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वाराणसी में बुढ़ापे में तलाक का बढ़ता चलन? दो साल में 240 बुजुर्ग दंपतियों ने कोर्ट का रुख किया

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
3 October 2026 12:24 PM 1 मिनट पठन 7483 Views
वाराणसी में बुढ़ापे में तलाक का बढ़ता चलन? दो साल में 240 बुजुर्ग दंपतियों ने कोर्ट का रुख किया

वाराणसी: आमतौर पर उम्र के आखिरी पड़ाव पर पति-पत्नी को एक-दूसरे का सहारा माना जाता है, लेकिन वाराणसी में सामने आ रहे कुछ मामले रिश्तों की बदलती तस्वीर दिखा रहे हैं। यहां पिछले दो वर्षों में करीब 240 ऐसे आवेदन सामने आए हैं, जिनमें बुजुर्ग दंपतियों ने तलाक या अलग रहने के लिए अदालत का रुख किया। इनमें केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि महिलाएं भी शामिल हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक इन मामलों में 80 वर्ष की उम्र वाले पांच दंपती भी शामिल हैं। वहीं करीब 40 दंपती ऐसे बताए गए हैं जिनकी उम्र 68 से 72 वर्ष के बीच है। फिलहाल कई मामलों में अदालत की काउंसिलिंग प्रक्रिया चल रही है।

जब जिम्मेदारियां खत्म हुईं तो सामने आए पुराने मतभेद

काउंसिलिंग के दौरान सामने आने वाली बातों के अनुसार, कई बुजुर्ग दंपतियों ने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा नौकरी, बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जिम्मेदारियां पूरी करने में बिताया। बच्चों के अपने जीवन में व्यस्त होने और अलग रहने के बाद पति-पत्नी के बीच पहले से मौजूद मतभेद ज्यादा स्पष्ट होकर सामने आने लगे।

विशेष लोक अभियोजक संतोष कुमार सिंह के अनुसार, कुछ मामलों में बुजुर्ग दंपती अब अपने बचे हुए जीवन को अपनी पसंद के अनुसार जीना चाहते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन, बचत और आर्थिक आत्मनिर्भरता भी उनके फैसले लेने की क्षमता को प्रभावित करने वाला एक पहलू बताया गया है।

आर्थिक आत्मनिर्भरता भी बनी अहम वजह

रिपोर्ट के मुताबिक वाराणसी की फैमिली कोर्ट में सामने आए बुजुर्ग दंपतियों के कुछ मामलों में आर्थिक आत्मनिर्भरता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती दिखाई देती है।

पहले कई दंपती बच्चों और परिवार की जिम्मेदारियों के कारण रिश्ते में चल रहे मतभेदों के बावजूद साथ रहते थे। लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद जब आर्थिक स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर हुई और बच्चों की जिम्मेदारियां कम हुईं, तो कुछ लोगों ने अलग रहने या वैवाहिक संबंध समाप्त करने का निर्णय लिया।

हालांकि, हर मामले की परिस्थितियां अलग हैं और किसी एक कारण को सभी मामलों पर लागू नहीं किया जा सकता।

केस 1: बच्चों की जिम्मेदारी पूरी हुई तो मांगी मानसिक शांति

भोजूबीर क्षेत्र के 67 वर्षीय दंपती का मामला भी इसी तरह का है। रिपोर्ट के अनुसार उनके बच्चे पढ़ाई और नौकरी के बाद अलग रहने लगे। इसके बाद पति-पत्नी के बीच पहले से चले आ रहे मतभेद अधिक स्पष्ट हो गए।

पत्नी ने काउंसिलिंग के दौरान कहा कि बच्चों की परवरिश और परिवार की जिम्मेदारियों में उनका जीवन बीत गया। अब वह मानसिक शांति के साथ रहना चाहती हैं। दोनों आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बताए गए हैं और इसी वजह से मामला अदालत तक पहुंचा।

केस 2: 80 साल की उम्र में तलाक की अर्जी

चौबेपुर क्षेत्र के एक व्यक्ति करीब पांच दशक पहले नौकरी के लिए झारखंड गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने वहां कोयला खदान में काम किया और इसी दौरान एक स्थानीय महिला के संपर्क में आए।

