लखनऊ/गोरखपुर: नेपाल के पहाड़ी इलाकों और उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में लगातार हो रही बारिश से कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। इसके चलते गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर और महराजगंज के निचले इलाकों में अचानक बाढ़ आने की आशंका जताई गई है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और नदी-नालों के तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है।
नेपाल की बारिश का पूर्वांचल की नदियों पर असर
नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश होने से बड़ी गंडक, राप्ती, रोहिन, चंदन और व्यास जैसी नदियों में पानी बढ़ने की खबर है। नेपाल से आने वाले पानी और स्थानीय बारिश का असर सीमावर्ती क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है।
नदी के जलस्तर में तेजी से बदलाव होने पर निचले इलाकों, नदी किनारे बसे गांवों और जलभराव वाले क्षेत्रों में खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों पर निगरानी रखने और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
सात जिलों में बाढ़ की आशंका
रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश के सात जिलों के कुछ इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा बना हुआ है। इनमें गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर और महराजगंज शामिल हैं।
निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को नदी-नालों के पास जाने से बचने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। विशेष रूप से कच्चे मकानों, कमजोर ढांचों और झोपड़ियों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा पर ध्यान देने की जरूरत है।
महराजगंज में नदियों के जलस्तर पर नजर
महराजगंज जिले में राप्ती, रोहिन और चंदन नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज किए जाने की खबर है। वहीं, नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के बाद बड़ी गंडक नदी में पानी का बहाव भी बढ़ा।
रिपोर्ट में वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से पानी के डिस्चार्ज में वृद्धि का उल्लेख किया गया है। नदी में तेज बहाव के कारण कुशीनगर के रेता क्षेत्र और तटबंधों के आसपास रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। संवेदनशील तटबंधों और कटाव की आशंका वाले स्थानों पर निगरानी जरूरी बताई गई है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए
रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन को अलर्ट मोड में रहने और कमजोर मकानों व झोपड़ियों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जरूरत पड़ने पर ऐसे लोगों को नजदीकी राहत केंद्रों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया है।
बाढ़ जैसी स्थिति बनने पर समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना, राहत व्यवस्था तैयार रखना और नदी के जलस्तर की निगरानी करना प्रशासन के लिए अहम होगा।
बारिश से किसानों की फसलों पर भी असर
लगातार बारिश और तेज हवाओं से गोरखपुर मंडल के कुछ क्षेत्रों में धान और गन्ने की फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। कई निचले खेतों में पानी जमा होने से फसल प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, जिन खेतों में सिंचाई के लिए पानी की कमी थी, वहां बारिश से किसानों को राहत भी मिली है। मौसम का असर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकता है।
बाढ़ के खतरे के बीच लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
- उफनती नदियों, नालों और तेज बहाव वाले पानी से दूर रहें।
- नदी किनारे या कमजोर तटबंधों के पास अनावश्यक रूप से न जाएं।
- प्रशासन के निर्देश मिलने पर सुरक्षित स्थान या राहत केंद्र में पहुंचें।
- बच्चों और पशुओं को जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रखें।
- अफवाहों पर भरोसा न करें और आधिकारिक चेतावनियों का पालन करें।
प्रशासन की निगरानी क्यों जरूरी है?
नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश होने पर सीमावर्ती उत्तर प्रदेश की नदियों में पानी तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में नदी के जलस्तर, बैराज से छोड़े जा रहे पानी और तटबंधों की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों को गंभीरता से लेने और समय रहते सुरक्षित स्थान पर जाने से संभावित नुकसान को कम किया जा सकता है।
नोट: यह लेख 26 सितंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट में दी गई जानकारी पर आधारित है। नदी के जलस्तर और बाढ़ संबंधी अलर्ट समय के साथ बदल सकते हैं। वर्तमान स्थिति के लिए स्थानीय प्रशासन और संबंधित मौसम एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग की ताजा सूचनाएं देखें।