लखनऊ: इस साल मानसून को लेकर शुरुआत से ही कई तरह की आशंकाएं जताई जा रही थीं। खासकर अल नीनो (El Nino) की स्थिति बनने के कारण भारत में कमजोर मानसून की चिंता बढ़ गई थी। लेकिन अब तक के बारिश के आंकड़े इन आशंकाओं से अलग तस्वीर दिखा रहे हैं। उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में मानसून ने अच्छी बारिश कराई है।
उत्तर प्रदेश में तो सितंबर के पहले सप्ताह तक मानसून की कुल बारिश औसत से ऊपर पहुंच गई थी। क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 7 सितंबर तक प्रदेश में सामान्य से करीब 1 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई।
अल नीनो को लेकर क्यों बढ़ी थी चिंता?
प्रशांत महासागर के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी के कारण इस साल अल नीनो को लेकर चिंता बढ़ी। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, नीनो 3.4 क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंचा और समुद्र के भीतर कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य से 8 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा ऊपर दर्ज किया गया।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन के मुताबिक अल नीनो के आने वाले महीनों में मजबूत होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत के हर हिस्से में बारिश अनिवार्य रूप से कम ही होगी। बारिश की मात्रा के साथ-साथ उसका समय, वितरण और तीव्रता भी महत्वपूर्ण होती है।
कमजोर मानसून की आशंका के बावजूद यूपी में अच्छी बारिश
मानसून की शुरुआत में मौसम विशेषज्ञों और पूर्वानुमानों में कमजोर बारिश की संभावना को लेकर चर्चा थी। IMD के अप्रैल के पूर्वानुमान में 2026 के पूरे मानसून सीजन में देश के स्तर पर सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई गई थी और उस समय अल नीनो के विकसित होने का अनुमान भी लगाया गया था।
लेकिन मौसम का वास्तविक रुझान कई जगह अलग दिखाई दिया। उत्तर प्रदेश में सितंबर के पहले सप्ताह तक मानसून सीजन की कुल बारिश औसत आंकड़े को पार कर चुकी थी। पश्चिमी यूपी और तराई इलाकों में हुई भारी बारिश ने प्रदेश के कुल आंकड़े को भी काफी प्रभावित किया।
कई जिलों में रिकॉर्ड बारिश
सितंबर के पहले सप्ताह में उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में इतनी तेज बारिश हुई कि पुराने रिकॉर्ड भी टूट गए। रिपोर्ट के मुताबिक, बरेली में 381.1 मिमी और शाहजहांपुर में 227 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो वहां के लिए रिकॉर्ड स्तर की बारिश रही।
इसके अलावा बहराइच में 175 मिमी, लखीमपुर खीरी में 156 मिमी और एटा में 135 मिमी बारिश दर्ज की गई। इससे साफ हुआ कि मानसून की गतिविधियां कई क्षेत्रों में काफी मजबूत बनी हुई हैं।
फिर भी हर जिले में एक जैसी बारिश नहीं
हालांकि प्रदेश का औसत आंकड़ा सामान्य से ऊपर पहुंच गया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर जिले में पर्याप्त बारिश हुई है।
इससे पहले सितंबर के शुरुआती दिनों में प्रदेश के 28 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई थी। इनमें कुछ जिलों में बारिश की कमी 60 से 90 फीसदी तक बताई गई थी, जबकि 20 अन्य जिलों में 20 से 59 फीसदी तक कम बारिश दर्ज हुई थी।
यानी एक तरफ कुछ इलाकों में भारी बारिश और जलभराव की स्थिति बनी, तो दूसरी तरफ कुछ जिलों में किसान अभी भी पर्याप्त बारिश का इंतजार करते रहे।
अल नीनो का असर सीधा और एक जैसा नहीं
अल नीनो को अक्सर भारत में कमजोर मानसून से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसका प्रभाव हर साल और हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं होता। बारिश के पैटर्न में बदलाव, भारी बारिश की घटनाओं और सूखे दौर की अवधि पर भी इसका असर पड़ सकता है।
इसी वजह से केवल अल नीनो की मौजूदगी के आधार पर पूरे मानसून सीजन को कमजोर मानना सही तस्वीर नहीं देता। इस साल भी शुरुआती आशंकाओं के बावजूद कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश देखने को मिली है।
सितंबर की बारिश अभी भी महत्वपूर्ण
सितंबर मानसून के अंतिम चरण का महत्वपूर्ण महीना है। जिन इलाकों में अभी तक बारिश की कमी बनी हुई है, वहां सितंबर की बारिश से काफी हद तक इसकी भरपाई हो सकती है।
वहीं दूसरी तरफ जहां पहले ही भारी बारिश हो चुकी है, वहां लगातार बारिश से जलभराव, फसलों को नुकसान और नदियों के जलस्तर बढ़ने जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के ताजा बुलेटिन में भी सितंबर के दौरान कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावनाएं बताई गई हैं।
क्या अल नीनो की चिंता खत्म हो गई?
ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी। अल नीनो की स्थिति आने वाले महीनों में भी मौसम और बारिश के पैटर्न को प्रभावित कर सकती है। इसलिए विशेषज्ञों की नजर प्रशांत महासागर के तापमान, समुद्री परिस्थितियों और भारतीय मानसून के बचे हुए दौर पर बनी रहेगी।
फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि कमजोर मानसून की शुरुआती आशंकाओं के बावजूद 2026 का मानसून कई क्षेत्रों में उम्मीद से बेहतर बारिश लेकर आया है। उत्तर प्रदेश इसका एक प्रमुख उदाहरण है, जहां सितंबर की शुरुआत तक कुल बारिश सामान्य से ऊपर पहुंच चुकी थी।