लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर चल रही सियासी अटकलों के बीच राष्ट्रीय लोकदल (RLD) अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी का नाम भाजपा की घोषित सूची में नहीं आया है। इसके साथ ही उन्हें एनडीए कोटे से दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की चर्चाओं पर फिलहाल विराम लग गया है। भाजपा ने उत्तर प्रदेश की आठ राज्यसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं।
6 अक्तूबर को खत्म हुई नामांकन प्रक्रिया
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्तूबर 2026 थी। इसी के साथ भाजपा की ओर से आठ उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद जयंत चौधरी को राज्यसभा भेजे जाने की संभावना पर चल रही चर्चाएं कमजोर पड़ गईं।
भाजपा ने यूपी से धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया है।
जयंत के नाम की क्यों थी चर्चा?
दरअसल, पिछले कुछ समय से राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि भाजपा के सहयोग से जयंत चौधरी को दोबारा राज्यसभा भेजा जा सकता है। इसका एक कारण यह भी माना जा रहा था कि जयंत की मौजूदा राज्यसभा सदस्यता जुलाई 2028 तक है, लेकिन उन्हें एनडीए के कोटे से नए सिरे से उच्च सदन में भेजे जाने को लेकर अटकलें थीं।
2 अक्तूबर की अमर उजाला की रिपोर्ट में भी रालोद नेताओं के हवाले से बताया गया था कि जयंत को एनडीए कोटे से राज्यसभा भेजे जाने पर विचार चल रहा था। हालांकि उस समय भी अंतिम निर्णय नहीं हुआ था।
2022 में सपा के समर्थन से पहुंचे थे राज्यसभा
जयंत चौधरी जुलाई 2022 में सपा-रालोद गठबंधन के संयुक्त उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा पहुंचे थे। उस समय उत्तर प्रदेश विधानसभा में रालोद के आठ विधायक थे और एक राज्यसभा उम्मीदवार को जीत के लिए 34 वोट की जरूरत थी।
सपा, रालोद और सहयोगी दलों के समर्थन से जयंत को राज्यसभा भेजा गया था। बाद में खतौली उपचुनाव में रालोद की जीत के बाद पार्टी के विधायकों की संख्या बढ़कर नौ हो गई थी।
2024 में बदला राजनीतिक गठबंधन
2024 के लोकसभा चुनाव से पहले रालोद ने सपा से अलग होकर एनडीए का साथ दिया। इसके बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हुई कि जयंत को राज्यसभा भेजने में सपा के समर्थन के बाद अब भाजपा के सहयोग की संभावना बन सकती है।
हालांकि, भाजपा की मौजूदा सूची में जयंत का नाम नहीं है। इसका अर्थ यह नहीं है कि उनकी वर्तमान राज्यसभा सदस्यता समाप्त हो गई है। उनकी मौजूदा सदस्यता जुलाई 2028 तक है।
सपा-जयंत रिश्ते भी रहे चर्चा में
जयंत चौधरी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच पिछले कुछ समय में राजनीतिक बयानबाजी भी चर्चा में रही है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए जयंत के संदर्भ में टिप्पणी की थी, जिस पर जयंत चौधरी ने प्रतिक्रिया दी थी और इसे जाट समाज के सम्मान से जोड़कर जवाब दिया था।
इस बीच, राज्यसभा चुनाव की मौजूदा स्थिति में सपा और एनडीए के बीच संख्या को लेकर भी मुकाबले की चर्चा है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यूपी की 10 राज्यसभा सीटों में भाजपा के पास सात सीटें जीतने के लिए पर्याप्त संख्या है, जबकि आठवीं सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।