बांदा: कभी सूखे और पानी की कमी के लिए पहचाने जाने वाले बुंदेलखंड में अब खेती की तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में खेत-तालाब योजना किसानों के लिए सिंचाई का बड़ा सहारा बनकर सामने आई है। खेतों में बनाए गए तालाबों में बारिश का पानी जमा किया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर इसी पानी से फसलों की सिंचाई की जा रही है।
इस बदलाव का असर किसानों की फसल और आमदनी पर भी दिखाई दे रहा है। बांदा में अब तक 4,800 से ज्यादा किसान इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। प्रशासन के अनुसार खेत में पानी रोकने की व्यवस्था से किसानों को बारिश पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है।
कभी पानी के लिए ट्रेन भेजने की आई थी नौबत
बुंदेलखंड में पानी की कमी कोई नई समस्या नहीं है। यहां लंबे समय तक बारिश की अनिश्चितता के कारण किसानों को खेती में मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। बांदा के कई इलाकों में किसान लंबे समय तक बारिश के भरोसे खेती करते रहे।
हालात इतने गंभीर रहे कि बुंदेलखंड के लिए पानी पहुंचाने को ट्रेन तक चलानी पड़ी थी। ऐसे क्षेत्र में खेतों में बारिश का पानी रोककर उसका इस्तेमाल सिंचाई में करना किसानों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
बारिश का पानी अब खेत में ही हो रहा जमा
खेत-तालाब योजना का मूल उद्देश्य यही है कि बारिश का पानी खेत से बहकर बाहर न जाए, बल्कि उसे खेत में ही संरक्षित किया जाए। तालाब में जमा पानी को बाद में फसल की जरूरत के अनुसार सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
बांदा के मटौंध इलाके में इस व्यवस्था का असर खेतों में दिखाई दे रहा है। जहां पहले पानी की कमी के कारण फसल सूखने का डर रहता था, वहां अब किसान सिंचाई के लिए खेत में जमा पानी का इस्तेमाल कर पा रहे हैं।
पहले गेहूं, धान और चना की खेती में थी परेशानी
ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ साल पहले तक क्षेत्र के कई किसान बारिश पर काफी हद तक निर्भर थे। गेहूं, धान, सरसों, चना और अरहर जैसी फसलों के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने पर उत्पादन प्रभावित होता था।
कई किसानों के लिए स्थिति ऐसी थी कि फसल तैयार होने के बाद भी लागत निकालना मुश्किल हो जाता था। पानी की उपलब्धता ने अब खेती को अधिक भरोसेमंद बनाने में मदद की है।
52,500 रुपये तक मिलता है अनुदान
उत्तर प्रदेश की खेत-तालाब योजना के तहत पात्र किसान अपने खेत में तालाब बनवा सकते हैं। इसके लिए कृषि विभाग की प्रक्रिया के अनुसार चयन किया जाता है और छोटे तालाब की निर्धारित लागत पर 50 फीसदी तक अनुदान, अधिकतम 52,500 रुपये, दिए जाने का प्रावधान है। यह राशि डीबीटी के माध्यम से दी जाती है।
तालाब बनने के बाद बारिश का पानी उसमें जमा होता है। इसके अलावा सिंचाई को आसान बनाने के लिए पाइप और स्प्रिंकलर जैसी सुविधाओं से भी किसानों को फायदा मिल सकता है।
15 हजार की फसल से लाखों तक पहुंची बिक्री का दावा
बांदा की रिपोर्ट में किसानों ने अपनी आमदनी में बदलाव का अनुभव साझा किया। एक किसान के मुताबिक, पहले 15 हजार से 50 हजार रुपये तक की फसल बिक्री को अच्छा माना जाता था। अब बेहतर सिंचाई व्यवस्था के बाद खेती से 2 से 3 लाख रुपये तक की बिक्री होने की बात सामने आई है।
रिपोर्ट में बड़े किसानों की एक फसल से 5 से 6 लाख रुपये तक की कमाई के दावे का भी उल्लेख है। हालांकि, खेती से होने वाली वास्तविक आय जमीन के आकार, फसल, उत्पादन, बाजार भाव और लागत के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
बांदा में 4,800 से ज्यादा किसान योजना से जुड़े
भूमि संरक्षण अधिकारी अभयराज के मुताबिक, खेत-तालाब योजना ने किसानों को अपने खेत में सिंचाई के पानी का इंतजाम करने में मदद की है। इस साल बांदा में 255 किसानों को योजना का लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है और इसके लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
बांदा के जिलाधिकारी अमित असेरी के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार की कृषि योजनाओं को जिले में लागू किया जा रहा है। उनके मुताबिक खेत-तालाब योजना का उद्देश्य खेत का पानी खेत में रोकना है और जिले में अब तक 4,800 से ज्यादा किसान इससे लाभान्वित हो चुके हैं।
बुंदेलखंड में जल संरक्षण का बढ़ता महत्व
बुंदेलखंड में खेती की बड़ी चुनौती पानी की उपलब्धता रही है। ऐसे में खेत-तालाब जैसी योजनाएं बारिश के पानी को स्थानीय स्तर पर संरक्षित करने में मदद कर सकती हैं।
किसान अगर तालाब में जमा पानी का इस्तेमाल समय पर सिंचाई के लिए करते हैं, तो उन्हें बारिश के अगले दौर का इंतजार कम करना पड़ सकता है। इससे फसल की बुवाई और सिंचाई का समय बेहतर तरीके से तय करने में मदद मिलती है।
2026 में भी बुंदेलखंड में खेत-तालाब योजना को लेकर किसानों के अनुभव सामने आए हैं। महोबा की एक रिपोर्ट में भी किसानों ने बताया कि खेत में पानी रोकने से सिंचाई आसान हुई और भूजल स्तर में सुधार देखने को मिला।
योजना से क्या बदली तस्वीर?
खेत-तालाब योजना का असर केवल पानी बचाने तक सीमित नहीं है। पर्याप्त सिंचाई उपलब्ध होने पर किसान फसल के उत्पादन और खेती के तरीके को बेहतर तरीके से प्लान कर सकते हैं। कुछ क्षेत्रों में किसान अतिरिक्त गतिविधियों जैसे सब्जी उत्पादन या मछली पालन की ओर भी बढ़ सकते हैं।
हालांकि, तालाब में पानी का भराव पूरी तरह बारिश और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसलिए योजना का लाभ हर किसान और हर मौसम में एक जैसा होना जरूरी नहीं है।