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काशी से जेवर तक: उत्तर प्रदेश में टेक्नोक्रांति, IT निर्यात 1 लाख करोड़ के पार; चिप यूनिट से रोजगार की उम्मीद

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
9 October 2026 12:03 PM 1 मिनट पठन 104 Views
काशी से जेवर तक: उत्तर प्रदेश में टेक्नोक्रांति, IT निर्यात 1 लाख करोड़ के पार; चिप यूनिट से रोजगार की उम्मीद

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार को लेकर नई संभावनाएं सामने आ रही हैं। लखनऊ के आईटी पार्क, नोएडा का टेक्नोलॉजी सेक्टर और जेवर में प्रस्तावित चिप निर्माण इकाई राज्य की औद्योगिक रणनीति के प्रमुख हिस्से बन रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश का आईटी और आईटी-सक्षम सेवाओं (IT-ITeS) का निर्यात पहली बार एक लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, यह राज्य के तकनीकी क्षेत्र के विस्तार का महत्वपूर्ण संकेत है।

IT निर्यात पहली बार एक लाख करोड़ रुपये के पार

उत्तर प्रदेश से वित्त वर्ष 2025-26 में आईटी और आईटी-सक्षम सेवाओं का निर्यात 1,01,970 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। वर्ष 2020-21 में यह आंकड़ा 48,004 करोड़ रुपये था। यानी पांच वर्षों में निर्यात में 53,966 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई।

सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) से जुड़ी इकाइयों का निर्यात 25,642 करोड़ रुपये से बढ़कर 52,778 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) से होने वाला निर्यात 22,362 करोड़ रुपये से बढ़कर 49,192 करोड़ रुपये पहुंच गया। ये आंकड़े बताते हैं कि राज्य के आईटी निर्यात में दोनों क्षेत्रों का योगदान रहा है।

जेवर में चिप यूनिट से सेमीकंडक्टर क्षेत्र को बढ़ावा

गौतम बुद्ध नगर के जेवर क्षेत्र में सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़ी परियोजना उत्तर प्रदेश की तकनीकी योजनाओं का अहम हिस्सा है। रिपोर्ट के अनुसार, यहां HCL-Foxconn की चिप इकाई के लिए 3,706 करोड़ रुपये की लागत बताई गई है।

इस तरह की परियोजनाओं से इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, चिप पैकेजिंग और संबंधित सप्लाई चेन में अवसर पैदा होने की संभावना है। हालांकि, परियोजना की स्थापना, उत्पादन शुरू होने और वास्तविक रोजगार के आंकड़ों को लेकर अंतिम स्थिति आधिकारिक अपडेट के आधार पर ही तय होगी।

लखनऊ बन रहा है IT और नई तकनीक का केंद्र

राजधानी लखनऊ में आईटी सेवाओं और तकनीकी निवेश को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। यहां IBM, Genpact और Teleperformance जैसी कंपनियों की मौजूदगी राज्य के सेवा क्षेत्र को समर्थन देती है।

HCLTech IT City के दूसरे चरण में लगभग 500 करोड़ रुपये के निवेश और करीब 6,000 प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार अवसरों की संभावना रिपोर्ट की गई है। इसके साथ ही लखनऊ को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर और कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजी के केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।

इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और निर्यात पर भी जोर

आईटी सेवाओं के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण भी राज्य की औद्योगिक योजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात के लगभग 3,800 करोड़ रुपये से बढ़कर 45,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का उल्लेख किया गया है।

राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को दो लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। यह एक निर्धारित लक्ष्य है, उपलब्धि नहीं; इसे हासिल करने के लिए निवेश, उत्पादन क्षमता, वैश्विक मांग और आपूर्ति श्रृंखला जैसे कारक महत्वपूर्ण होंगे।

AI स्टार्टअप और युवाओं के लिए नए अवसर

उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम और नई तकनीकों में कौशल विकास को भी प्राथमिकता दी जा रही है। लखनऊ में 50 विश्वस्तरीय AI स्टार्टअप विकसित करने का लक्ष्य सामने रखा गया है। इसके अलावा, AI और अन्य उभरती तकनीकों में युवाओं को प्रशिक्षण देने की योजनाएं रोजगार की तैयारी में मदद कर सकती हैं।

हालांकि, प्रशिक्षण और स्टार्टअप के लक्ष्यों का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने युवाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिलता है, कितने स्टार्टअप टिकाऊ कारोबार बना पाते हैं और कितने रोजगार वास्तव में सृजित होते हैं।

जापान के साथ तकनीकी और औद्योगिक साझेदारी

उत्तर प्रदेश की औद्योगिक रणनीति में विदेशी निवेश और तकनीकी साझेदारी की भूमिका भी अहम है। काशी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की स्मृति में बने आबे मेमोरियल कॉरिडोर का संदर्भ राज्य के जापान के साथ संबंधों को रेखांकित करता है।

इसके साथ यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में प्रस्तावित जापान सिटी और निवेश आकर्षित करने के प्रयासों को भी औद्योगिक विस्तार से जोड़ा जा रहा है। इन योजनाओं की सफलता निवेश प्रस्तावों के वास्तविक परियोजनाओं में बदलने और उनके समय पर क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।

क्या उत्तर प्रदेश में युवाओं का दूसरे राज्यों की ओर पलायन कम होगा?

आईटी पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स कारखाने और सेमीकंडक्टर परियोजनाएं राज्य में स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ा सकती हैं। इससे कुछ युवाओं को नौकरी के लिए दूसरे महानगरों में जाने की जरूरत कम हो सकती है।

लेकिन इस बदलाव का आकलन केवल निवेश घोषणाओं से नहीं किया जा सकता। इसके लिए वास्तविक रोजगार, वेतन स्तर, स्थानीय युवाओं की नियुक्ति, प्रशिक्षण की गुणवत्ता और परियोजनाओं के संचालन से जुड़े आंकड़ों को देखना जरूरी होगा।

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