अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की आंतरिक व्यवस्था को और अधिक अनुशासित, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की तैयारी है। मंदिर ट्रस्ट ने कर्मचारियों की निगरानी और प्रबंधन व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने की योजना बनाई है। इसके तहत कर्मचारियों की डिजिटल प्रोफाइल यानी डिजिटल कुंडली तैयार की जाएगी और उनकी ड्यूटी, तैनाती तथा जिम्मेदारियों का रिकॉर्ड सॉफ्टवेयर में रखा जाएगा।
यह बदलाव ऐसे समय में किया जा रहा है जब मंदिर की आंतरिक सुरक्षा और चढ़ावे से जुड़े मामले के बाद प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। सितंबर 2026 में सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया था। उन्होंने 21 सितंबर को कार्यभार संभाला था।
कर्मचारियों की बनेगी डिजिटल कुंडली
नई व्यवस्था के तहत मंदिर ट्रस्ट के प्रत्येक कर्मचारी का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की योजना है। इसमें कर्मचारी की नियुक्ति, पद, ड्यूटी, तैनाती, उपस्थिति और जिम्मेदारी जैसी जानकारियां दर्ज होंगी।
इस डिजिटल सिस्टम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी कर्मचारी के बारे में जरूरत पड़ने पर उसकी वर्तमान तैनाती और जिम्मेदारी की जानकारी तुरंत उपलब्ध हो सके। इससे मैनुअल रिकॉर्ड पर निर्भरता कम करने और जवाबदेही तय करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सिर्फ हाजिरी नहीं, ड्यूटी की भी होगी निगरानी
नई व्यवस्था में केवल कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने पर जोर नहीं होगा। उनकी ड्यूटी और तैनाती पर भी नजर रखी जाएगी।
अधिकारियों के पास यह जानकारी उपलब्ध रहने की योजना है कि कौन कर्मचारी किस स्थान पर तैनात है, उसे कौन सी जिम्मेदारी दी गई है और वह निर्धारित स्थान पर अपनी ड्यूटी कर रहा है या नहीं। इसके लिए सॉफ्टवेयर आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित की जा रही है।
100 फीसदी पुलिस वेरिफिकेशन पर जोर
मंदिर प्रशासन ने कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की जांच को भी सख्त करने का फैसला किया है। रिपोर्टों के अनुसार, मंदिर में काम करने वाले कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन और कैरेक्टर सर्टिफिकेट अनिवार्य किया जा रहा है।
इसके अलावा कर्मचारियों से उनके परिवार और रिश्तेदारों से जुड़ी जानकारी भी लिए जाने की व्यवस्था बताई गई है। बिना सत्यापन के किसी कर्मचारी को मंदिर सेवा में नहीं रखने की योजना है।
मंदिर परिसर में बढ़ेंगे CCTV कैमरे
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए मंदिर परिसर में निगरानी का दायरा बढ़ाने की तैयारी है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 40 नए स्थानों पर CCTV कैमरे लगाने की तैयारी की जा रही है।
प्रवेश और निकास के दौरान भी वीडियो निगरानी तथा तलाशी व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य मंदिर परिसर में आने-जाने वाली गतिविधियों पर बेहतर निगरानी रखना है।
फेस रीडिंग से होगी हाजिरी
कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने के तरीके में भी तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, फेस रीडिंग तकनीक के जरिए हाजिरी दर्ज करने की व्यवस्था लागू करने की तैयारी है।
मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात निजी सुरक्षा कर्मियों के लिए भी ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध की व्यवस्था बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर परिसर में लगभग 450 निजी सुरक्षा कर्मियों की तैनाती है।
कर्मचारियों के लिए बदला ड्रेस कोड
नई व्यवस्था में कर्मचारियों के ड्रेस कोड पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाली ड्रेस निर्धारित की गई है।
