बरेली: कांग्रेस के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने बरेली में पिछले साल हुए बवाल को लेकर पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बुधवार रात बरेली पहुंचे अजय राय ने आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा के परिवार से मुलाकात की और उनके मामले में कानूनी मदद का भरोसा दिया। इसके बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि बरेली में दंगा हुआ ही नहीं, बल्कि सरकार के इशारे पर अधिकारियों ने लोगों पर लाठियां चलाईं।
अजय राय ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर राजनीतिक पक्षधरता के आरोप भी लगाए। ये उनके राजनीतिक बयान और आरोप हैं; इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।
तौकीर रजा के परिवार से मिलने पहुंचे अजय राय
अजय राय बुधवार रात बरेली के सौदागरान इलाके में स्थित मौलाना तौकीर रजा के आवास पहुंचे। उन्होंने तौकीर रजा के बेटे फरमान रजा से मुलाकात की और जेल में बंद मौलाना के स्वास्थ्य तथा उनकी कानूनी स्थिति के बारे में जानकारी ली।
अजय राय ने परिवार को भरोसा दिलाया कि कांग्रेस इस मामले में उनके साथ है और जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, अजय राय का यह दौरा पहले से सार्वजनिक कार्यक्रम के तौर पर घोषित नहीं था। उनके अचानक तौकीर रजा के घर पहुंचने के बाद स्थानीय पुलिस और खुफिया तंत्र भी सक्रिय हुआ। पुलिस अधिकारियों ने इसे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का निजी दौरा बताया।
‘बरेली में दंगा हुआ ही नहीं’, अजय राय का दावा
मीडिया से बातचीत में अजय राय ने 26 सितंबर 2025 को हुए बरेली बवाल की घटना और उसके बाद हुई कार्रवाई पर सवाल उठाए।
उन्होंने दावा किया कि बरेली में दंगा नहीं हुआ था और सरकार के इशारे पर अधिकारियों ने लोगों पर लाठियां चलाईं। उन्होंने पुलिस-प्रशासन पर भाजपा के एजेंट के तौर पर काम करने का आरोप भी लगाया।
अजय राय ने बरेली की सामाजिक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह गंगा-जमुनी तहजीब वाला शहर है और यहां अलग-अलग समुदायों के लोग एक-दूसरे का सहयोग करते हैं।
पिछले साल 26 सितंबर को हुआ था बवाल
बरेली में 26 सितंबर 2025 को हिंसा और पथराव की घटना हुई थी। मामले में पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए और जांच के दौरान बड़ी संख्या में आरोपियों के नाम सामने आए।
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में मौलाना तौकीर रजा समेत कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई है। सितंबर 2026 में भी पुलिस ने दो और आरोपियों रफीक बेग और मुख्तियार अहमद को गिरफ्तार किया था। पुलिस का दावा है कि दोनों 19 सितंबर 2025 को हुई एक बैठक में शामिल हुए थे और घटना वाले दिन भीड़ के साथ गए थे।
मामले में कोर्ट की कार्यवाही भी आगे बढ़ चुकी है
बरेली बवाल मामले में न्यायिक प्रक्रिया भी चल रही है। जुलाई 2026 में अदालत ने मौलाना तौकीर रजा समेत 15 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमे का सामना करने की बात कही थी।
जून 2026 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में अभियोजन पक्ष की ओर से 26 सितंबर 2025 की घटना को लेकर गंभीर आरोपों का उल्लेख है। वहीं बचाव पक्ष ने आरोपों को राजनीतिक दबाव में लगाए जाने का दावा किया था। यानी मामले में दोनों पक्षों की दलीलें अदालत के सामने मौजूद हैं।
तौकीर रजा की जमानत याचिका भी खारिज
सितंबर 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली हिंसा मामले में मौलाना तौकीर रजा की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत के आदेश से संबंधित रिपोर्टों में अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों का उल्लेख किया गया है।
इससे साफ है कि मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और अजय राय द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोपों तथा पुलिस/अभियोजन के दावों को अदालत की अंतिम सुनवाई और निर्णय से अलग समझना जरूरी है।
अजय राय बोले- कानूनी मदद करेगी कांग्रेस
अजय राय ने तौकीर रजा के परिवार से कहा कि कांग्रेस इस मुश्किल समय में उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कानूनी स्तर पर हरसंभव मदद का भरोसा दिया।
उनके बयान के बाद बरेली की 2025 की घटना को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है। एक तरफ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि पुलिस और अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में आरोपियों की भूमिका को लेकर जांच और कानूनी कार्रवाई जारी है।