प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में सलीम अंसारी से देवव्रत शुक्ला बने व्यक्ति की शिकायत पर घूरपुर पुलिस ने अतीक अहमद के चचेरे भाई हमजा समेत छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि मकान में किराए पर रह रहे व्यक्ति से कमरा खाली कराने को लेकर हुए विवाद के दौरान उन्हें और उनकी मां को जान से मारने की धमकी दी गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।
वीडियो वायरल होने के बाद सक्रिय हुई पुलिस
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रयागराज के सारंगापुर गांव के निवासी देवव्रत शुक्ला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर मुख्यमंत्री से सुरक्षा की गुहार लगाई थी। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया और शिकायत की पड़ताल की।
देवव्रत ने अपने बयान में दावा किया कि उन्होंने 12 फरवरी 2024 को अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन किया था। उन्होंने पहले अपना नाम सलीम अंसारी बताया था और बाद में देवव्रत शुक्ला नाम अपनाया।
किराए का कमरा खाली कराने को लेकर हुआ विवाद
देवव्रत शुक्ला की शिकायत के अनुसार, उन्होंने अपने मकान का एक कमरा रेशमा बेगम को किराए पर दिया था। उनका आरोप है कि किराया नहीं मिलने के कारण उन्होंने किराएदार से कमरा खाली करने को कहा था। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि हमजा, उनके तीन बेटों, भांजे और बहन विटोला ने उन्हें धमकी दी। देवव्रत का यह भी आरोप है कि उनके धर्म परिवर्तन को लेकर नाराजगी जताई गई और उन्हें तथा उनकी मां को जान से मारने की धमकी दी गई।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले में पुलिस की जांच जारी है।
घूरपुर पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ दर्ज की FIR
लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, घूरपुर थाना प्रभारी हरकेश सिंह ने बताया कि शिकायत के आधार पर एक महिला समेत छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस मामले से जुड़े आरोपों की जांच कर रही है और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
धर्म परिवर्तन को लेकर क्या है मामला?
देवव्रत शुक्ला ने अपनी शिकायत में कहा है कि उन्होंने अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन किया था। दूसरी ओर, उन्होंने आरोप लगाया कि इसी बात को लेकर उन्हें धमकाया गया। फिलहाल, धर्म परिवर्तन से जुड़ा विवाद और किराए का कमरा खाली कराने का मामला शिकायत में बताए गए घटनाक्रम का हिस्सा हैं।
इस मामले में आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है। एफआईआर दर्ज होना अपने आप में किसी आरोपी का दोष सिद्ध होना नहीं है। पुलिस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया से ही मामले के तथ्यों की पुष्टि होगी।
नोट: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट और पुलिस के हवाले से प्रकाशित जानकारी पर आधारित है। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।