Thursday, 01 October 2026
होम DBN Samachar यूपी में जुड़वा बहनों की बायोमीट्रिक समान होने की कहानी निकली गलत, अपडेट में हुई थी गलती; ऐसे बना आधार कार्ड
DBN Samachar

यूपी में जुड़वा बहनों की बायोमीट्रिक समान होने की कहानी निकली गलत, अपडेट में हुई थी गलती; ऐसे बना आधार कार्ड

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
30 September 2026 10:39 AM 1 मिनट पठन 1074 Views
यूपी में जुड़वा बहनों की बायोमीट्रिक समान होने की कहानी निकली गलत, अपडेट में हुई थी गलती; ऐसे बना आधार कार्ड

रामपुर: उत्तर प्रदेश के रामपुर में जुड़वा बहनों के आधार कार्ड से जुड़ा मामला सामने आने के बाद बायोमीट्रिक सिस्टम और जुड़वा बच्चों की पहचान को लेकर काफी चर्चा हुई थी। शुरुआती जानकारी में बताया गया था कि दोनों बहनों के फिंगरप्रिंट और रेटिना एक जैसे होने के कारण एक बहन का आधार कार्ड दूसरी के रिकॉर्ड से डुप्लीकेट हो रहा था। हालांकि, अब भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) की तकनीकी जांच में इस मामले की असली वजह सामने आ गई है।

UIDAI के मुताबिक, दोनों बहनों का बायोमीट्रिक एक जैसा नहीं था। समस्या बायोमीट्रिक अपडेट के दौरान हुई एक मानवीय गलती की वजह से पैदा हुई थी।

चार साल की उम्र में बना था आधार

रामपुर की रहने वाली जुड़वा बहनों खिजरा और तूबा का आधार करीब चार साल तीन महीने की उम्र में बनाया गया था। इस उम्र में बच्चों का फिंगरप्रिंट और आइरिस यानी आंखों की बायोमीट्रिक जानकारी दर्ज नहीं की जाती।

UIDAI के नियमों के अनुसार, बच्चे के पांच वर्ष की उम्र पूरी होने पर उसका अनिवार्य बायोमीट्रिक अपडेट किया जाता है। इसमें फोटो, फिंगरप्रिंट और दोनों आंखों का आइरिस डेटा लिया जाता है।

बायोमीट्रिक अपडेट के दौरान हुई गलती

जब दोनों बहनें बड़ी हुईं और उनका बायोमीट्रिक अपडेट कराने की प्रक्रिया शुरू हुई, तब एक रिकॉर्ड में गलती हो गई।

UIDAI की जांच के अनुसार, खिजरा के आधार रिकॉर्ड में गलती से तूबा का बायोमीट्रिक दर्ज हो गया। इसके बाद जब तूबा का अपना बायोमीट्रिक अपडेट किया गया तो सिस्टम में उसका फिंगरप्रिंट और आइरिस पहले से मौजूद पाया गया।

इसी वजह से सिस्टम ने तूबा के अपडेट को डुप्लीकेट के तौर पर पहचान लिया और उसका आधार रिकॉर्ड निरस्त हो गया।

कई महीनों तक परिवार रहा परेशान

बायोमीट्रिक अपडेट नहीं होने के कारण परिवार को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। दोनों बहनें कक्षा 10 में पढ़ रही थीं और आधार से जुड़ी प्रक्रिया उनके लिए जरूरी हो गई थी।

परिवार ने कई बार आधार केंद्रों पर समस्या का समाधान कराने की कोशिश की, लेकिन मामला हल नहीं हो सका। इसके बाद यह मामला रामपुर जिला प्रशासन तक पहुंचा।

इससे पहले सामने आई रिपोर्टों में दावा किया गया था कि दोनों बहनों के फिंगरप्रिंट और रेटिना समान होने की वजह से सिस्टम उन्हें डुप्लीकेट मान रहा था। बाद में UIDAI की तकनीकी जांच ने इस दावे को सही नहीं पाया।

UIDAI की जांच के बाद सामने आई असली वजह

मामले की जानकारी लखनऊ स्थित UIDAI के क्षेत्रीय कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची। तकनीकी जांच के दौरान बायोमीट्रिक अपडेट की प्रक्रिया में हुई गलती का पता चला।

गलत तरीके से दूसरे व्यक्ति का बायोमीट्रिक दर्ज किए गए आधार रिकॉर्ड को निर्धारित प्रक्रिया के तहत रद्द किया गया। इसके बाद दोनों बहनों के पिता को जन्म प्रमाणपत्र के आधार पर नए सिरे से नामांकन कराने के लिए कहा गया।

नए नामांकन के बाद दोनों बहनों के अलग-अलग आधार कार्ड जारी कर दिए गए।

जुड़वा होने से बायोमीट्रिक एक जैसा नहीं हो जाता

इस मामले से यह भी स्पष्ट हुआ कि जुड़वा या एक जैसे दिखने वाले लोगों के बायोमीट्रिक को अपने आप समान नहीं माना जा सकता। UIDAI ने स्पष्ट किया कि इस मामले में दोनों बहनों के बायोमीट्रिक अलग थे और समस्या अपडेट प्रक्रिया में हुई गलती के कारण बनी थी।

UIDAI की आधार जनरेशन प्रक्रिया में बायोमीट्रिक डुप्लीकेशन की जांच की जाती है। संभावित डुप्लीकेट मिलने पर अतिरिक्त जांच की व्यवस्था भी होती है, ताकि किसी व्यक्ति का नामांकन केवल संभावित गलत मिलान के आधार पर गलत तरीके से अस्वीकार न हो।

21 सितंबर को मिला था आधार कार्ड

रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने 21 सितंबर को दोनों बहनों को आधार कार्ड सौंपे थे। उस समय यह जानकारी सामने आई थी कि दोनों के बायोमीट्रिक समान होने के कारण आधार कार्ड बनने में परेशानी आ रही थी।

अब UIDAI की जांच के बाद इस मामले की तस्वीर बदल गई है। अधिकारियों के मुताबिक, यह किसी असाधारण बायोमीट्रिक समानता का मामला नहीं बल्कि बायोमीट्रिक अपडेट के दौरान हुई प्रक्रियात्मक गलती थी।

प्रतिक्रिया दें (Leave a Reply)

आपका ईमेल पता सुरक्षित है और प्रकाशित नहीं किया जाएगा। आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *