कठिनाई के बाद परिवार छात्र को कानपुर लेकर पहुंचा, जहां डॉक्टरों की टीम ने करीब चार घंटे तक जटिल ऑपरेशन कर उसकी जान बचाई।
गुल्ली-डंडा खेलते समय हुआ हादसा
रिपोर्ट के मुताबिक कन्नौज निवासी हाईस्कूल का छात्र विशाल 31 तारीख को अपने दोस्तों के साथ एक प्लॉट में गुल्ली-डंडा खेल रहा था। खेल के दौरान वह दीवार पर चढ़कर गुल्ली पकड़ने की कोशिश कर रहा था।
इसी दौरान उसका पैर फिसल गया और वह नीचे जमीन पर जा गिरा। जमीन में करीब 5 फीट लंबी लाठी गड़ी हुई थी। गिरते समय विशाल उसी लाठी पर जा गिरा और लगभग 3 फीट लंबी लाठी उसके पेट में घुस गई।
लाठी अंदर जाकर कंधे की तरफ फंस गई, जिससे छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया।
शरीर में फंसी रही लाठी, एंबुलेंस का दरवाजा रखना पड़ा खुला
हादसे के बाद परिजन और आसपास के लोग छात्र को इलाज के लिए अस्पताल ले गए। पहले उसे स्थानीय स्तर पर इलाज के लिए ले जाया गया और इसके बाद तिर्वा मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया।
हालांकि, वहां डॉक्टरों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे इलाज करने में असमर्थता जताई। इसके बाद परिजन छात्र को कानपुर लेकर पहुंचे।
स्थिति इतनी गंभीर थी कि एंबुलेंस में छात्र को ले जाते समय दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता था। पेट में फंसी लाठी का एक हिस्सा एंबुलेंस के बाहर निकला हुआ था।
कानपुर में डॉक्टरों ने संभाला मोर्चा
छात्र को कानपुर के एक निजी अस्पताल में वरिष्ठ सर्जन डॉ. बृजेश यादव के पास ले जाया गया। डॉक्टरों की टीम ने तत्काल ऑपरेशन की तैयारी शुरू की।
ऑपरेशन को बेहद जोखिम भरा माना जा रहा था, क्योंकि लाठी शरीर के अंदर काफी गहराई तक पहुंच चुकी थी। ऑपरेशन के दौरान लाठी को सीधे खींचकर बाहर निकालना खतरनाक हो सकता था।
डॉक्टरों ने बेहद सावधानी से इसे निकालने की रणनीति बनाई। ऑपरेशन से पहले शरीर के बाहर निकले हिस्से को ग्राइंडर की मदद से काटा गया। इसके बाद अंदर फंसे हिस्से को धीरे-धीरे काटते हुए बाहर निकाला गया।
4 घंटे तक चला जटिल ऑपरेशन
डॉ. बृजेश यादव की टीम में करीब आठ डॉक्टर शामिल थे। इनमें एनेस्थीसिया और हार्ट से जुड़े विशेषज्ञ भी शामिल थे।
रिपोर्ट के अनुसार ऑपरेशन रात करीब 11 बजे शुरू हुआ और सुबह लगभग 4 बजे तक चला। यानी डॉक्टरों की टीम ने करीब चार घंटे तक बेहद सावधानी के साथ ऑपरेशन किया।
लाठी को एक साथ निकालने के बजाय उसे छोटे-छोटे हिस्सों में काटकर धीरे-धीरे बाहर निकाला गया। इस जटिल प्रक्रिया के बाद आखिरकार छात्र की जान बचाने में डॉक्टर सफल रहे।
सात दिन अस्पताल में रहा छात्र
ऑपरेशन के बाद विशाल को अस्पताल में निगरानी में रखा गया। रिपोर्ट के मुताबिक वह करीब सात दिन तक अस्पताल में भर्ती रहा।
इलाज के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इसके बाद बुधवार को हुए चेकअप में छात्र को पूरी तरह फिट पाया गया।
मां ने डॉक्टरों को बताया भगवान
बेटे की जान बचने के बाद विशाल की मां विनीता ने डॉक्टरों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह डॉक्टरों ने बेहद मुश्किल परिस्थिति में उनके बेटे की जान बचाई, उनके लिए डॉक्टर भगवान के समान हैं।
परिवार के लिए यह हादसा किसी बुरे सपने से कम नहीं था। एक खेल के दौरान हुआ हादसा कुछ ही पलों में छात्र की जिंदगी के लिए बड़ा खतरा बन गया था।
डॉक्टरों के सामने थी बड़ी चुनौती
इस मामले में सबसे बड़ी चुनौती शरीर में फंसी लाठी को सुरक्षित तरीके से निकालना था। अगर लाठी को जल्दबाजी में खींचा जाता तो अंदर मौजूद महत्वपूर्ण अंगों और रक्त वाहिकाओं को और नुकसान पहुंचने का खतरा हो सकता था।
इसी वजह से डॉक्टरों ने लाठी को धीरे-धीरे काटकर निकालने का फैसला किया। विशेषज्ञों की टीम ने कई घंटे की मेहनत के बाद इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया।
खेल के दौरान सुरक्षा को लेकर भी सवाल
इस घटना ने बच्चों के खेल के दौरान सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। गुल्ली-डंडा जैसे पारंपरिक खेल गांवों और कस्बों में आज भी लोकप्रिय हैं, लेकिन खुले मैदान में जमीन में गड़ी लकड़ी, लोहे की वस्तु या अन्य खतरनाक सामान मौजूद होने पर दुर्घटना का जोखिम बढ़ सकता है।
बच्चों को खुले मैदान में खेलने देने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वहां कोई नुकीली या खतरनाक वस्तु न हो। थोड़ी सी सावधानी कई गंभीर हादसों को रोक सकती है।
एक हादसा, जिसने परिवार को डरा दिया
विशाल के साथ हुआ यह हादसा बेहद असामान्य था। खेलते समय कुछ ही सेकंड में स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि परिवार को उसे एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाना पड़ा।
समय पर बेहतर इलाज और डॉक्टरों की जटिल सर्जरी के बाद छात्र की जान बच सकी। अब परिवार के लिए सबसे बड़ी राहत यही है कि विशाल खतरे से बाहर है और इलाज के बाद उसे स्वस्थ पाया गया।
निष्कर्ष
कन्नौज के 10वीं कक्षा के छात्र विशाल के साथ हुआ यह हादसा बेहद गंभीर था। गुल्ली-डंडा खेलते समय दीवार से गिरने के कारण जमीन में गड़ी करीब 5 फीट लंबी लाठी का लगभग 3 फीट हिस्सा उसके पेट में घुस गया था। तिर्वा से कानपुर तक इलाज के लिए ले जाने के बाद डॉक्टरों की टीम ने करीब चार घंटे की जटिल सर्जरी कर लाठी को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला और छात्र की जान बचा ली।
यह घटना यह भी बताती है कि बच्चों के खेलने की जगह को सुरक्षित रखना कितना जरूरी है। खुले मैदान में खेलने से पहले आसपास मौजूद खतरनाक वस्तुओं को हटाना चाहिए, ताकि खेलते समय किसी बच्चे के साथ ऐसा गंभीर हादसा न हो।
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