अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की रकम की कथित चोरी के मामले में पुलिस की चार्जशीट से कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। चार्जशीट के मुताबिक, 4 जून 2026 की रात एक गणना कर्मी ने तत्कालीन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को मोबाइल पर चोरी का वीडियो और संदेश भेजकर घटना की जानकारी दी थी। इसके बाद गणना कक्ष के बाथरूम से 2.25 लाख रुपये बरामद किए गए।
पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, बाद में चोरी से जुड़ी रकम, अन्य मुद्रा और आभूषण चंपत राय, गोपाल राव और ट्रस्ट के अन्य कर्मचारियों की मौजूदगी में सौंपे गए। इसके बाद सहमति पत्र और सुपुर्दगीनामा तैयार कर सामान को ट्रस्ट के लॉकर में रखा गया। रिपोर्ट के मुताबिक यह चोरी का माल 21 दिनों तक चंपत राय की सुपुर्दगी में रहा।
चंपत राय को कब मिली चोरी की जानकारी?
चार्जशीट में चंपत राय के बयान का हवाला देते हुए बताया गया है कि वह 4 जून की शाम दिल्ली से ट्रेन के जरिए अयोध्या आ रहे थे। रात करीब पौने दस बजे उनके मोबाइल पर गणना कर्मी आनंद कुमार चौधरी ने वीडियो और लिखित संदेश भेजा।
वीडियो में बाथरूम के अंदर नोटों की गड्डियां दिखाई दे रही थीं। संदेश में करीब 2 लाख 25 हजार रुपये मिलने और कई दिनों से कुछ लोगों द्वारा चोरी किए जाने की जानकारी दी गई थी।
बाथरूम में छिपाए गए थे 2.25 लाख रुपये
चार्जशीट के अनुसार, जब गणना कक्ष में चोरी को लेकर जांच और गेट पर चेकिंग शुरू हुई तो आरोपी अविनाश शुक्ला ने चोरी की रकम बाथरूम में छिपा दी थी।
तलाशी के दौरान बाथरूम से करीब 2 लाख 25 हजार रुपये बरामद हुए। इसके बाद मामले में शामिल अन्य लोगों की गतिविधियों की भी जांच आगे बढ़ी।
चंपत राय को दिखाए गए थे CCTV फुटेज
पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, 5 जून को अयोध्या पहुंचने के बाद चंपत राय के आवास पर ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारी पहुंचे। वहां लैपटॉप के माध्यम से गणना कक्ष के कई CCTV फुटेज दिखाए गए।
चार्जशीट में चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के बयानों का भी उल्लेख है। पुलिस ने इन लोगों को मामले में आरोपी बनाने के बजाय गवाह के रूप में शामिल किया है।
21 दिन तक चंपत राय की सुपुर्दगी में रहा सामान
Live Hindustan की रिपोर्ट के अनुसार, चोरी से संबंधित बरामद सामान करीब 21 दिनों तक चंपत राय की सुपुर्दगी में रहा। बाद में FIR दर्ज होने और पुलिस की विवेचना शुरू होने के बाद आरोपियों से पूछताछ की गई और उनकी निशानदेही पर ट्रस्ट के लॉकर से चोरी का सामान पुलिस ने अपने कब्जे में लिया।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि चोरी का माल मिलने या किसी स्थान पर रखे होने की स्थिति में सामान्य कानूनी प्रक्रिया के तहत पुलिस को सूचना देने की जरूरत होती है। हालांकि, चार्जशीट में चंपत राय को आरोपी नहीं बनाया गया है।
चार्जशीट में चंपत राय आरोपी नहीं, गवाह
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पुलिस ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आरोपी नहीं बनाया है। तीनों को चार्जशीट में गवाह के तौर पर शामिल किया गया है। पहले से आरोपी बनाए गए आठ लोगों के खिलाफ ही चार्जशीट दाखिल की गई है।
इसलिए चंपत राय को लेकर चार्जशीट में सामने आई जानकारी और उनके खिलाफ किसी अपराध का निष्कर्ष—इन दोनों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
74 हजार पन्नों की चार्जशीट, 133 गवाह
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने करीब 74 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इसमें लगभग 133 गवाहों के बयान शामिल किए गए हैं।
चार्जशीट में CCTV फुटेज, आरोपियों से बरामद रकम और अन्य सामान, वाहनों से संबंधित जानकारी, कॉल डिटेल और बैंक खातों से जुड़े वित्तीय लेनदेन को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।
आठ लोगों को बनाया गया आरोपी
पुलिस ने इस मामले में पहले से नामजद आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के नाम शामिल हैं।
पुलिस जांच में CCTV फुटेज के आधार पर आरोपियों की गतिविधियों को भी देखा गया। रिपोर्टों के अनुसार कुछ आरोपी कई बार चोरी करते या चोरी में मदद करते दिखाई दिए।
79.85 लाख रुपये से ज्यादा की बरामदगी
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए सात आरोपियों से कुल 79 लाख 85 हजार 493 रुपये बरामद किए गए। वहीं सभी आठ आरोपियों के बैंक खातों में करीब 98 लाख 30 हजार रुपये जमा होने की जानकारी चार्जशीट में दर्ज है।
इन रकमों और आरोपियों की गतिविधियों के बीच संबंध स्थापित करना अब अदालत में अभियोजन के लिए महत्वपूर्ण होगा।
4 जून की घटना के बाद 25 जून को दर्ज हुई FIR
चार्जशीट के मुताबिक, 4 जून को चोरी की घटना की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद 5 जून को CCTV फुटेज दिखाए जाने और ट्रस्ट स्तर पर जानकारी साझा किए जाने की बात सामने आती है।
मामले में 25 जून 2026 को रामजन्मभूमि थाने में FIR दर्ज की गई। इसके बाद पुलिस ने विस्तृत विवेचना शुरू की और अंततः अदालत में चार्जशीट दाखिल की।
चंपत राय की भूमिका पर क्यों उठे सवाल?
चंपत राय को चोरी की जानकारी 4 जून की रात वीडियो के जरिए मिलने और बाद में उनके पास चोरी का माल रहने की बात सामने आने के बाद उनकी भूमिका को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस शुरू हुई।
हालांकि, पुलिस की चार्जशीट में उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया है। उन्हें गवाह के रूप में शामिल किया गया है। चार्जशीट में उनके खिलाफ चोरी में सहयोग करने या जांच को प्रभावित करने का कोई निष्कर्ष दर्ज नहीं होने की बात अन्य रिपोर्टों में सामने आई है।
इसलिए इस पूरे मामले में चार्जशीट में दर्ज तथ्य और राजनीतिक आरोपों को अलग-अलग रखना जरूरी है।
अब अदालत में होगी आगे की कार्रवाई
पुलिस की विवेचना पूरी होने के बाद अब मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। चार्जशीट में शामिल CCTV फुटेज, गवाहों के बयान, बरामद रकम, बैंकिंग रिकॉर्ड और दूसरे दस्तावेजों के आधार पर अदालत में आरोपों की सुनवाई होगी।
करीब 74 हजार पन्नों की चार्जशीट में दर्ज साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन को आरोपियों के खिलाफ अपराध साबित करना होगा।