दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन संपन्न हो गया. यह सफल रहा या असफल, इस बाबत कूटनीतिक और सामरिक विशेषज्ञों में मतैक्य नहीं है. फिर भी इसमें ब्रिक्स देशों के राष्ट्राध्यक्षों के आने और साझा घोषणा पत्र जारी हो जाने से इसे विफल तो नहीं ही कहा जा सकता. सच यह भी है कि चीन कभी भी किसी प्रकार से भारत का न तो भला चाहेगा और ना ही अपने ऑल वेदर फ्रेंड पाकिस्तान के विरुद्ध तनकर खड़ा होगा. अमेरिका भी चीन के खिलाफ बाहें जितनी चढ़ाये, वह एक सीमा से आगे नहीं बढ़ेगा. इस महीने शी जिनपिंग अमेरिका जायेंगे और डोनाल्ड ट्रंप नवंबर में बीजिंग पहुंचने वाले हैं जहां पुतिन भी पहुंचेंगे. यही राजनय है और इसे समझने में दिमाग चकरा जाएगा.
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