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हिजाब विवाद पर सपा नेता एसटी हसन की प्रतिक्रिया: बोले- पगड़ी और तिलक से दिक्कत नहीं तो हिजाब से क्यों

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
26 August 2026 4:08 PM 1 मिनट पठन 81842 Views
हिजाब विवाद पर सपा नेता एसटी हसन की प्रतिक्रिया: बोले- पगड़ी और तिलक से दिक्कत नहीं तो हिजाब से क्यों

मुरादाबाद/प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति मांगने वाली छात्रा की याचिका खारिज करने के फैसले के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के नेता और मुरादाबाद के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने कोर्ट के फैसले पर असहमति जताई है। उन्होंने धार्मिक पहचान और स्कूल ड्रेस कोड के बीच संतुलन को लेकर सवाल उठाए।

क्या है इलाहाबाद हाईकोर्ट का मामला?

मामला प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल की एक नाबालिग छात्रा से जुड़ा है। छात्रा ने कक्षा 11 में प्रवेश के दौरान स्कूल यूनिफॉर्म के साथ सिर पर हिजाब/स्कार्फ पहनने की अनुमति मांगी थी।

छात्रा की ओर से दलील दी गई थी कि वह कक्षा 6 से स्कूल में हेडस्कार्फ पहनती रही है और इसे अपनी धार्मिक आस्था का हिस्सा मानती है। स्कूल प्रशासन ने हालांकि सभी विद्यार्थियों के लिए निर्धारित ड्रेस कोड का पालन करने की बात कही।

हाईकोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की?

इलाहाबाद हाईकोर्ट की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से पर्याप्त तथ्यात्मक या कानूनी सामग्री पेश नहीं की गई, जिससे यह साबित हो सके कि हिजाब पहनना इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी शिक्षण संस्थान का ड्रेस कोड समान रूप से, गैर-भेदभावपूर्ण तरीके से और अनुशासन व संस्थागत पहचान बनाए रखने के उद्देश्य से लागू किया गया है, तो निर्धारित यूनिफॉर्म तय करना मुख्य रूप से स्कूल के अधिकार क्षेत्र में आता है।

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि स्कूल में उसी धार्मिक समुदाय की अन्य छात्राएं भी निर्धारित ड्रेस कोड का पालन कर रही थीं।

एसटी हसन ने फैसले पर जताई असहमति

सपा नेता एसटी हसन ने कहा कि वह हाईकोर्ट के इस फैसले से सहमत नहीं हैं। उनका सवाल था कि अगर किसी स्कूल में निर्धारित ड्रेस कोड नहीं है और कोई छात्रा हिजाब पहनकर स्कूल आती है, तो इसमें परेशानी क्या है।

उन्होंने धार्मिक विविधता का उदाहरण देते हुए सिखों की पगड़ी और हिंदुओं के तिलक, कड़ा और कलावा जैसी धार्मिक परंपराओं का उल्लेख किया।

उनका कहना है कि भारत की पहचान उसकी विविधता और अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच भाईचारे से है।

जबरदस्ती हिजाब पहनाना या उतारना दोनों गलत: एसटी हसन

एसटी हसन ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति को जबरदस्ती हिजाब पहनाना गलत है, लेकिन किसी को जबरन हिजाब उतारने के लिए कहना भी उचित नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर किसी संस्थान में स्पष्ट ड्रेस कोड है तो विद्यार्थियों को उस नियम का पालन करना चाहिए, लेकिन धार्मिक पहचान को लेकर जबरदस्ती या टकराव की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए।

भारत की विविधता का दिया उदाहरण

सपा नेता ने भारत की गंगा-जमुनी तहजीब और धार्मिक भाईचारे का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग साथ रहते हैं।

उनके अनुसार, धार्मिक पहचान के आधार पर समाज में विभाजन पैदा नहीं किया जाना चाहिए और संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है।

हिजाब पर फिर शुरू हुई राजनीतिक बहस

हाईकोर्ट के फैसले के बाद हिजाब को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। कुछ मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने फैसले पर आपत्ति जताई है, जबकि अन्य लोगों ने स्कूलों में समान ड्रेस कोड और अनुशासन को प्राथमिकता देने की बात कही है।

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी फैसले की आलोचना की है। इससे यह मुद्दा अदालत के फैसले से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।

सुप्रीम कोर्ट का संदर्भ भी महत्वपूर्ण

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में 2022 के कर्नाटक हाईकोर्ट के हिजाब संबंधी फैसले का भी उल्लेख किया। LiveLaw के अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के निर्णय को महत्वपूर्ण persuasive authority माना, हालांकि सुप्रीम कोर्ट में उस मामले पर पहले split verdict आ चुका है और इस मुद्दे पर अंतिम रूप से स्थिति तय करने वाला कोई सर्वसम्मत सुप्रीम कोर्ट फैसला नहीं है।

ड्रेस कोड बनाम धार्मिक स्वतंत्रता

इस पूरे विवाद में दो प्रमुख सवाल सामने आते हैं—पहला, शिक्षण संस्थानों को समान ड्रेस कोड लागू करने का अधिकार कितना व्यापक है और दूसरा, विद्यार्थियों की धार्मिक पहचान और अभिव्यक्ति के अधिकार की सीमा क्या है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के मौजूदा फैसले में जोर समान और गैर-भेदभावपूर्ण स्कूल ड्रेस कोड पर रहा है। वहीं एसटी हसन जैसे नेताओं का तर्क धार्मिक विविधता और व्यक्तिगत आस्था की स्वतंत्रता पर केंद्रित है।

निष्कर्ष

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद हिजाब और स्कूल यूनिफॉर्म का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। अदालत ने संबंधित छात्रा की याचिका खारिज करते हुए स्कूल के समान ड्रेस कोड को महत्व दिया है, जबकि सपा नेता एसटी हसन ने फैसले पर असहमति जताते हुए धार्मिक विविधता और व्यक्तिगत आस्था का मुद्दा उठाया है।


📌 पूरी खबर एक नजर में

मुद्दाजानकारी
मामलास्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की मांग
स्थानप्रयागराज, उत्तर प्रदेश
स्कूलटैगोर पब्लिक स्कूल
अदालतइलाहाबाद हाईकोर्ट
फैसलाछात्रा की याचिका खारिज
कोर्ट का मुख्य आधारसमान स्कूल ड्रेस कोड
सपा नेताडॉ. एसटी हसन
एसटी हसन की प्रतिक्रियाफैसले पर असहमति
मुख्य सवालधार्मिक पहचान बनाम संस्थागत ड्रेस कोड
मुद्दाधार्मिक स्वतंत्रता और स्कूल अनुशासन

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