Sunday, 23 August 2026

Ayodhya Ram Mandir: चढ़ावा चोरी जांच में SIT ने फोरेंसिक ऑडिटर को जोड़ा, बैंक लॉकरों की हुई कोडिंग

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा जांच में SIT की फोरेंसिक ऑडिट और बैंक लॉकरों की कोडिंग को दर्शाता हुआ न्यूज थंबनेल

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित गड़बड़ी की जांच अब और तकनीकी तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद गठित विशेष जांच टीम (SIT) में एक फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया गया है। टीम बैंक और राम मंदिर ट्रस्ट के रिकॉर्ड का मिलान कर रही है और वित्तीय लेनदेन तथा दस्तावेजों में संभावित विसंगतियों की जांच कर रही है।

साथ ही रामलला को श्रद्धालुओं की ओर से समर्पित कीमती धातुओं और आभूषणों को सुरक्षित रखने वाले बैंक लॉकरों की सुरक्षा व्यवस्था को भी डिजिटल बनाया जा रहा है। इसके लिए लॉकरों पर विशेष कोड वाले स्टिकर लगाए गए हैं, जिन्हें स्कैन करने पर अंदर रखी वस्तुओं की सूची सामने आ सकेगी।

SIT में शामिल हुआ फोरेंसिक ऑडिटर

श्रीराम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच आईजी किरन एस की अगुवाई वाली SIT कर रही है। जांच को और गहराई देने के लिए टीम में एक फोरेंसिक ऑडिटर को शामिल किया गया है।

ऑडिटर का काम केवल सामान्य रिकॉर्ड देखने तक सीमित नहीं है। वह भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के रिकॉर्ड का मिलान कर संभावित गड़बड़ियों को समझने में मदद कर रहा है।

फोरेंसिक ऑडिट के जरिए यह देखा जा सकता है कि रिकॉर्ड में दर्ज वस्तुओं, रकम और संबंधित दस्तावेजों के बीच कोई अंतर तो नहीं है।

बैंक लॉकरों में रखे हैं रामलला को मिले कीमती सामान

रिपोर्ट के मुताबिक श्रद्धालुओं की ओर से रामलला को समर्पित की गई कीमती धातुएं, आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुएं बैंक लॉकरों में सुरक्षित रखी गई हैं।

इन सामानों को अलग-अलग लॉकरों में रखा गया है। संबंधित वस्तुओं की सूची बैंक और राम मंदिर ट्रस्ट दोनों के रिकॉर्ड में सुरक्षित है। लॉकर इस्तेमाल करने के लिए ट्रस्ट की ओर से बैंक को निर्धारित शुल्क भी दिया जाता है।

अब जांच टीम इन रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित और डिजिटल तरीके से सुरक्षित करने की दिशा में काम कर रही है।

लॉकरों पर लगाए गए कोड वाले स्टिकर

नई सुरक्षा व्यवस्था के तहत बैंक के लॉकरों पर विशेष कोड वाले स्टिकर लगाए गए हैं।

इन स्टिकरों को स्कैन करने पर संबंधित लॉकर में रखी वस्तुओं की डिजिटल सूची सामने आ सकेगी। इसके बाद सूची को बैंक और ट्रस्ट के रिकॉर्ड से मिलाना आसान होगा।

इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह बताया जा रहा है कि हर बार लॉकर खोलकर अंदर रखी वस्तुओं को बाहर निकालने और उनकी दोबारा गिनती करने की जरूरत कम होगी।

अब रैंडम चेकिंग भी आसान होगी

नई डिजिटल व्यवस्था से रैंडम चेकिंग की प्रक्रिया भी आसान होने की उम्मीद है।

अधिकारी को केवल लॉकर पर लगे कोड को स्कैन करना होगा। स्कैन के बाद सिस्टम में मौजूद सामान की सूची सामने आ जाएगी और उसे रिकॉर्ड से मिलाया जा सकेगा।

इससे कीमती वस्तुओं की निगरानी अधिक व्यवस्थित तरीके से करने में मदद मिल सकती है।

दो दिन तक अयोध्या में रही SIT

लॉकरों की कोडिंग और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर SIT की टीम दो दिनों तक अयोध्या में मौजूद रही

स्टिकर और कोडिंग का काम पूरा होने के बाद टीम वापस लौट गई। हालांकि, मामले से जुड़े रिकॉर्ड और जांच की प्रक्रिया आगे जारी रहने की बात सामने आई है।

ट्रस्ट ने पहले भी कराई थी रिकॉर्ड की जांच

SIT की कार्रवाई से पहले राम मंदिर ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने भी बैंक रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कराई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने ट्रस्ट के सहयोगियों के साथ करीब एक पखवाड़े तक बैंक के रिकॉर्ड की पड़ताल की। इसके बाद लॉकरों में रखी मूल्यवान वस्तुओं की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई।

हर वस्तु का रिकॉर्ड तैयार कर उसकी एक प्रति ट्रस्ट कार्यालय और दूसरी बैंक प्रबंधन के पास सुरक्षित रखी गई।

बैंक की ओर से भी हुई विभागीय जांच

इस मामले में बैंक स्तर पर भी अलग जांच की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार बैंक के क्षेत्रीय और जोनल अधिकारियों ने विभागीय जांच कर अपनी रिपोर्ट तैयार करके प्रबंधन को भेजी है। इसके अलावा बैंक की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े एक सर्कुलर के तहत सिक्योरिटी सर्विसेज कंपनी के साथ बैंक का अनुबंध भी समाप्त किया गया।

इससे संकेत मिलता है कि जांच का दायरा केवल मंदिर ट्रस्ट के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि बैंकिंग और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं को भी देखा जा रहा है।

चढ़ावा चोरी मामले में क्या जांच रही SIT?