अलग-अलग श्रेणी के कर्मचारियों के लिए अलग रंग की वर्दी तय की गई है। एसबीआई कर्मचारियों के लिए आसमानी शर्ट और काली पैंट, एजेंसी स्टाफ के लिए भगवा शर्ट और काली पैंट तथा ट्रस्ट कर्मचारियों के लिए सफेद शर्ट और काली पैंट की व्यवस्था बताई गई है।
वहीं पुजारी, भंडारी और कोठारी के लिए पीतांबरी रेशमी धोती का ड्रेस कोड बताया गया है।
चढ़ावे की नकदी गिनने की व्यवस्था भी बदली
मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी नकदी की गिनती को लेकर भी नई व्यवस्था की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, अब नकदी की गिनती सिर्फ SBI की टीम करेगी और यह काम दो शिफ्ट में किया जाएगा।
इसके अलावा गिनती की प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली टेबल-कुर्सियों को हटाकर जमीन पर बैठकर नकदी गिनने की व्यवस्था किए जाने की बात कही गई है।
CEO जितेंद्र मिश्र के आने के बाद प्रशासनिक बदलाव
सितंबर में सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला CEO नियुक्त किया गया था। उनकी नियुक्ति के साथ मंदिर की रोजमर्रा की व्यवस्थाओं के संचालन में एक अधिक केंद्रीकृत प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा में बदलाव हुआ है।
जितेंद्र मिश्र ने 21 सितंबर को कार्यभार संभाला। इसके बाद मंदिर की सुरक्षा, कर्मचारी प्रबंधन, निगरानी, ड्यूटी व्यवस्था और तकनीकी सिस्टम को लेकर कई बदलावों पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है।
क्यों बढ़ाई जा रही है निगरानी?
मंदिर ट्रस्ट की नई व्यवस्था का मुख्य जोर सुरक्षा, जवाबदेही और रिकॉर्ड प्रबंधन पर दिखाई देता है। कर्मचारियों की पहचान, तैनाती और जिम्मेदारी से जुड़ा डेटा डिजिटल रूप में उपलब्ध होने से प्रशासन के लिए किसी भी समय जानकारी हासिल करना आसान हो सकता है।
साथ ही, पुलिस सत्यापन, CCTV, फेस रीडिंग, तलाशी और ड्यूटी मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाओं को एक साथ लागू करने का उद्देश्य मंदिर परिसर की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करना है।
राम मंदिर में अब कैसी होगी नई व्यवस्था?
नई व्यवस्था के प्रमुख बिंदुओं को इस तरह समझा जा सकता है:
- कर्मचारियों का डिजिटल प्रोफाइल तैयार करने की योजना
- नियुक्ति और पद से जुड़ा डिजिटल रिकॉर्ड
- ड्यूटी और तैनाती की सॉफ्टवेयर से निगरानी
- 100 फीसदी पुलिस वेरिफिकेशन पर जोर
- कैरेक्टर सर्टिफिकेट की व्यवस्था
- परिवार और रिश्तेदारों की जानकारी का रिकॉर्ड
- नए स्थानों पर CCTV लगाने की तैयारी
- फेस रीडिंग से कर्मचारियों की हाजिरी
- निजी सुरक्षा कर्मियों के मोबाइल इस्तेमाल पर प्रतिबंध
- प्रवेश और निकास पर निगरानी और तलाशी
- कर्मचारियों के लिए निर्धारित ड्रेस कोड
- चढ़ावे की नकदी गिनने की प्रक्रिया में बदलाव
आगे क्या बदलेगा?
राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने और मंदिर की व्यवस्थाओं के विस्तार के साथ प्रशासन के सामने सुरक्षा और संचालन से जुड़ी जिम्मेदारियां भी बढ़ रही हैं। नई व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल के जरिए कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने और मंदिर परिसर की गतिविधियों पर बेहतर नियंत्रण की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, डिजिटल निगरानी और कर्मचारियों के व्यक्तिगत विवरण के इस्तेमाल के साथ डेटा सुरक्षा और गोपनीयता की उचित व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल ट्रस्ट की ओर से सामने आई योजनाओं का केंद्र मंदिर की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करना है।
राम मंदिर में CEO जितेंद्र मिश्र के कार्यभार संभालने के बाद किए जा रहे ये बदलाव मंदिर प्रशासन को अधिक तकनीक आधारित और निगरानी-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।