लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2026 का मानसून कई मायनों में अलग रहा। पूरे प्रदेश में इस बार बारिश ने पिछले दस वर्षों का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया, लेकिन जिलेवार बारिश का वितरण काफी असमान रहा। 1 जून से 30 सितंबर के बीच उत्तर प्रदेश में कुल 802.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य औसत से करीब 8 प्रतिशत अधिक है। इसके बावजूद प्रदेश के 37 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई।
मानसून की विदाई के साथ अब प्रदेश के मौसम में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। बारिश थमने के बाद राजधानी लखनऊ समेत कई इलाकों में धूप तेज हो गई है और तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार अक्टूबर में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश रहने का अनुमान है।
802.9 मिलीमीटर बारिश, सामान्य से 8 फीसदी ज्यादा
इस मानसून सीजन में उत्तर प्रदेश में कुल 802.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य बारिश की तुलना में करीब 8 प्रतिशत अधिक है। हालांकि प्रदेश के औसत आंकड़े से अलग-अलग जिलों की स्थिति देखें तो बारिश का वितरण एक जैसा नहीं रहा।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 37 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई, जबकि 37 जिलों में बारिश सामान्य से कम रही। आगरा में बारिश लगभग सामान्य स्तर पर रही।
बारिश की कमी वाले जिलों में भी अंतर काफी बड़ा रहा। 20 जिलों में से 16 जिलों में बारिश की कमी 20 से 59 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई। देवरिया, कुशीनगर, गाजियाबाद और शामली में सामान्य के मुकाबले बारिश की कमी 60 प्रतिशत से भी अधिक रही।
जून और जुलाई में कम बारिश, सितंबर ने पूरी की भरपाई
2026 में मानसून की शुरुआत उत्तर प्रदेश के लिए कमजोर रही। जून में प्रदेश में सामान्य से 54 प्रतिशत कम बारिश हुई। इसके बाद जुलाई में भी बारिश सामान्य से करीब 17 प्रतिशत कम रही।
हालांकि अगस्त में मौसम का रुख बदला और इस महीने सामान्य से 24 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। सितंबर में बारिश और ज्यादा हुई। सितंबर के दौरान प्रदेश में 250.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 63 प्रतिशत अधिक थी।
इस तरह मानसून के शुरुआती महीनों में हुई कमी की काफी हद तक भरपाई अगस्त और सितंबर की बारिश ने कर दी।
14 जिलों में 1000 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश
प्रदेश के कई जिलों में इस बार भारी बारिश दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार 14 जिलों में 1000 मिलीमीटर से अधिक बारिश हुई।
सबसे अधिक बारिश चित्रकूट में 1358.1 मिलीमीटर दर्ज की गई। इसके बाद बांदा में 1348.4 मिलीमीटर, बिजनौर में 1348.2 मिलीमीटर और बहराइच में 1343.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई।
क्षेत्रवार आंकड़ों में भी अंतर देखने को मिला। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सामान्य से करीब 16 प्रतिशत अधिक बारिश हुई, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश सामान्य से करीब 2 प्रतिशत अधिक रही।
2018 का रिकॉर्ड भी पीछे छूटा
उत्तर प्रदेश में इस बार की मानसूनी बारिश ने पिछले दस वर्षों के आंकड़ों में नया स्तर दर्ज किया है। वर्ष 2018 में प्रदेश में 764.8 मिलीमीटर बारिश हुई थी। 2026 में यह आंकड़ा 38.1 मिलीमीटर अधिक रहा।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 782.7 मिलीमीटर बारिश हुई, जो पिछले दस वर्षों में इस क्षेत्र का सबसे अधिक आंकड़ा बताया गया है। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में 817 मिलीमीटर बारिश हुई, हालांकि वहां 2021 में दर्ज 867.3 मिलीमीटर का आंकड़ा अभी भी अधिक है।
मानसून की विदाई के बाद बढ़ने लगा तापमान
बारिश का दौर समाप्त होने के बाद लखनऊ में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। तेज धूप निकलने के कारण दिन के समय गर्मी का अहसास बढ़ गया है।
बारिश रुकने के बाद केवल चार दिनों में राजधानी के अधिकतम तापमान में करीब 8.2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई। बुधवार को लखनऊ का अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि न्यूनतम तापमान 23.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिनों में अधिकतम तापमान में करीब 2 डिग्री सेल्सियस तक और बढ़ोतरी हो सकती है।
अक्टूबर में बारिश कम रहने का अनुमान
मानसून की विदाई के बाद अब अक्टूबर में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रहने के संकेत हैं। मौसम विभाग ने प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अक्टूबर के दौरान सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है।
इसका मतलब यह है कि जिन जिलों में मानसून के दौरान बारिश कम रही, वहां आगे भी बारिश से तत्काल राहत मिलने की संभावना सीमित हो सकती है। वहीं अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में मौसम के शुष्क होने से जलभराव जैसी परिस्थितियों से राहत मिल सकती है।
यूपी में इस बार मानसून का क्या रहा निष्कर्ष?
उत्तर प्रदेश में 2026 का मानसून कुल बारिश के लिहाज से मजबूत रहा, लेकिन इसका फायदा पूरे प्रदेश को समान रूप से नहीं मिला। एक तरफ प्रदेश में 802.9 मिलीमीटर बारिश हुई और दस साल के आंकड़ों में नया स्तर बना, तो दूसरी तरफ 37 जिलों में बारिश सामान्य से कम रही।
जून और जुलाई की कमी को अगस्त और खासकर सितंबर की भारी बारिश ने काफी हद तक पूरा किया। अब मानसून की विदाई के साथ तापमान फिर बढ़ रहा है और अक्टूबर में सामान्य से कम बारिश का अनुमान मौसम के अगले चरण की ओर इशारा कर रहा है।
निष्कर्ष: यूपी में इस साल बारिश का कुल आंकड़ा भले ही रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा हो, लेकिन जिलेवार असमानता इस मानसून की सबसे बड़ी खासियत रही। आने वाले दिनों में बारिश के बजाय बढ़ता तापमान प्रदेश के मौसम की प्रमुख तस्वीर बन सकता है।