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यूपी में 11 लाख से ज्यादा महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’, जानें कैसे बढ़ रही ग्रामीण महिलाओं की कमाई

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
10 October 2026 1:42 PM 1 मिनट पठन 85 Views
यूपी में 11 लाख से ज्यादा महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’, जानें कैसे बढ़ रही ग्रामीण महिलाओं की कमाई

लखनऊ, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए चलाई जा रही ‘लखपति दीदी’ पहल के तहत लाखों महिलाओं को आजीविका के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाओं की आय बढ़ाना और उन्हें खेती, पशुपालन, छोटे कारोबार तथा अन्य गतिविधियों के जरिए स्थायी कमाई करने में मदद देना है।

केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार, 30 जून 2025 तक उत्तर प्रदेश में 11,15,982 महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ के रूप में दर्ज किया गया था। यह उस तारीख तक का स्वयं-रिपोर्ट किया गया आंकड़ा है, इसे अक्टूबर 2026 की वर्तमान कुल संख्या नहीं माना जाना चाहिए। <Cite refs={[“turn853744search0″,”turn853744search1”]}/>

क्या है लखपति दीदी योजना?

लखपति दीदी पहल केंद्र सरकार के दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) का हिस्सा है। इसे ग्रामीण विकास मंत्रालय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से लागू करता है।

इस पहल के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को ऐसी आजीविका गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जाता है, जिनसे उनके परिवार की सालाना आय कम से कम एक लाख रुपये तक पहुंच सके और यह आय लगातार बनी रहे। आय का आकलन कम से कम चार कृषि मौसमों और/या व्यावसायिक चक्रों के आधार पर किया जाता है। <Cite refs={[“turn853744search2″,”turn853744search3”]}/>

महिलाओं की कमाई बढ़ाने के लिए किन गतिविधियों पर जोर?

लखपति दीदी पहल के तहत महिलाओं को अपनी आजीविका की योजना बनाने, कौशल विकसित करने, वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बनाने और अपने उत्पादों के लिए बाजार तलाशने में सहायता दी जाती है।

इसमें कई तरह की गतिविधियां शामिल हो सकती हैं:

  • खेती और कृषि आधारित काम: फसल उत्पादन तथा कृषि से जुड़ी दूसरी गतिविधियां।
  • पशुपालन: स्थानीय जरूरतों के अनुसार पशुपालन और दुग्ध उत्पादन।
  • छोटे कारोबार: घरेलू उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य सूक्ष्म उद्यम।
  • सेवा क्षेत्र: स्थानीय मांग के अनुसार सेवाएं और स्वरोजगार।
  • वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण: बैंकिंग सेवाओं, ऋण और कौशल विकास तक पहुंच बढ़ाने का प्रयास।

इन गतिविधियों का उद्देश्य महिलाओं को नियमित आय के अवसर उपलब्ध कराना और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना है। <Cite refs={[“turn853744search2″,”turn853744search3″,”turn853744search5”]}/>

स्वयं सहायता समूहों की क्या है भूमिका?

स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को बचत, सामूहिक काम और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन समूहों के माध्यम से महिलाओं को वित्तीय जानकारी, बैंक ऋण और कारोबार शुरू करने या बढ़ाने से जुड़ी सहायता मिल सकती है।

लखपति दीदी पहल के अंतर्गत महिलाओं की जरूरत और उनके स्थानीय अवसरों के अनुसार आजीविका की योजना बनाने पर जोर दिया जाता है। हालांकि, सहायता और ऋण की पात्रता संबंधित नियमों तथा समूह की स्थिति पर निर्भर करती है। <Cite refs={[“turn853744search3″,”turn853744search4”]}/>

लखपति दीदी बनने के लिए क्या जरूरी है?

आधिकारिक लखपति दीदी पोर्टल के अनुसार, इस पहल में स्वयं सहायता समूह की ऐसी महिला को शामिल किया जाता है, जिसके परिवार की सालाना आय कम से कम एक लाख रुपये हो और यह आय निर्धारित अवधि तक टिकाऊ बनी रहे।

संभावित लाभार्थियों की पहचान में स्वयं सहायता समूह से जुड़ाव, आजीविका गतिविधियों और संबंधित मिशन के नियमों को ध्यान में रखा जाता है। इच्छुक महिलाएं अपने क्षेत्र के स्वयं सहायता समूह, ग्राम संगठन या राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से संपर्क करके पात्रता और उपलब्ध सहायता की जानकारी ले सकती हैं। <Cite refs={[“turn853744search3″,”turn853744search6”]}/>

यूपी में ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता पर जोर

उत्तर प्रदेश में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से इस पहल को लागू किया जाता है। खेती, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण और छोटे कारोबार जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों के लिए आय के नए स्रोत तैयार करना है।

लखपति दीदी पहल की प्रगति के आंकड़ों को समझते समय उनकी तारीख और गणना का आधार देखना जरूरी है। अलग-अलग रिपोर्टों में अलग-अलग अवधि के आंकड़े हो सकते हैं, इसलिए उन्हें सीधे वर्तमान संख्या के रूप में तुलना नहीं करना चाहिए।

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