सीतापुर: उत्तर प्रदेश के सीतापुर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान मंदिर के सामने बने चबूतरे को तोड़े जाने का विरोध करना एक भाजपा कार्यकर्ता और उसके बेटे को भारी पड़ गया। विरोध के दौरान हुई कहासुनी के बाद पुलिस ने पिता-पुत्र को हिरासत में ले लिया। मामले की जानकारी मिलने पर नगर विकास राज्यमंत्री राकेश राठौर गुरु देर रात सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ शहर कोतवाली पहुंच गए। बातचीत के बाद पुलिस ने दोनों को रिहा कर दिया।
सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाया जा रहा था अतिक्रमण
मामला सीतापुर शहर कोतवाली क्षेत्र के रम्पा रोड का है। रिपोर्ट के मुताबिक, सड़क चौड़ीकरण के लिए नगर पालिका की टीम अतिक्रमण हटाने पहुंची थी। इसी कार्रवाई के दौरान मंदिर के सामने बना चबूतरा तोड़ा गया।
चबूतरा तोड़े जाने का स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता जितेंद्र मिश्रा और उनके बेटे शुभम मिश्रा ने विरोध किया। इसी दौरान उनकी प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस से कहासुनी हो गई। इसके बाद पुलिस दोनों को शहर कोतवाली ले आई।
खबर मिलते ही सैकड़ों समर्थकों के साथ कोतवाली पहुंचे मंत्री
पिता-पुत्र के हिरासत में लिए जाने की जानकारी मिलते ही नगर विकास राज्यमंत्री राकेश राठौर गुरु देर रात अपने समर्थकों और भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ कोतवाली पहुंच गए।
मंत्री ने अधिकारियों से दोनों को रिहा करने की मांग की। देर रात तक बातचीत चलती रही। इसके बाद पुलिस ने जितेंद्र मिश्रा और उनके बेटे शुभम मिश्रा को छोड़ दिया। मंत्री दोनों को अपनी गाड़ी से घर लेकर पहुंचे।
मंत्री ने पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली पर उठाए सवाल
मंत्री राकेश राठौर ने इस दौरान कार्यकर्ताओं के साथ कथित अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है।
मंत्री ने आरोप लगाया कि पुलिस थाने में अपराधियों के साथ अलग व्यवहार किया जाता है, जबकि भाजपा कार्यकर्ताओं को फर्श पर बैठाया जाता है। बातचीत के दौरान मंत्री भावुक भी नजर आए और उनकी आंखों में आंसू दिखाई दिए।
कार्रवाई को लेकर क्या है प्रशासन का पक्ष?
रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन की कार्रवाई का उद्देश्य रम्पा रोड पर सड़क चौड़ीकरण के लिए अतिक्रमण हटाना था। इसी अभियान के तहत मंदिर के सामने बने चबूतरे को हटाया गया।
वहीं, चबूतरा तोड़े जाने का स्थानीय लोगों और भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से विरोध किया गया। विरोध के दौरान पुलिस और पिता-पुत्र के बीच कहासुनी हुई, जिसके बाद दोनों को हिरासत में लिया गया।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट में प्रशासन की ओर से चबूतरे की स्थिति या उसे हटाने से जुड़े अलग से विस्तृत बयान का उल्लेख नहीं है।
देर रात रिहाई के बाद मामला शांत
काफी देर तक चली बातचीत के बाद पुलिस ने दोनों को रिहा कर दिया। मंत्री उन्हें अपनी गाड़ी से घर लेकर गए। हालांकि, इस घटना के बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और पुलिस की भूमिका को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
घटना ने प्रशासनिक कार्रवाई, अतिक्रमण हटाने और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।