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आगरा में UGC नियमों के खिलाफ सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी, 200 ट्रैक्टरों के साथ कलेक्ट्रेट घेराव की कोशिश; पुलिस ने रोका रास्ता

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
21 September 2026 11:53 AM 1 मिनट पठन 17 Views
आगरा में UGC नियमों के खिलाफ सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी, 200 ट्रैक्टरों के साथ कलेक्ट्रेट घेराव की कोशिश; पुलिस ने रोका रास्ता

आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में UGC के नए इक्विटी नियमों के विरोध में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़क पर उतर आए। रविवार को UGC मुक्ति मोर्चा के आह्वान पर करीब 200 ट्रैक्टरों के साथ प्रदर्शनकारियों ने आगरा कलेक्ट्रेट की ओर मार्च करने की कोशिश की। पुलिस और PAC ने उन्हें रोकने के लिए कई जगह बैरिकेडिंग के साथ JCB, बुलडोजर और हाइड्रा मशीनें तैनात कीं।

प्रदर्शनकारियों के आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह नोकझोंक हुई। कुछ प्रदर्शनकारी वैकल्पिक रास्तों और खेतों से होते हुए आगे बढ़ने की कोशिश करते दिखाई दिए। बाद में कुछ लोग यमुना एक्सप्रेसवे तक भी पहुंच गए।

200 ट्रैक्टरों के साथ निकला मार्च

UGC मुक्ति मोर्चा ने आगरा कलेक्ट्रेट के घेराव का आह्वान किया था। इसके बाद शनिवार शाम से ही आगरा के मुड़ी चौराहे के आसपास प्रदर्शनकारियों का जुटना शुरू हो गया था।

रविवार को प्रदर्शनकारियों ने ट्रैक्टरों के साथ कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने पहले से ही कई रास्तों पर बैरिकेडिंग कर रखी थी। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए भारी मशीनरी भी लगाई गई थी।

JCB और हाइड्रा लगाकर रास्ता रोका

प्रदर्शनकारियों की भीड़ को देखते हुए पुलिस और PAC ने कई स्थानों पर रास्ते बंद कर दिए। JCB, बुलडोजर और हाइड्रा मशीनों को भी रास्ते में खड़ा किया गया।

Aaj Tak की रिपोर्ट के मुताबिक, दोपहर के आसपास कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस द्वारा लगाए गए बुलडोजर पर चढ़कर आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे। पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इसके बाद यमुना एक्सप्रेसवे के पास दोबारा बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोका गया।

यमुना एक्सप्रेसवे तक पहुंचे प्रदर्शनकारी

रास्ते रोके जाने के बाद कुछ प्रदर्शनकारी यमुना एक्सप्रेसवे पर पहुंच गए और सड़क पर खड़े होकर वाहनों की आवाजाही रोकने की कोशिश की। पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को समझाया और उन्हें एक्सप्रेसवे से हटाया।

हालांकि, इस घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में स्थिति का वर्णन अलग है। Aaj Tak और कुछ स्थानीय रिपोर्टों में प्रदर्शनकारियों के एक्सप्रेसवे पर पहुंचकर वाहनों को रोकने का उल्लेख है, जबकि आगरा पुलिस के एक बयान के हवाले से Hindustan Times ने कहा कि पुलिस ने बड़े स्तर पर ट्रैफिक बाधित होने से रोक दिया था।

आखिर UGC नियमों का विरोध क्यों?

प्रदर्शनकारी University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

UGC ने जनवरी 2026 में ये नियम अधिसूचित किए थे। इनका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव से निपटने और इक्विटी को बढ़ावा देने के लिए एक नया ढांचा तैयार करना था। UGC की वेबसाइट पर भी 2026 के इन नए नियमों को सूचीबद्ध किया गया है।

विरोध कर रहे समूहों का आरोप है कि नियमों में जातिगत भेदभाव की परिभाषा और शिकायत व्यवस्था को लेकर ऐसे प्रावधान हैं, जिनसे गैर-आरक्षित या सामान्य वर्ग के लोगों की शिकायतों के लिए पर्याप्त सुरक्षा नहीं रह जाती। ये प्रदर्शनकारियों और नियमों को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं के तर्क हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने नए नियमों को रखा है स्थगित

UGC नियमों को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच चुका है। 29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने 2026 के UGC Equity Regulations को फिलहाल abeyance में रखने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने साथ ही 2012 के UGC नियमों को आगे के आदेश तक लागू रखने का निर्देश दिया।

इसके बाद अगस्त 2026 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 2026 के नियमों पर पुनर्विचार किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने UGC से इस मामले पर विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा था।

यानी फिलहाल 2026 के विवादित नियम लागू स्थिति में नहीं हैं और उनके भविष्य को लेकर केंद्र सरकार की पुनर्विचार प्रक्रिया तथा सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही महत्वपूर्ण है।

प्रदर्शनकारियों की क्या मांग है?

आगरा में प्रदर्शन कर रहे संगठनों ने UGC के नए नियमों को वापस लेने की मांग की है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी सौंपा। उनकी मांगों में UGC के 2026 के संशोधित प्रावधानों को निरस्त करने और आरक्षण से जुड़े प्रावधानों में बदलाव जैसी मांगें शामिल हैं।

प्रदर्शन में सवर्ण समाज से जुड़े संगठनों के अलावा किसान और क्षत्रिय संगठनों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी की भी रिपोर्ट सामने आई है।

पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा

प्रदर्शन को देखते हुए आगरा के संवेदनशील इलाकों में पुलिस और PAC की तैनाती की गई। मुड़ी चौराहे और आसपास के रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई ताकि बड़ी संख्या में ट्रैक्टर और प्रदर्शनकारी जिला मुख्यालय की ओर न पहुंच सकें।

पुलिस की ओर से यह भी कहा गया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने एक्सप्रेसवे तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन उन्हें समझाकर वहां से हटा दिया गया।

आगे क्या?

UGC के 2026 नियमों को लेकर विवाद अब सिर्फ सड़क पर हो रहे प्रदर्शनों तक सीमित नहीं है। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और केंद्र सरकार भी नियमों पर पुनर्विचार कर रही है। ऐसे में आगे होने वाली न्यायिक कार्यवाही और केंद्र के फैसले से यह स्पष्ट होगा कि इन नियमों का अंतिम स्वरूप क्या होगा।

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