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UP News: डॉक्टरों की कमी दूर करने की तैयारी, 70 साल तक सेवा का प्रस्ताव; सरकारी अस्पतालों में बढ़ेगी राहत?

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
17 August 2026 2:17 PM 1 मिनट पठन 56376 Views
UP News: डॉक्टरों की कमी दूर करने की तैयारी, 70 साल तक सेवा का प्रस्ताव; सरकारी अस्पतालों में बढ़ेगी राहत?

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए सरकार एक अहम प्रस्ताव पर काम कर रही है। इसके तहत अनुभवी डॉक्टरों को 70 वर्ष की उम्र तक सेवा जारी रखने का अवसर देने पर विचार किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य मौजूदा डॉक्टरों की विशेषज्ञता का लंबे समय तक इस्तेमाल करना और अस्पतालों में मरीजों को इलाज की सुविधा उपलब्ध कराना है।

हालांकि, अभी यह प्रस्ताव अंतिम रूप से लागू नहीं हुआ है। इसलिए इसे डॉक्टरों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने का अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए।

🏥 सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी बनी बड़ी चुनौती

उत्तर प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने डॉक्टरों की कमी लंबे समय से एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। जून 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग में करीब 18,500 पद हैं, जिनमें लगभग 11,000 डॉक्टर कार्यरत बताए गए थे, जबकि करीब 7,500 पद खाली थे।

ऐसे में अस्पतालों में मरीजों की संख्या और उपलब्ध डॉक्टरों के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है।

👨‍⚕️ क्यों तैयार किया जा रहा है 70 साल तक सेवा का प्रस्ताव?

ताजा रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टरों की नई भर्ती में देरी को देखते हुए सरकार अनुभवी डॉक्टरों की सेवाएं लंबे समय तक लेने के विकल्प पर विचार कर रही है। प्रस्ताव का उद्देश्य यह है कि जिन डॉक्टरों के पास वर्षों का अनुभव है, उनकी सेवाओं का इस्तेमाल सरकारी अस्पतालों में कुछ और वर्षों तक किया जा सके।

इससे खासकर उन अस्पतालों को राहत मिल सकती है जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है।

📋 डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया भी चुनौती

रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टरों की भर्ती के लिए एक भर्ती बोर्ड का गठन किया गया है, लेकिन गठन के लगभग छह महीने बाद भी भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी थी। यही वजह है कि सरकार के सामने तत्काल डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने का सवाल है।

नई भर्ती में समय लगने की स्थिति में अनुभवी डॉक्टरों को सेवा में बनाए रखना सरकार के लिए एक अस्थायी समाधान हो सकता है।

🩺 मरीजों को क्या फायदा होगा?

अगर प्रस्ताव लागू होता है तो सरकारी अस्पतालों में अनुभवी डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ सकती है।

इसका फायदा उन मरीजों को मिल सकता है जिन्हें विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श या इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।

विशेषकर जिला अस्पतालों और उन क्षेत्रों में जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या कम है, अनुभवी डॉक्टरों की सेवाएं महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।

⚕️ क्या सभी डॉक्टर 70 साल तक काम कर पाएंगे?

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्ताव लागू होने पर सभी डॉक्टरों को स्वतः 70 वर्ष तक सेवा मिलेगी या इसके लिए अलग-अलग शर्तें होंगी।

सरकार की अंतिम नीति सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि:

  • किन डॉक्टरों पर यह व्यवस्था लागू होगी?
  • क्या यह सभी सरकारी डॉक्टरों के लिए होगी?
  • क्या डॉक्टरों को सेवा विस्तार का विकल्प दिया जाएगा?
  • स्वास्थ्य और कार्यक्षमता की कोई शर्त होगी?
  • विशेषज्ञ डॉक्टरों को प्राथमिकता मिलेगी या नहीं?

इसलिए अभी इसे केवल प्रस्तावित व्यवस्था के रूप में देखना उचित है।

👨‍⚕️ युवाओं की भर्ती पर भी उठ सकते हैं सवाल

रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने की ऐसी व्यवस्था का एक दूसरा पहलू भी है। अगर वरिष्ठ डॉक्टर लंबे समय तक पद पर बने रहते हैं तो युवा डॉक्टरों के लिए नए पद और अवसरों को लेकर सवाल उठ सकते हैं।

अतीत में उत्तर प्रदेश में डॉक्टरों और चिकित्सा शिक्षकों की सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ाने के प्रस्तावों पर इसी तरह की बहस सामने आ चुकी है। कुछ डॉक्टरों ने आशंका जताई थी कि इससे युवा चिकित्सकों के लिए पदों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।

इसलिए सरकार के सामने अनुभवी डॉक्टरों को बनाए रखने और नई पीढ़ी के डॉक्टरों की भर्ती—दोनों के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण होगा।

🏫 चिकित्सा शिक्षा में भी 70 साल की सीमा का प्रावधान

यह भी ध्यान देने वाली बात है कि केंद्र सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों, डीन, प्रिंसिपल और डायरेक्टर जैसे पदों पर नियुक्ति/विस्तार/पुनर्नियुक्ति के लिए उम्र सीमा 70 वर्ष तक बढ़ाने की व्यवस्था का उल्लेख किया है।

हालांकि, यह प्रावधान और उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की सेवा उम्र से जुड़ा प्रस्ताव एक ही व्यवस्था नहीं हैं। दोनों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

🏛️ सरकार के सामने दोहरी चुनौती

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केवल वरिष्ठ डॉक्टरों को अधिक समय तक सेवा में रखना पर्याप्त नहीं होगा।

सरकार को साथ-साथ:

नई भर्ती तेज करनी होगी,
खाली पद भरने होंगे,
ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ानी होगी,
विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ानी होगी
और अस्पतालों की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करना होगा।

क्योंकि डॉक्टरों की कमी का असर सीधे मरीजों के इलाज और अस्पतालों की कार्यक्षमता पर पड़ता है।

🔎 अब आगे क्या होगा?

फिलहाल 70 वर्ष तक सेवा का प्रस्ताव चर्चा में है। अब देखना होगा कि सरकार इसे किस रूप में अंतिम रूप देती है और क्या इसे कैबिनेट की मंजूरी मिलती है।

अगर प्रस्ताव लागू होता है तो अनुभवी डॉक्टरों की सेवाएं लंबे समय तक मिल सकती हैं, लेकिन इसके साथ नई भर्ती और युवा डॉक्टरों के लिए अवसरों को लेकर भी संतुलित नीति बनाना जरूरी होगा।


📊 पूरी खबर एक नजर में

मुद्दाजानकारी
राज्यउत्तर प्रदेश
क्षेत्रसरकारी स्वास्थ्य सेवाएं
मुख्य समस्याडॉक्टरों की कमी
प्रस्ताव70 वर्ष तक सेवा का विकल्प
वर्तमान स्थितिप्रस्ताव तैयार किया जा रहा है
उद्देश्यअनुभवी डॉक्टरों की सेवाएं बनाए रखना
दूसरी चुनौतीनई भर्ती में देरी
बड़ा सवालनई भर्ती और सेवा विस्तार में संतुलन

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