आगरा: शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। आगरा के आईएसबीटी के बाहर निजी बसों का समानांतर संचालन होने की बात सामने आई है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, आईएसबीटी से रामबाग के बीच करीब 37 निजी बसें रोडवेज की बसों के समानांतर सवारियां ढो रही हैं। कई रूटों पर यात्रियों को रोडवेज की तुलना में कम किराए का लालच देकर निजी बसों में बैठाया जा रहा है।
आईएसबीटी के सामने बन गया निजी बसों का अड्डा
रिपोर्ट के अनुसार, परिवहन व्यवस्था में बदलाव के तहत एक जून से आगरा से अलीगढ़, मुरादाबाद और देहरादून समेत नौ रूटों की रोडवेज बसों को फाउंड्री नगर स्थित सेटेलाइट बस अड्डे भेजा गया था।
इसके बाद आईएसबीटी के आसपास निजी बसों की गतिविधियां बढ़ गईं। रिपोर्ट में बताया गया है कि आईएसबीटी से रामबाग तक निजी बसें खड़ी रहती हैं और रोडवेज के यात्रियों को अपने साथ ले जाती हैं।
दिल्ली जाने वाले यात्रियों को कम किराए का ऑफर
मंगलवार को आईएसबीटी कट के पास इसका उदाहरण देखने को मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, रोडवेज का परिचालक दिल्ली जाने वाले यात्रियों को बस में बैठा रहा था। इसी दौरान हरियाणा नंबर की एक निजी बस रोडवेज बस के आगे आकर खड़ी हो गई।
रोडवेज बस का दिल्ली का किराया 292 रुपये बताया गया, जबकि निजी बस की ओर से 250 रुपये किराया बताया गया। यानी यात्रियों को 42 रुपये कम किराए का विकल्प दिया गया और कुछ यात्री निजी बस में चले गए।
एटा, मैनपुरी और कासगंज रूट पर भी कम किराया
रिपोर्ट के अनुसार, आईएसबीटी से रामबाग के बीच पुल के नीचे खड़ी निजी बसें एटा, मैनपुरी और कासगंज जाने वाले यात्रियों को भी रोडवेज से कम किराए पर यात्रा का विकल्प दे रही हैं।
इन रूटों पर निजी बसों का किराया रोडवेज से करीब 20 से 30 रुपये कम होने की बात सामने आई है। इससे कम कीमत में यात्रा करना चाहने वाले यात्रियों का रुझान निजी बसों की ओर हो रहा है।
रोडवेज के रंग में निजी बसें?
मामले का एक और पहलू यह है कि रिपोर्ट के अनुसार कुछ निजी बसों को रोडवेज जैसी रंग-सज्जा में चलाया जा रहा है। इनमें जिला और डिपो के नाम तक लिखे होने की बात कही गई है।
इससे यात्रियों के सामने बस की वास्तविक पहचान को लेकर भ्रम की स्थिति बन सकती है। हालांकि, किसी विशेष बस के वैध या अवैध होने का अंतिम निर्धारण संबंधित परिवहन अधिकारियों की जांच और दस्तावेजों के आधार पर ही होगा।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
रोडवेज कर्मचारी संघ के महामंत्री चंद्रहंस के अनुसार, निजी बसों के संचालन को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें की गई हैं। अभियान चलाकर कुछ बसों को पकड़ा गया और उन्हें आरटीओ को सौंपे जाने की बात भी सामने आई है।
हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक कार्रवाई के कुछ समय बाद निजी बसों का संचालन फिर शुरू हो जाता है।
आरटीओ ने फिर कार्रवाई की बात कही
आरटीओ प्रवर्तन अखिलेश द्विवेदी ने बताया कि निजी बसों के खिलाफ कई बार कार्रवाई की जा चुकी है और बसों के चालान भी किए गए हैं। उनके मुताबिक, कार्रवाई के बाद भी दोबारा संचालन होने की स्थिति में फिर से अभियान चलाया जाएगा।
वहीं, रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक बीपी अग्रवाल ने कहा कि इस मामले में कई बार शिकायत की गई है। उनके अनुसार, कार्रवाई का अधिकार आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस के पास है। उन्होंने बस अड्डे के पास इस तरह के संचालन को नियम विरुद्ध बताया।
यात्रियों के लिए क्या है परेशानी?
निजी बसों के कम किराए से यात्रियों को तत्काल आर्थिक लाभ दिखाई दे सकता है, लेकिन बस की वैधता, परमिट, बीमा, फिटनेस और अन्य जरूरी दस्तावेजों की स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है।
यात्रियों के लिए बेहतर है कि वे अधिकृत बस सेवा और निर्धारित बस अड्डे से ही यात्रा करें। किसी निजी बस में बैठने से पहले उसका परमिट और सेवा की वैधता संबंधी जानकारी उपलब्ध होने पर जांचना सुरक्षित विकल्प हो सकता है।
निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
आईएसबीटी के बाहर निजी बसों के इस तरह संचालन की खबर सामने आने के बाद परिवहन व्यवस्था की निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं। एक तरफ रोडवेज यात्रियों को निर्धारित व्यवस्था के तहत बस सेवा उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर बस अड्डे के आसपास निजी ऑपरेटर यात्रियों को आकर्षित कर रहे हैं।
अब देखना होगा कि परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस की अगली कार्रवाई के बाद आईएसबीटी के आसपास निजी बसों के संचालन की स्थिति में कितना बदलाव आता है।