आगरा: महात्मा गांधी की आगरा यात्रा से जुड़ा ऐतिहासिक गांधी स्मारक अब नए स्वरूप में नजर आएगा। एत्माद्दौला स्मारक के पास स्थित बृजमोहन दास की बगीची, जहां महात्मा गांधी वर्ष 1929 में करीब 11 दिन ठहरे थे, लंबे समय से जर्जर स्थिति में है। अब राज्य पुरातत्व विभाग ने इसके संरक्षण की तैयारी शुरू कर दी है। स्मारक को उसके मूल स्वरूप में लाने के लिए करीब 1.48 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
1929 में 11 दिन आगरा में रुके थे महात्मा गांधी
महात्मा गांधी वर्ष 1929 में आगरा आए थे। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने 11 से 21 सितंबर 1929 तक बृजमोहन दास मेहरा की बगीची में करीब 11 दिन प्रवास किया था। यही स्थान अब गांधी स्मारक के नाम से जाना जाता है।
बताया गया है कि गांधीजी यहां पेट दर्द की समस्या के दौरान स्वास्थ्य लाभ के लिए आए थे। बगीची में मौजूद कुएं के पानी के बारे में उस समय मान्यता थी कि वह पेट की समस्या में राहत देता है। गांधीजी के इस प्रवास के कारण यह स्थान उनके साथ ऐतिहासिक रूप से जुड़ गया।
करीब 200 साल पुरानी इमारत अब जर्जर
गांधी स्मारक की इमारत करीब 200 साल से अधिक पुरानी बताई गई है। समय के साथ इसकी स्थिति खराब होती गई। रिपोर्ट के अनुसार इमारत में बाद में टाइल्स और रेत से प्लास्टर जैसे बदलाव किए गए, जिससे इसका मूल स्वरूप प्रभावित हुआ।
राज्य पुरातत्व विभाग ने पिछले वर्ष 25 अप्रैल को स्मारक को संरक्षित करने की अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद इसे ऐतिहासिक मूल स्वरूप में वापस लाने की योजना तैयार की गई।
1.48 करोड़ रुपये से होगा संरक्षण
गांधी स्मारक के संरक्षण के लिए करीब 1.48 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इसके लिए टेंडर जारी किया जा रहा है और अगले महीने से संरक्षण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
राज्य पुरातत्व विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी ज्ञानेंद्र रस्तोगी के अनुसार स्मारक को पूरी तरह उसके मूल स्वरूप में लाने की योजना है। इसके आसपास बगीचा भी विकसित किया जाएगा, जिससे पूरे परिसर को बेहतर ऐतिहासिक और दर्शनीय रूप दिया जा सके।
1948 में गांधी स्मारक ट्रस्ट को दी गई थी बगीची
महात्मा गांधी के निधन के बाद वर्ष 1948 में बृजमोहन दास मेहरा ने अपने पिता राम कृष्ण दास मेहरा की स्मृति में इस बगीची को महात्मा गांधी स्मारक ट्रस्ट को दान कर दिया था।
इसके बाद इसकी देखरेख नगर महापालिका के पास रही। बाद में राज्य पुरातत्व विभाग ने संरक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई और इसे ऐतिहासिक स्वरूप में सुरक्षित करने की योजना बनाई।
आगरा से गांधीजी की कई ऐतिहासिक यादें जुड़ी हैं
महात्मा गांधी केवल 1929 में ही आगरा नहीं आए थे। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने 1918 से 1944 के बीच पांच बार आगरा का दौरा किया। उनकी आगरा यात्राएं 1918, 1919, 1920, 1929 और 1944 में हुई थीं।
उनकी यात्राओं के दौरान बड़ी संख्या में लोग उन्हें देखने और सुनने के लिए जुटते थे। वर्ष 1929 में आगरा प्रवास के दौरान गांधीजी ने तत्कालीन हीवेट पार्क, जिसे अब पालीवाल पार्क कहा जाता है, में लोगों को संबोधित किया था।
‘आकाश से नहीं टपकेगा स्वराज्य’ का दिया था संदेश
गांधीजी की 1929 की आगरा यात्रा से जुड़ा उनका एक महत्वपूर्ण संदेश भी सामने आता है। 11 सितंबर 1929 को तत्कालीन हीवेट पार्क में उन्होंने असहयोग आंदोलन की शक्ति में अपने विश्वास की बात कही थी।
उन्होंने लोगों से आने वाले समय के लिए तैयारी करने और अहिंसात्मक उपायों के जरिए स्वराज्य के लिए प्रयास करने का आह्वान किया था। उनका संदेश था कि केवल घोषणा कर देने से स्वराज्य अपने आप नहीं मिलेगा, इसके लिए सक्रिय प्रयास जरूरी हैं।
कस्तूरबा गांधी समेत ये लोग भी रहे थे साथ
1929 के आगरा प्रवास के दौरान गांधीजी के साथ कस्तूरबा गांधी, आचार्य कृपलानी, मीरा बहन और प्रभावती भी बगीची में रुके थे। इस कारण यह स्थान स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास और गांधीजी के व्यक्तिगत जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है।
संरक्षण के बाद बदलेगा स्मारक का स्वरूप
संरक्षण कार्य पूरा होने के बाद गांधी स्मारक को उसके मूल ऐतिहासिक स्वरूप के करीब लाने की योजना है। इमारत में किए गए बाद के बदलावों को हटाकर संरक्षण किया जाएगा। इसके अलावा परिसर के चारों ओर बगीचा विकसित करने की भी योजना है।
इससे आगरा आने वाले लोगों को गांधीजी के ऐतिहासिक प्रवास से जुड़े इस स्थान को बेहतर तरीके से देखने और समझने का अवसर मिल सकता है।