वाराणसी: इस बार दीपावली को लेकर देशभर में तारीख के विवाद की स्थिति नहीं बन रही है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, तीन साल बाद ऐसा मौका आया है जब ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति और पंचांगों की गणना के कारण दीपावली की तिथि को लेकर उत्तर से दक्षिण तक एकरूपता दिखाई दे रही है।
काशी में पिछले कुछ वर्षों से अलग-अलग पंचांगों में तिथि को लेकर होने वाले मतभेद को दूर करने की दिशा में भी काम किया गया। काशी विद्वत परिषद और बीएचयू के ज्योतिष विभाग से जुड़े विद्वानों ने देशभर के 100 से अधिक पंचांगों का अध्ययन किया और पंचांगों में एकरूपता लाने के लिए प्रयास किए।
इस बार क्यों नहीं है दिवाली की तारीख को लेकर भ्रम?
पिछले कुछ वर्षों में अमावस्या के सूर्यास्त के आसपास शुरू होने और अगले दिन तक रहने के कारण दीपावली की तारीख को लेकर अलग-अलग मत सामने आते रहे थे। इसी वजह से कई स्थानों पर पर्व की तारीख को लेकर भ्रम की स्थिति बनती थी।
इस बार ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति ऐसी है कि अमावस्या एक ही दिन पड़ रही है। काशी के ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इसी वजह से दीपावली की तिथि को लेकर पहले जैसी स्थिति नहीं बनी है।
8 नवंबर को मनाई जाएगी दिवाली
रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष दीपावली 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। अमावस्या 8 नवंबर की सुबह करीब 10:50 बजे शुरू होने की जानकारी दी गई है।
श्री काशी विश्वनाथ न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय के अनुसार, सुबह 10:50 बजे से दीपावली का मुहूर्त शुरू होगा। इससे पहले चतुर्दशी तिथि में हनुमान जयंती मनाई जाएगी।
रात तक रहेगा दीपावली का मुहूर्त
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 8 नवंबर को सुबह 10:50 बजे से रात 12 बजे तक दीपावली मनाने के लिए लगभग 13 घंटे 10 मिनट का समय उपलब्ध रहेगा।
हालांकि, लक्ष्मी-गणेश और कुबेर पूजन के लिए प्रदोष काल को विशेष महत्व दिया गया है। सूर्यास्त के बाद लगभग 2 घंटे 24 मिनट का प्रदोष काल बताया गया है। इसी अवधि में दीप जलाने और लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व रहेगा।
एक ही दिन होगी लक्ष्मी, गणेश और कुबेर पूजा
काशी के विद्वानों के अनुसार, इस बार लक्ष्मी, गणेश और कुबेर की पूजा एक ही दिन की जाएगी। अमावस्या की स्थिति भी उसी दिन रहने के कारण पर्व की तिथि को लेकर अलग-अलग दिन मनाने की स्थिति नहीं बनेगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, इसी रात पितरों से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों की परंपरा का भी उल्लेख किया गया है।
तीन साल से चल रहा था पंचांगों में एकरूपता का प्रयास
दिवाली की तिथि को लेकर एकरूपता लाने के लिए पिछले तीन वर्षों में काशी विद्वत परिषद और बीएचयू के ज्योतिष विभाग से जुड़े विशेषज्ञों ने देश के अलग-अलग पंचांगों का अध्ययन किया।
रिपोर्ट के अनुसार, देशभर के 100 से अधिक पंचांगों का अध्ययन किया गया और अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन के माध्यम से भी इस विषय पर चर्चा हुई। इसके बाद 2026-27 के पंचांगों में तिथियों को लेकर एकरूपता लाने की कोशिश की गई।
काशी से निकली एक तिथि, एक पर्व की पहल
पंचांगों में एकरूपता की इस पहल का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में पर्वों की तारीख को लेकर पैदा होने वाले भ्रम को कम करना है। काशी को लंबे समय से धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
बीएचयू के ज्योतिष विभाग से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, सही गणना और आकलन के आधार पर तिथि निर्धारण किया जाए तो भ्रम की स्थिति कम हो सकती है। इस साल ग्रह-नक्षत्रों की प्राकृतिक स्थिति भी ऐसी है कि दिवाली की तारीख को लेकर विवाद की संभावना नहीं बनी।
दिवाली से पहले हनुमान जयंती
इस बार 8 नवंबर को सुबह 10:50 बजे से अमावस्या शुरू होने की जानकारी दी गई है। इसलिए उससे पहले चतुर्दशी तिथि में हनुमान जयंती मनाई जाएगी।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सुबह 10:50 बजे के बाद हनुमान जयंती मनाने की तिथि नहीं रहेगी और इसके बाद दीपावली से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों का समय शुरू हो जाएगा।
इस बार तारीख को लेकर नहीं होगी दोहरी स्थिति
पिछले तीन वर्षों की तुलना में इस बार दीपावली की तिथि को लेकर स्थिति ज्यादा स्पष्ट बताई जा रही है। काशी से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में पंचांगों की गणना में एकरूपता आने और अमावस्या की स्पष्ट स्थिति के कारण एक ही दिन दीपावली मनाने की बात सामने आई है।
इससे श्रद्धालुओं, मंदिरों और धार्मिक आयोजनों से जुड़े लोगों को पर्व की तैयारी में भी स्पष्टता मिलेगी।