लखनऊ: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर निर्माण गुणवत्ता को लेकर सामने आई शिकायतों के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बड़ा कदम उठाया है। एक्सप्रेसवे से जुड़ी कंपनी PNC इंफ्राटेक को NHAI ने तीन साल के लिए अपनी परियोजनाओं की नई निविदाओं में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया है। NHAI ने कंपनी को ‘नॉन-परफॉर्मर’ घोषित करते हुए मामले की तकनीकी जांच के लिए एक कमेटी भी बनाई है।
उद्घाटन के कुछ ही समय बाद सामने आईं खामियां
करीब 63 किलोमीटर लंबे छह लेन वाले लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन जुलाई 2026 में हुआ था। इसके कुछ ही सप्ताह बाद सड़क के एक हिस्से में स्लिपेज और धंसने की समस्या सामने आई। 26 जुलाई को करीब 300 मीटर हिस्से में सड़क के खिसकने की घटना के बाद यातायात को डायवर्ट किया गया और टोल वसूली पर भी रोक लगाई गई।
इसके अलावा एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों में सड़क की ऊपरी सतह खराब होने, दरारें आने और सड़क के नीचे की मिट्टी के खिसकने जैसी समस्याओं की शिकायतें भी सामने आई थीं। इन घटनाओं के बाद एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठे।
NHAI ने बनाई टेक्निकल कमेटी
मामले की गंभीरता को देखते हुए NHAI ने एक्सप्रेसवे की तकनीकी जांच के लिए कमेटी गठित की है। जांच में निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, डिजाइन, इंजीनियरिंग, जियो-टेक्निकल जांच और निर्माण की गुणवत्ता जैसे पहलुओं को देखा जा रहा है। IIT खड़गपुर की टीम ने भी प्रभावित हिस्सों से नमूने लिए हैं और विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार है।
प्रारंभिक तकनीकी आकलन में प्रभावित हिस्सों के कुछ क्षेत्रों के पूरी तरह पुनर्निर्माण की जरूरत बताई गई थी। हालांकि अंतिम तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद ही निर्माण में खामी के वास्तविक कारणों पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
अधिकारियों पर भी हुई कार्रवाई
NHAI ने मामले में केवल कंपनी पर ही कार्रवाई नहीं की है। रिपोर्ट के अनुसार PNC के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक गुप्ता, रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार और इंडिपेंडेंट इंजीनियर्स टीम के लीडर सुरेंद्र कुमार को उनके पदों से हटा दिया गया है। इन अधिकारियों पर NHAI, MoRTH और NHIDCL की परियोजनाओं में दो साल तक काम करने पर भी रोक लगाई गई है।
इसके अलावा प्रोजेक्ट डायरेक्टर नकुल प्रकाश वर्मा को भी पद से हटाया गया और पूर्व प्रोजेक्ट डायरेक्टर सौरभ चौरसिया को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
तीन साल तक नए प्रोजेक्ट की बोली नहीं लगा सकेगी कंपनी
NHAI के फैसले के तहत PNC इंफ्राटेक को अगले तीन वर्षों तक NHAI, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और उनसे जुड़ी कार्यान्वयन एजेंसियों की नई परियोजनाओं के लिए बोली लगाने से रोक दिया गया है। यह प्रतिबंध कंपनी के मौजूदा प्रोजेक्ट्स के संचालन और रखरखाव पर लागू नहीं होने की जानकारी दी गई है।
कंपनी की ओर से इस कार्रवाई के खिलाफ उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार करने की बात भी सामने आई है।
मरम्मत का खर्च कंपनी को उठाना होगा
NHAI ने प्रभावित हिस्सों की मरम्मत और सुधार का काम कंपनी को अपने खर्च पर करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट के अनुसार शुरुआती तौर पर चिन्हित प्रभावित कार्यों की लागत करीब 3 करोड़ रुपये आंकी गई है। टोल वसूली बंद रहने के कारण NHAI को हुए राजस्व नुकसान की भरपाई भी कंपनी से कराने की व्यवस्था बताई गई है।
हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है मामला
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की स्थिति को लेकर मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच तक भी पहुंच चुका है। अदालत ने इस मामले में केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है।
फिलहाल NHAI की तकनीकी जांच और IIT खड़गपुर की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है। इन रिपोर्टों से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि एक्सप्रेसवे के प्रभावित हिस्सों में निर्माण संबंधी समस्या की मुख्य वजह क्या रही और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।