आगरा: देश के प्रमुख फुटवियर केंद्रों में शामिल आगरा का घरेलू जूता कारोबार इन दिनों बढ़ती लागत की चुनौती से जूझ रहा है। कच्चे माल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण जूता बनाने की लागत करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ गई है। इसका असर छोटे जूता कारखानों से लेकर बाजार में मांग तक दिखाई दे रहा है।
आगरा का घरेलू फुटवियर कारोबार करीब 20 हजार करोड़ रुपये का बताया जाता है। शहर में बड़ी संख्या में छोटे कारखाने और घर आधारित इकाइयां जूता निर्माण से जुड़ी हैं। ऐसे में कच्चे माल की कीमत बढ़ने का सीधा असर इस पूरे कारोबार से जुड़े लोगों पर पड़ रहा है।
EVA से लेकर एडहेसिव तक महंगे
जूता निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कई प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इनमें EVA, PU केमिकल, अपर फोम और एडहेसिव प्रमुख हैं।
आगरा सोल एंड शू कंपोनेंट एसोसिएशन के महासचिव अंबा प्रसाद गर्ग के मुताबिक, EVA की कीमत में करीब 25 प्रतिशत, PU केमिकल में 20 प्रतिशत, अपर फोम में 20 प्रतिशत और एडहेसिव में 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है।
इन सामग्रियों की कीमत बढ़ने से जूता बनाने की कुल लागत पर दबाव बढ़ गया है।
छोटे जूता कारखाने सबसे ज्यादा प्रभावित
आगरा में जूता निर्माण केवल बड़े कारखानों तक सीमित नहीं है। काजीपाड़ा, जगदीशपुरा, राम नगर, प्रकाश नगर, नगला छऊआ और टेढ़ी बगिया जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में छोटे और घर आधारित जूता निर्माण कार्य होते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 2.50 लाख से अधिक लोग जूता निर्माण से जुड़े हुए हैं। इसलिए लागत में बढ़ोतरी का असर केवल निर्माताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे इस उद्योग से जुड़े श्रमिकों और छोटे कारोबारियों पर भी दबाव पड़ रहा है।
पेट्रोलियम उत्पाद महंगे होने का असर
जूता उद्योग में इस्तेमाल होने वाले कई सिंथेटिक और रासायनिक उत्पाद पेट्रोलियम आधारित होते हैं। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और कच्चे तेल से जुड़े बाजारों में उतार-चढ़ाव का असर इन उत्पादों की कीमतों पर पड़ता है।
द आगरा शू फैक्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष विजय सामा ने बताया कि वैश्विक तनाव के कारण पेट्रोलियम उत्पादों और प्लास्टिक की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इसका असर जूता कंपोनेंट की लागत पर भी पड़ा है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी फुटवियर उद्योग के लिए कच्चे माल की लागत एक चुनौती बनी हुई है। नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्लास्टिक और रबर शीट जैसे कुछ महत्वपूर्ण इनपुट पर भारत में अपेक्षाकृत अधिक आयात शुल्क लागत को प्रभावित करते हैं।
एक तरफ लागत बढ़ी, दूसरी तरफ ग्राहक कम हुए
जूता कारोबारियों के सामने समस्या केवल बढ़ती लागत तक सीमित नहीं है। महंगे कच्चे माल के कारण तैयार जूते की कीमत बढ़ाने का दबाव है, लेकिन दूसरी ओर ग्राहक अधिक कीमत चुकाने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं।
जूता कंपोनेंट व्यापारी रवि चंदानी के मुताबिक, बाजार में ग्राहकों की संख्या कम हुई है। कारोबारियों के सामने ऐसी स्थिति है जिसमें उत्पादन लागत बढ़ रही है, जबकि महंगा तैयार माल खरीदने के लिए बाजार में मांग कमजोर है।
हींग की मंडी में कच्चे माल का बड़ा बाजार
आगरा की हींग की मंडी जूता कंपोनेंट और कच्चे माल के बड़े बाजार के रूप में जानी जाती है। रिपोर्ट के अनुसार यहां 500 से अधिक कच्चे माल की दुकानें हैं।
जूता निर्माण से जुड़े छोटे और मध्यम कारोबारी यहीं से उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली विभिन्न सामग्री खरीदते हैं। इसलिए कच्चे माल की कीमतों में बदलाव का असर पूरे फुटवियर क्लस्टर पर पड़ता है।
20 हजार करोड़ का घरेलू कारोबार
आगरा का फुटवियर क्लस्टर देश के सबसे बड़े जूता निर्माण केंद्रों में शामिल है। उद्योग से जुड़े संगठनों के अनुसार, आगरा के लेदर और नॉन-लेदर फुटवियर कारोबार का घरेलू टर्नओवर करीब 20 हजार करोड़ रुपये है।
इसके अलावा आगरा का जूता उद्योग निर्यात के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हाल की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल-जुलाई 2026 में आगरा से लेदर फुटवियर का निर्यात करीब ₹1,605.95 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 8.46 प्रतिशत अधिक था।
यानी घरेलू बाजार में लागत का दबाव बढ़ने के बावजूद आगरा के फुटवियर उद्योग का निर्यात क्षेत्र अलग तस्वीर पेश कर रहा है।
कारोबारियों को राहत की उम्मीद
कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी से छोटे निर्माताओं के लिए उत्पादन और कीमतों के बीच संतुलन बनाना चुनौती बन गया है। यदि लागत इसी तरह बढ़ती रही और मांग कमजोर रही तो छोटे कारखानों पर वित्तीय दबाव और बढ़ सकता है।
कारोबारियों की नजर अब कच्चे माल की कीमतों में संभावित स्थिरता और बाजार में मांग लौटने पर है। साथ ही, छोटे एवं मध्यम फुटवियर निर्माताओं के लिए लागत कम करने और प्रतिस्पर्धा बनाए रखने वाली नीतियों की जरूरत भी उद्योग जगत की चर्चा में है।
आगरा के फुटवियर उद्योग के सामने दोहरी चुनौती
आगरा का जूता बाजार इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है—पहली, उत्पादन लागत में लगातार बढ़ोतरी और दूसरी, महंगे उत्पादों को लेकर कमजोर होती ग्राहक मांग।
अगर कच्चे माल की कीमतें नीचे आती हैं या स्थिर होती हैं और बाजार में मांग मजबूत होती है तो कारोबारियों को राहत मिल सकती है। फिलहाल छोटे जूता कारखानों और कंपोनेंट कारोबारियों के लिए लागत नियंत्रण सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
निष्कर्ष: आगरा के करीब 20 हजार करोड़ रुपये के घरेलू फुटवियर बाजार पर बढ़ती कच्चे माल की कीमतों का दबाव साफ दिखाई दे रहा है। EVA, PU केमिकल, अपर फोम और एडहेसिव जैसी सामग्री महंगी होने से जूता निर्माण लागत करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ने की बात सामने आई है। वहीं, महंगे तैयार माल के कारण ग्राहक मांग में कमी की शिकायत भी कारोबारी कर रहे हैं।