सेवानिवृत्ति के बाद यह मामला सामने आया। संपत्ति को लेकर विवाद बढ़ने के बाद अब उन्होंने वाराणसी में अपनी पत्नी से तलाक के लिए आवेदन किया है। मामला फिलहाल काउंसिलिंग में है।

केस 3: घरेलू सहायिका से संबंध के आरोप के बाद विवाद

जैतपुरा क्षेत्र में रहने वाले 78 वर्षीय दंपती का मामला भी अदालत तक पहुंचा। रिपोर्ट के अनुसार पत्नी ने काउंसिलिंग के दौरान पति पर लंबे समय से घरेलू सहायिका के साथ नजदीकी संबंध होने का आरोप लगाया।

बच्चों के बड़े होकर अलग रहने के बाद परिवार की ओर से सुलह कराने का दबाव भी कम हो गया। इसके बाद पत्नी ने अलग रहने की इच्छा जताई। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये काउंसिलिंग के दौरान सामने आए आरोप हैं, जिन्हें अदालत के अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

पहले सामाजिक दबाव, अब बदल रही सोच

विशेषज्ञों के मुताबिक समाज में तलाक और अलगाव को लेकर सोच में बदलाव भी ऐसे मामलों की संख्या पर असर डाल सकता है।

आईएमएस बीएचयू के मनोचिकित्सा विभाग के डीन प्रो. संजय गुप्ता ने Amar Ujala से बातचीत में कहा कि वर्तमान समय में लोग अधिक स्वतंत्र हुए हैं और अपने जीवन में दूसरों का हस्तक्षेप स्वीकार करने की प्रवृत्ति कम हुई है। उनके अनुसार मनमुटाव के बाद समझौते की कोशिश के बजाय कई बार अहंकार और दूरी बढ़ जाती है।

उनके अनुसार पहले सामाजिक भय के कारण भी तलाक के मामले कम सामने आते थे। अब उम्र अधिक होने के बावजूद लोग अपने जीवन को लेकर स्वतंत्र निर्णय लेने की कोशिश कर रहे हैं।

सिर्फ बुजुर्गों में ही नहीं, अन्य आयु वर्ग में भी वैवाहिक विवाद

वाराणसी की फैमिली कोर्ट में वैवाहिक विवादों की तस्वीर केवल बुजुर्ग दंपतियों तक सीमित नहीं है। फरवरी 2026 की एक रिपोर्ट में वाराणसी में एक साल के दौरान करीब 2,250 वैवाहिक विवाद के मामले अदालत पहुंचने की जानकारी दी गई थी। उसी रिपोर्ट में 15 साल तक साथ रहने के बाद अलगाव के लिए अदालत पहुंचने वाले दंपतियों का भी उल्लेख था।

इससे यह स्पष्ट होता है कि वैवाहिक विवाद केवल कम उम्र या नई शादियों तक सीमित नहीं हैं। लंबे समय से विवाहित दंपती भी परिस्थितियों के बदलने के बाद कानूनी रास्ता अपना सकते हैं।

काउंसिलिंग की भूमिका महत्वपूर्ण

फैमिली कोर्ट में तलाक से जुड़े मामलों में काउंसिलिंग महत्वपूर्ण चरण हो सकता है। इसका उद्देश्य दंपती के बीच विवाद के कारणों को समझना और संभव होने पर आपसी सहमति या समाधान का रास्ता तलाशना होता है।

वाराणसी के इन बुजुर्ग दंपतियों के कई मामलों में भी काउंसिलिंग प्रक्रिया चलने की जानकारी सामने आई है। इसलिए अदालत में आवेदन पहुंचना अपने आप में तलाक होने का अंतिम प्रमाण नहीं है।

क्यों चर्चा में हैं बुजुर्ग दंपतियों के ये मामले?

इन मामलों की खास बात केवल उम्र नहीं है। कई दंपतियों ने अपनी जिंदगी के दशकों को परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियों में बिताया। जब बच्चे अपने जीवन में आगे बढ़ गए और नौकरी से सेवानिवृत्ति हुई, तो उनके सामने अपने रिश्ते और भविष्य को लेकर नए सवाल आए।

किसी मामले में पुराने मतभेद कारण बताए गए हैं, तो किसी में आर्थिक स्वतंत्रता, संपत्ति विवाद या विवाहेतर संबंध के आरोप सामने आए हैं। इसलिए हर मामले की पृष्ठभूमि अलग है।

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