गोरखपुर में ईंट भट्ठा उद्योग पर GST की मार, 1.20 लाख लोगों की रोजी-रोटी पर संकट; टैक्स घटाने की मांग
गोरखपुर में ईंट भट्ठा उद्योग बढ़ती लागत और टैक्स के दबाव से जूझ रहा है। कारोबारियों का दावा है कि जिले में करीब 425 ईंट भट्ठों से लगभग 1.20 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलता है। ऐसे में यदि ईंट उद्योग पर टैक्स और लागत का दबाव कम नहीं हुआ तो बड़ी संख्या में मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।
ईंट भट्ठा कारोबारियों का कहना है कि जीएसटी की मौजूदा व्यवस्था, कोयले की बढ़ी दर और अलग-अलग विभागों की कार्रवाई से कारोबार चलाना मुश्किल हो रहा है। उनका कहना है कि सरकार को ईंट उद्योग के लिए टैक्स में राहत देने के साथ ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे छोटे और मध्यम भट्ठा संचालक भी कारोबार जारी रख सकें।
425 ईंट भट्ठों से जुड़ा है रोजगार
गोरखपुर जिले में लगभग 425 ईंट भट्ठे संचालित होने की जानकारी सामने आई है। कारोबारियों के अनुसार इन भट्ठों के माध्यम से करीब 1.20 लाख लोगों को सीधे रोजगार मिलता है।
ईंट भट्ठा उद्योग में केवल मजदूर ही नहीं, बल्कि परिवहन, मिट्टी की ढुलाई, कोयला आपूर्ति, निर्माण सामग्री और दूसरे छोटे कारोबार भी जुड़े हुए हैं। इसलिए उद्योग पर पड़ने वाले दबाव का असर इससे जुड़े अन्य लोगों पर भी पड़ सकता है।
GST और कोयले की कीमत से बढ़ी लागत
ईंट भट्ठा कारोबारियों की सबसे बड़ी चिंता जीएसटी और ईंधन लागत को लेकर है।
रिपोर्ट के अनुसार ईंट पर अलग-अलग परिस्थितियों में 6 से 12 प्रतिशत तक जीएसटी लागू है। वहीं कोयले पर जीएसटी दर 5 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत होने से ईंट उत्पादन की लागत बढ़ने का दावा किया गया है।
कोयला ईंट भट्ठों के लिए महत्वपूर्ण ईंधन है। इसकी लागत बढ़ने का सीधा असर उत्पादन खर्च पर पड़ता है।
महंगी हो सकती हैं लाल ईंटें
उत्पादन लागत बढ़ने के कारण आने वाले समय में लाल ईंट की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
कारोबारियों का कहना है कि एक तरफ सीमेंट ईंट और फ्लाई ऐश ईंट जैसे विकल्पों का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ लाल ईंट के उत्पादन पर टैक्स और अन्य खर्च बढ़ रहे हैं।
ऐसे में पारंपरिक ईंट भट्ठा उद्योग के सामने प्रतिस्पर्धा बनाए रखने की चुनौती बढ़ गई है।
कारोबारियों ने GST घटाने की मांग की
ईंट भट्ठा कारोबारियों की ओर से लंबे समय से जीएसटी दर कम करने की मांग की जा रही है।
उनका कहना है कि वर्तमान कर व्यवस्था छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव डाल रही है। कारोबारियों ने सरकार से समाधान योजना जैसी व्यवस्था लागू करने की मांग भी की है, ताकि ईंट भट्ठा उद्योग को राहत मिल सके।
2017 के बाद बदली टैक्स व्यवस्था
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद ईंट निर्माताओं के लिए कंपोजिट स्कीम की व्यवस्था थी। कारोबारियों के मुताबिक मार्च 2022 में इसमें बदलाव के बाद टैक्स का बोझ बढ़ा।
कारोबारियों का दावा है कि पहले की व्यवस्था में कम दर पर कर भुगतान की सुविधा थी, लेकिन बाद में यह दर बढ़ गई और तब से वे जीएसटी में राहत की मांग कर रहे हैं।
कारोबारियों ने पुराने समाधान योजना मॉडल की मांग की
ईंट भट्ठा संचालक सरकार से वैट के समय लागू रही समाधान योजना जैसी व्यवस्था जीएसटी में भी लागू करने की मांग कर रहे हैं।
उनका कहना है कि इससे टैक्स प्रक्रिया सरल हो सकती है और छोटे कारोबारियों को अपने कारोबार को जारी रखने में मदद मिलेगी।
हालांकि इस मांग पर सरकार या जीएसटी काउंसिल की ओर से क्या अंतिम निर्णय होगा, यह अलग विषय है।
प्रदूषण और श्रम विभाग की कार्रवाई का भी दबाव