SIT का मुख्य फोकस मंदिर में मिलने वाले चढ़ावे और दान की गिनती, रिकॉर्डिंग, सुरक्षा और बैंक में जमा किए जाने की प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं पर है।

इससे पहले सामने आई SIT की प्रारंभिक जांच में गिनती प्रक्रिया के दौरान कथित चोरी और निगरानी से जुड़ी गंभीर कमियों का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में CCTV फुटेज, बैंक रिकॉर्ड, कर्मचारियों के बयान और अन्य दस्तावेजों की जांच किए जाने की बात सामने आई थी।

हालांकि किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी केवल जांच में सामने आए आरोपों के आधार पर अंतिम रूप से तय नहीं मानी जा सकती। इसके लिए संबंधित कानूनी प्रक्रिया और अंतिम निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बढ़ी जांच की गंभीरता

राम मंदिर चढ़ावा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच में फोरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का निर्देश दिया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार की SIT में इस विशेषज्ञ को शामिल किया गया।

फोरेंसिक ऑडिट का उद्देश्य वित्तीय रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों की अधिक तकनीकी तरीके से जांच करना है।

2020 से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में

मामले की जांच का दायरा पुराने रिकॉर्ड तक भी पहुंचने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी चढ़ावे और उससे जुड़े रिकॉर्ड की पुरानी प्रविष्टियों को भी देख रही है।

इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि रिकॉर्ड रखने, चढ़ावे की गिनती और उसे सुरक्षित रखने की प्रक्रिया में समय के साथ कोई अनियमितता हुई थी या नहीं।

डिजिटल सुरक्षा पर दिया जा रहा जोर

ताजा कार्रवाई से एक बात स्पष्ट है कि मंदिर में रखे कीमती सामानों के रिकॉर्ड को अब अधिक डिजिटल और व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित करने पर जोर दिया जा रहा है।

लॉकर कोडिंग, डिजिटल सूची और स्कैन आधारित रैंडम चेकिंग जैसी व्यवस्था से रिकॉर्ड और वास्तविक सामान के बीच मिलान करना आसान हो सकता है।

इससे भविष्य में किसी भी संभावित विसंगति को जल्दी पकड़ने में भी मदद मिल सकती है।

आगे क्या होगा?

अब फोरेंसिक ऑडिटर बैंक और ट्रस्ट के रिकॉर्ड की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। लॉकरों में रखी वस्तुओं की सूची, बैंक रिकॉर्ड, ट्रस्ट के अभिलेख और अन्य संबंधित दस्तावेजों का मिलान किया जा सकता है।

जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर SIT आगे की कार्रवाई को लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।

इस पूरे मामले में यह ध्यान रखना जरूरी है कि जांच में किसी गड़बड़ी का सामने आना और किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप साबित होना दो अलग-अलग बातें हैं। अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

निष्कर्ष

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच में SIT ने अब फोरेंसिक ऑडिटर को शामिल किया है। बैंक और राम मंदिर ट्रस्ट के रिकॉर्ड का मिलान कर संभावित वित्तीय और दस्तावेजी गड़बड़ियों की पड़ताल की जा रही है।

इसके साथ ही रामलला को समर्पित कीमती धातुओं और आभूषणों वाले बैंक लॉकरों की कोडिंग पूरी की गई है। नए सिस्टम में कोड स्कैन करते ही संबंधित लॉकर में रखी वस्तुओं की सूची सामने आ सकेगी, जिससे रैंडम चेकिंग और रिकॉर्ड मिलान आसान होगा।

अब इस जांच में फोरेंसिक ऑडिट से सामने आने वाले निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे और इससे मामले में वित्तीय रिकॉर्ड तथा सुरक्षा व्यवस्था की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।


FAQs

राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच कौन कर रहा है?

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित SIT, जिसकी अगुवाई आईजी किरन एस कर रही हैं, मामले की जांच कर रही है।

SIT में फोरेंसिक ऑडिटर क्यों शामिल किया गया?

फोरेंसिक ऑडिटर बैंक और राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय तथा संबंधित रिकॉर्ड का मिलान करके संभावित विसंगतियों की जांच में मदद करेगा।

बैंक लॉकरों पर कोडिंग क्यों की गई?

लॉकरों पर लगाए गए कोड को स्कैन करने पर अंदर रखी वस्तुओं की सूची सामने आ सकेगी। इससे रिकॉर्ड मिलान और रैंडम चेकिंग आसान होगी।

लॉकरों में क्या रखा गया है?

रिपोर्ट के अनुसार श्रद्धालुओं द्वारा रामलला को समर्पित कीमती धातुएं, आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुएं अलग-अलग बैंक लॉकरों में सुरक्षित रखी गई हैं।

क्या मामले में किसी को दोषी ठहराया गया है?

जांच में कथित गड़बड़ियों और चोरी से जुड़े तथ्य सामने आए हैं, लेकिन किसी व्यक्ति की अंतिम कानूनी जिम्मेदारी संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगी।

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