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बिजनौर में तेंदुए का आतंक: 7 साल के बच्चे की मौत, गांव में दहशत का माहौल

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
20 August 2026 1:36 PM 1 मिनट पठन 56576 Views
बिजनौर में तेंदुए का आतंक: 7 साल के बच्चे की मौत, गांव में दहशत का माहौल

बिजनौर, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में तेंदुए के हमले की घटना से एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में दहशत फैल गई है। तेंदुए के हमले में 7 साल के एक बच्चे की मौत की खबर सामने आने के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। घटना ने इलाके में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।

तेंदुए के हमले से बच्चे की मौत

जानकारी के मुताबिक, बच्चा गांव के आसपास मौजूद था, तभी तेंदुए ने उस पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से वहां अफरा-तफरी मच गई। परिजनों और ग्रामीणों ने बच्चे को बचाने की कोशिश की, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे। बच्चे की मौत की खबर से परिवार में कोहराम मच गया और पूरे गांव में शोक का माहौल बन गया।

गांव में फैली दहशत

घटना के बाद ग्रामीणों में तेंदुए को लेकर डर और बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि आसपास के खेतों और झाड़ियों में तेंदुए की मौजूदगी की आशंका बनी हुई है। शाम होते ही ग्रामीण अपने बच्चों को घर से बाहर भेजने से बच रहे हैं।

कई ग्रामीण खेतों में अकेले जाने से भी डर रहे हैं। विशेष रूप से सुबह और शाम के समय खेतों की ओर जाने वाले लोगों में चिंता बढ़ गई है।

गन्ने के खेत बने तेंदुओं का ठिकाना

बिजनौर और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती होती है। घने गन्ने के खेत तेंदुओं को छिपने और शिकार करने के लिए सुरक्षित जगह उपलब्ध कराते हैं। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मानसून के दौरान खेतों में पानी भरने और घनी वनस्पति के कारण इंसानों और वन्यजीवों के बीच आमना-सामना बढ़ सकता है।

बारिश के मौसम में हिरण और जंगली सूअर जैसे जानवर सुरक्षित और सूखी जगह की तलाश में आबादी की तरफ आ सकते हैं। इनके पीछे तेंदुए भी गांवों और खेतों के करीब पहुंच जाते हैं, जिससे हमले का खतरा बढ़ जाता है।

बिजनौर में लगातार सामने आ रहे तेंदुए के हमले

बिजनौर में तेंदुए के हमले की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। अगस्त 2026 की शुरुआत में भी जिले के सिग्निवाला गांव में एक 8 वर्षीय बच्चे की तेंदुए के हमले में मौत की खबर सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक बच्चा अपने माता-पिता के साथ खेत से घर लौट रहा था, तभी तेंदुए ने उस पर हमला कर उसे गन्ने के खेत की ओर खींच लिया था।

इसके अलावा 4 अगस्त को सिखनीवाला गांव में भी एक 10 वर्षीय बच्चे की तेंदुए के हमले में मौत की रिपोर्ट सामने आई थी। इस घटना के बाद भी इलाके में दहशत का माहौल बन गया था।

वन विभाग ने जारी की थी सतर्क रहने की अपील

तेंदुए के बढ़ते हमलों को देखते हुए वन विभाग ने ग्रामीणों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। लोगों से कहा गया है कि वे सुबह और शाम के समय खेतों में अकेले न जाएं। घनी वनस्पति वाले इलाकों में विशेष सावधानी बरतने और तेंदुआ दिखाई देने पर तुरंत वन विभाग को सूचना देने की अपील की गई है।

वन विभाग का कहना है कि ग्रामीण घबराएं नहीं, लेकिन जरूरी सुरक्षा उपायों का पालन करें।

बच्चों को लेकर सबसे ज्यादा चिंता

तेंदुए के हमलों में बच्चों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने ग्रामीण परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। गांवों में माता-पिता बच्चों को अकेले बाहर भेजने से बच रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाए और तेंदुए की मौजूदगी वाले इलाकों में जल्द कार्रवाई की जाए।

इंसान और वन्यजीव संघर्ष बड़ी चुनौती

बिजनौर में तेंदुओं की मौजूदगी और लगातार सामने आ रहे हमले इंसान और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष की गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। एक ओर वन्यजीवों के संरक्षण की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों की सुरक्षा भी बेहद महत्वपूर्ण है।

गन्ने के खेतों और आबादी के बीच तेंदुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग, प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। कैमरा ट्रैप, नियमित गश्त और तेंदुओं की गतिविधियों पर निगरानी जैसे उपायों से ऐसे हादसों को कम करने की कोशिश की जा सकती है।

निष्कर्ष: बिजनौर में 7 साल के बच्चे की मौत ने एक बार फिर तेंदुए के आतंक और मानव-वन्यजीव संघर्ष को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। ग्रामीणों में भय का माहौल है और अब सभी की नजर वन विभाग की अगली कार्रवाई पर है।

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