कारोबारियों के अनुसार केवल जीएसटी ही उनकी समस्या नहीं है। प्रदूषण विभाग, राज्यकर विभाग और श्रम विभाग की कार्रवाई से भी ईंट भट्ठा संचालकों पर दबाव बढ़ा है।
भट्ठा उद्योग में पर्यावरण नियमों और श्रम कानूनों का पालन आवश्यक है, लेकिन कारोबारियों का कहना है कि नियमों के अनुपालन के साथ-साथ सरकार को उद्योग की आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखना चाहिए।
गोरखपुर के निर्माण क्षेत्र से मिल रही उम्मीद
गोरखपुर में पिछले कुछ वर्षों में इन्फ्रास्ट्रक्चर और निर्माण गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई है। इससे ईंट की मांग को सहारा मिलने की बात रिपोर्ट में सामने आई है।
लेकिन कारोबारियों का कहना है कि अगर उत्पादन लागत लगातार बढ़ती रही तो मांग होने के बावजूद भट्ठा उद्योग के लिए लाभ के साथ कारोबार करना मुश्किल हो सकता है।
सीमेंट और फ्लाई ऐश ईंट से बढ़ी प्रतिस्पर्धा
आज निर्माण क्षेत्र में पारंपरिक लाल ईंट के साथ फ्लाई ऐश ईंट और सीमेंट आधारित ईंटों का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है।
ऐसे में लाल ईंट उद्योग के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर वैकल्पिक निर्माण सामग्री से प्रतिस्पर्धा और दूसरी ओर उत्पादन लागत में वृद्धि।
कारोबारियों का मानना है कि अगर टैक्स में राहत मिलती है तो पारंपरिक ईंट उद्योग अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति बेहतर कर सकता है।
रोजगार पर पड़ सकता है असर
ईंट भट्ठा उद्योग बड़ी संख्या में ग्रामीण और प्रवासी मजदूरों को मौसमी रोजगार देता है। यदि भट्ठों की संख्या कम होती है या उत्पादन घटता है तो इसका सीधा असर मजदूरों की आय पर पड़ सकता है।
गोरखपुर में करीब 1.20 लाख लोगों के रोजगार से जुड़े होने के कारोबारियों के दावे को देखते हुए यह मुद्दा केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार से भी जुड़ा हुआ है।
सरकार से राहत की उम्मीद
ईंट भट्ठा कारोबारी चाहते हैं कि सरकार जीएसटी दर, कोयले की लागत और अनुपालन से जुड़े दबाव पर विचार करे।
उनका कहना है कि उद्योग को राहत मिलने से कारोबार जारी रह सकेगा और इससे जुड़े मजदूरों का रोजगार भी सुरक्षित रहेगा।
अब नजर इस बात पर है कि सरकार और जीएसटी काउंसिल ईंट भट्ठा उद्योग की इन मांगों पर क्या कदम उठाते हैं।
निष्कर्ष
गोरखपुर का ईंट भट्ठा उद्योग बढ़ती लागत और जीएसटी के दबाव से जूझ रहा है। कारोबारियों के अनुसार जिले के करीब 425 भट्ठों से 1.20 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलता है।
कोयले पर बढ़ी जीएसटी दर, ईंट पर टैक्स और अन्य विभागों की कार्रवाई को लेकर कारोबारी राहत की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर टैक्स कम किया जाए और समाधान योजना जैसी व्यवस्था लाई जाए तो उद्योग को राहत मिल सकती है।
फिलहाल ईंट भट्ठा कारोबारियों की नजर सरकार के अगले कदम पर है। आने वाले समय में टैक्स व्यवस्था और उत्पादन लागत में बदलाव इस उद्योग के साथ-साथ हजारों मजदूर परिवारों की आय पर भी असर डाल सकता है।
FAQs
गोरखपुर में कितने ईंट भट्ठे हैं?
रिपोर्ट के अनुसार गोरखपुर जिले में करीब 425 ईंट भट्ठे हैं।
ईंट भट्ठा उद्योग से कितने लोगों को रोजगार मिलता है?
कारोबारियों के अनुसार करीब 1.20 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलता है।
ईंट भट्ठा कारोबारी किस बात की मांग कर रहे हैं?
कारोबारी जीएसटी दर कम करने और समाधान योजना जैसी व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं।
कोयले की कीमत बढ़ने से क्या असर पड़ा?
कोयले पर जीएसटी बढ़ने से ईंट उत्पादन की लागत बढ़ने का दावा कारोबारियों ने किया है।
क्या ईंटों की कीमत बढ़ सकती है?
उत्पादन लागत बढ़ने के कारण ईंट कारोबारियों ने कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई है।
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