सरयू तट पर सन्नाटा था। शब्दभेदी बाण लगने के बाद भी श्रवण कुमार को अपनी नहीं, अंधे माता-पिता की चिंता थी। यह दृश्य देखकर रामलीला प्रांगण में खामोशी छा गई और दर्शकों की आंखें भर आईं।
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सरयू तट पर सन्नाटा था। शब्दभेदी बाण लगने के बाद भी श्रवण कुमार को अपनी नहीं, अंधे माता-पिता की चिंता थी। यह दृश्य देखकर रामलीला प्रांगण में खामोशी छा गई और दर्शकों की आंखें भर आईं।
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