लखनऊ/गोरखपुर: नेपाल के पहाड़ी इलाकों और उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते कई नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। बड़ी गंडक, राप्ती, रोहिन, चंदन और अन्य नदियों में पानी बढ़ने से पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अचानक बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी है।
कई जिलों में अचानक बाढ़ का खतरा
लगातार बारिश के कारण गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर और महराजगंज के कई निचले और जलभराव वाले क्षेत्रों में अचानक बाढ़ की आशंका जताई गई है।
जिला प्रशासन ने लोगों से उफनती नदियों, नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की अपील की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
गंडक नदी का बढ़ा डिस्चार्ज
नेपाल के जल अधिग्रहण क्षेत्र में लगातार बारिश का सीधा असर बड़ी गंडक नदी पर दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से नदी का डिस्चार्ज तेजी से बढ़ा।
शुक्रवार दोपहर डिस्चार्ज करीब 79 हजार क्यूसेक दर्ज किया गया था, जो शाम तक बढ़कर 1 लाख 21 हजार 500 क्यूसेक हो गया। बाद में बाढ़ नियंत्रण कक्ष की रिपोर्ट में यह 1.29 लाख क्यूसेक तक पहुंचने की जानकारी दी गई।
इससे कुशीनगर के रेता क्षेत्र और नदी के आसपास रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई। छितौनी तटबंध के आसपास भी नदी के बढ़ते दबाव और कटान को लेकर निगरानी बढ़ाई गई।
महराजगंज में राप्ती और रोहिन का जलस्तर बढ़ा
महराजगंज जिले में भी लगातार बारिश के कारण नदियों के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई। धानी क्षेत्र में रिगौली बांध पर राप्ती नदी का जलस्तर 76.85 मीटर पहुंच गया।
वहीं सदर क्षेत्र के त्रिमुहानी घाट पर रोहिन नदी का जलस्तर 78.48 मीटर और ठूठीबारी क्षेत्र में चंदन नदी का जलस्तर 99.65 मीटर दर्ज किया गया। प्रशासन के अनुसार नेपाल सीमा से लगे तटबंध उस समय सुरक्षित थे, लेकिन स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही थी।
महाव नाला खतरे के निशान से ऊपर
महराजगंज में महाव नाले का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा। रिपोर्ट के मुताबिक इसका जलस्तर 9 फीट 6 इंच तक पहुंच गया, जबकि खतरे का निशान 5 फीट बताया गया है।
प्यास नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान के करीब पहुंच गया था। ऐसे में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए बाढ़ का खतरा और बढ़ गया।
तटबंधों पर बढ़ा दबाव
नेपाल के पहाड़ी इलाकों में बारिश बढ़ने के साथ बड़ी गंडक नदी में पानी का दबाव बढ़ गया। कुशीनगर में छितौनी तटबंध के संवेदनशील हिस्सों पर अधिकारियों की नजर बनी हुई है।
तटबंध के कुछ हिस्सों में कटान का खतरा भी बताया गया। बाढ़ खंड की टीमों ने संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया।
बारिश से किसानों की बढ़ी चिंता
लगातार बारिश से जहां कुछ किसानों को सूख रही फसलों के लिए राहत मिली, वहीं तेज हवा और जलभराव ने कई इलाकों में फसलों को नुकसान पहुंचाया।
कुशीनगर में तेज हवा के कारण कुछ क्षेत्रों में धान और गन्ने की खड़ी फसल गिर गई। निचले इलाकों में पानी भरने से धान की फसल प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई। नदी पार क्षेत्रों में केले की खेती पर भी मौसम का असर पड़ा।
प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की
बाढ़ के संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से नदियों और तेज बहाव वाले पानी से दूर रहने की अपील की है। विशेष रूप से निचले इलाकों और कमजोर मकानों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन का फोकस तटबंधों की निगरानी, नदी के जलस्तर और बैराज से पानी के डिस्चार्ज पर बना हुआ है।